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गोमती किनारे बदल जाएगी पूरी तस्वीर,पर्यटन हब के रुप में होगा विकसित
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जौनपुर। विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रहे शहर में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसे नये पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ पर्यटन विभाग भी तेजी से काम कर रहा है। जिसके लिए एक के बाद एक प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं, जिसे शासन से भी मंजूरी मिल रही है। आने वाले समय में गोमती नदी के किनारे की तस्वीर बदल जाएगी और यह पर्यटन हब हो जाएगा। जिससे रोजगार भी बढ़ेगा।
शाही किला के बगल और शहर के मध्य गुजरी गोमती नदी के किनारे पर्यटन के विकासित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ावा मिलेगा। गोमती नदी के दोनों छोर पर बसे जौनपुर को शर्की शासकों ने राजधानी बनाई। उन्होंने यहां की कला, संस्कृति और साहित्य को पहचान दिलाई। शेरशाह सूरी ने यहां बचपन बिताया तो मुगल बादशाह अकबर ने भी लंबा समय यहां व्यतीत किया था। मुगल काल में भी यहां कई निर्माण हुए। यहां अनेक ऐतिहासिक इमारतें हैं। शाही किला, अटाला मस्जिद, लाल दरवाजा, बड़ी मस्जिद, झंझरी मस्जिद, चार अंगुल मस्जिद, इमामबाड़ा, मकबरा, शाही पुल आदि ऐसे स्थल हैं, जो ऐतिहासिक महत्व तो बताते ही हैं। साथ ही इनके शिल्प भी हैरान करते हैं। इन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन ले रखा है। हर स्थल के बाहर घेरेबंदी कर बड़े-बड़े बोर्ड तो लगा दिए गए हैं। हालांकि, कोरोना काल के पहले तक वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या आने वाले विदेशी यहां घूमने आते थे।
इस क्षेत्र को जिला प्रशासन ने वाराणसी आने वाले पर्यटकों के पैकेज से जोड़ने की दिशा में काम करना शुरू किया है। वहीं, पर्यटन विभाग भी इसे बढ़ावा देने में लगा है, जिसने प्रयोग के तौर पर चार साल पहले एक करोड़ रुपये की लागत से शाही किला पर रंगीन लाइटें लगवाकर उसे नगर पालिका प्रशासन को सौंप दिया था, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर आज भी देखी जाती है। हालांकि देखरेख के अभाव में ये लाइटें खराब होने लगी हैं। पर्यटन को विक सित करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। शाही किला पर फसाड लाइट, लाइट एंड साउंड शो, अटाला मस्जिद में कलर लाइटिंग के साथ के लिए कुल 338 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। वहीं, इसके पहले शाही पुल के पास स्थित हनुमान मंदिर, राम जानकारी मंदिर, काली मंदिर, दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर के विकास के लिए 675.27 लाख रुपये और शास्त्री पुल के पास स्थित शिव मंदिर, हनुमान मंदिर के विकास के लिए 116.20 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया,जिसका शिलान्यास इसी साल सात जनवरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी किया था। इसपर जल्द ही कार्य शुरू होने की संभावना है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट पूरा होने से गोमती नदी के किनारे पूरी तस्वीर ही बदल जाएगी, क्योंकि इस समय नमामि गंगे परियोजना के तहत 8.05 करोड़ की लागत से गोमती नदी के किनारे लखनऊ रिवर फ्रंट की तर्ज पर यहां के घाटों को विकसित किया जा रहा है।
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जौनपुर। मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत गत वित्तीय वर्ष में जनपद के सभी 9 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्थल का पर्यटन विकास किया गया है। इसमें 50 लाख में बदलापुर में गौरीशंकर धाम चंदापुर, सदर में 50 लाख में शीतला धाम चौकिया मंदिर परिसर का विस्तार एवं जीर्णाद्वार, 50 लाख में जफराबाद में ठाकुर सल्तनत बहादुर व उनके पुत्र नेवढिया निवासी डा. संग्राम सिंह के स्मारक को विकसित निर्माण करने का कार्य, 50 लाख में मड़ियाहूं में लुंबनी-दुद्धी मार्ग पर निर्मित सेतु के पूर्व स्थित पार्क को विकसित करने का काम, 50 लाख में मुंगराबादशाहपुर में गौरी शंकर धाम सुजानगंज में पर्यटन विकास, 50 लाख में केराकत विधानसभा में बाराह कोटि स्थल रामगढ़ मौढ़ैला का विस्तार एवं जीर्णोद्धार, 50 लाख में मल्हनी में मई में राउर बाबा मंदिर एवं तालाब का पर्यटन विकास, 49.32 लाख में मछलीशहर में अजोसी हनुमान मंदिर का पर्यटन विकास और 43.36 लाख में शाहगंज में बुढ़वा माई स्थल का पर्यटन विकास करने का निर्णय लिया गया था। इसमें मछली और शाहंगज की परियोजना पर काम चल रहा है, जबकि शेष पूर्ण हो चुके हैं। वहीं, राज्य योजना के तहत 52 लाख की लागत से मां शीतला चौकिया धाम का समेकित पर्यटन विकास कराया गया। इसी तरह जफराबाद स्थित योगी वीर बाबा रामेश्वर मंदिर का पर्यटन विकास 88.08 लाख रुपये की लागत से किया गया।
शाही पुल के पास घाट एवं हनुमान मंदिर, शिव मंदिर का सुंदरी करण होगा तथा पर्यटन को और अधिक विकसित किया जाएगा। साथ ही शाही किले में साउंड एंड लाइट शो की योजना प्रस्तावित है। इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद जौनपुर में पर्यटकों के प्रवास में वृद्धि होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा।
