सिंगरामऊ। घाघरपारा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा में बृंदावन धाम से पधारे कथावाचक आचार्य राम बहादुर मिश्र नें कहा कि भागवत पुराण हिंदू अठारह पुराणों में एक है। सत्संग और कथा के माध्यम से मनुष्य को ईश्वर के दर्शन मिलते हैं। इसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्षदायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणियों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोह माया के चक्कर में पड़ जाता है। इसलिए मनुष्य को समय निकालकर कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। वास्तव में भगवान की कथा के श्रवण का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त हो जाता है। कथा श्रवण कर रहे श्रोता सुदामा चरित्र का वर्णन सुन कर भक्तिरस में डूब गए। अंत में मुख्य यजमान ब्रजबाला व लालचंद उपाध्याय ने भागवत भगवान की आरती कर कथा श्रवण कर रहे श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मोती लाल, कैलाश उपाध्याय, अरविंद उपाध्याय, सत्यम, कन्हैया लाल, अजीत, सुजीत, संजीव ने कथा का रसपान किया।