शाहगंज। नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिन श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के वनगमन, महर्षि वाल्मीकि मिलन, हनुमान-सुग्रीव मित्रता और बालि वध का प्रसंग सुन भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास राजन महाराज ने बताया कि प्रभु श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा और माता कैकेयी की इच्छा पूर्ण करने के लिए राजसुख त्यागकर वनवास स्वीकार किया। कथाव्यास ने राम के त्याग और धर्मपालन का वर्णन करते हुए कहा कि पिता के वचन की रक्षा हो जाए इसलिए वन में आया हूं, अपनी मां की कामना पूरी करने आया हूं। उन्होंने बताया कि प्रभु राम ने कभी भी परिस्थितियों को दोष नहीं दिया, बल्कि धर्म के मार्ग पर चलते हुए आदर्श पुत्र, आदर्श भाई और आदर्श राजा का उदाहरण प्रस्तुत किया। महराज ने हनुमान और सुग्रीव की मित्रता व बालि वध का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्रभु राम ने सदैव धर्म और न्याय का साथ दिया। अन्याय और अधर्म के अंत के लिए ही उन्होंने बालि का वध किया और सुग्रीव को उसका अधिकार दिलाया। इस मौके पर आयोजक आनंद अग्रहरि, विशाल अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, कृष्णकांत सोनी, रामअवतार अग्रहरि, अश्वनी अग्रहरि आदि रहे।

शाहगंज में श्रीराम कथा सुनते भक्तजन। संवाद