-कीर्तिमान श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी, वाराणसी-विंध्याचल मंडल------
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शाही किला के बगल और शहर के मध्य गुजरी गोमती नदी के किनारे पर्यटन के विकासित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ावा मिलेगा। गोमती नदी के दोनों छोर पर बसे जौनपुर को शर्की शासकों ने राजधानी बनाई। उन्होंने यहां की कला, संस्कृति और साहित्य को पहचान दिलाई। शेरशाह सूरी ने यहां बचपन बिताया तो मुगल बादशाह अकबर ने भी लंबा समय यहां व्यतीत किया था। मुगल काल में भी यहां कई निर्माण हुए। यहां अनेक ऐतिहासिक इमारतें हैं। शाही किला, अटाला मस्जिद, लाल दरवाजा, बड़ी मस्जिद, झंझरी मस्जिद, चार अंगुल मस्जिद, इमामबाड़ा, मकबरा, शाही पुल आदि ऐसे स्थल हैं, जो ऐतिहासिक महत्व तो बताते ही हैं। साथ ही इनके शिल्प भी हैरान करते हैं। इन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन ले रखा है। हर स्थल के बाहर घेरेबंदी कर बड़े-बड़े बोर्ड तो लगा दिए गए हैं। हालांकि, कोरोना काल के पहले तक वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या आने वाले विदेशी यहां घूमने आते थे।
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इस क्षेत्र को जिला प्रशासन ने वाराणसी आने वाले पर्यटकों के पैकेज से जोड़ने की दिशा में काम करना शुरू किया है। वहीं, पर्यटन विभाग भी इसे बढ़ावा देने में लगा है, जिसने प्रयोग के तौर पर चार साल पहले एक करोड़ रुपये की लागत से शाही किला पर रंगीन लाइटें लगवाकर उसे नगर पालिका प्रशासन को सौंप दिया था, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर आज भी देखी जाती है। हालांकि देखरेख के अभाव में ये लाइटें खराब होने लगी हैं। पर्यटन को विक सित करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। शाही किला पर फसाड लाइट, लाइट एंड साउंड शो, अटाला मस्जिद में कलर लाइटिंग के साथ के लिए कुल 338 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। वहीं, इसके पहले शाही पुल के पास स्थित हनुमान मंदिर, राम जानकारी मंदिर, काली मंदिर, दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर के विकास के लिए 675.27 लाख रुपये और शास्त्री पुल के पास स्थित शिव मंदिर, हनुमान मंदिर के विकास के लिए 116.20 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया,जिसका शिलान्यास इसी साल सात जनवरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी किया था। इसपर जल्द ही कार्य शुरू होने की संभावना है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट पूरा होने से गोमती नदी के किनारे पूरी तस्वीर ही बदल जाएगी, क्योंकि इस समय नमामि गंगे परियोजना के तहत 8.05 करोड़ की लागत से गोमती नदी के किनारे लखनऊ रिवर फ्रंट की तर्ज पर यहां के घाटों को विकसित किया जा रहा है।
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जौनपुर। मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत गत वित्तीय वर्ष में जनपद के सभी 9 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्थल का पर्यटन विकास किया गया है। इसमें 50 लाख में बदलापुर में गौरीशंकर धाम चंदापुर, सदर में 50 लाख में शीतला धाम चौकिया मंदिर परिसर का विस्तार एवं जीर्णाद्वार, 50 लाख में जफराबाद में ठाकुर सल्तनत बहादुर व उनके पुत्र नेवढिया निवासी डा. संग्राम सिंह के स्मारक को विकसित निर्माण करने का कार्य, 50 लाख में मड़ियाहूं में लुंबनी-दुद्धी मार्ग पर निर्मित सेतु के पूर्व स्थित पार्क को विकसित करने का काम, 50 लाख में मुंगराबादशाहपुर में गौरी शंकर धाम सुजानगंज में पर्यटन विकास, 50 लाख में केराकत विधानसभा में बाराह कोटि स्थल रामगढ़ मौढ़ैला का विस्तार एवं जीर्णोद्धार, 50 लाख में मल्हनी में मई में राउर बाबा मंदिर एवं तालाब का पर्यटन विकास, 49.32 लाख में मछलीशहर में अजोसी हनुमान मंदिर का पर्यटन विकास और 43.36 लाख में शाहगंज में बुढ़वा माई स्थल का पर्यटन विकास करने का निर्णय लिया गया था। इसमें मछली और शाहंगज की परियोजना पर काम चल रहा है, जबकि शेष पूर्ण हो चुके हैं। वहीं, राज्य योजना के तहत 52 लाख की लागत से मां शीतला चौकिया धाम का समेकित पर्यटन विकास कराया गया। इसी तरह जफराबाद स्थित योगी वीर बाबा रामेश्वर मंदिर का पर्यटन विकास 88.08 लाख रुपये की लागत से किया गया।
शाही पुल के पास घाट एवं हनुमान मंदिर, शिव मंदिर का सुंदरी करण होगा तथा पर्यटन को और अधिक विकसित किया जाएगा। साथ ही शाही किले में साउंड एंड लाइट शो की योजना प्रस्तावित है। इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद जौनपुर में पर्यटकों के प्रवास में वृद्धि होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन होगा।
-कीर्तिमान श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी, वाराणसी-विंध्याचल मंडल------