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सतर्कता है न कोई रोकटोक, बस कागजों में बन गए कंटेनमेन जोन...
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जौनपुर। कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ी तो प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही भी शुरू हो गई है। नया मरीज मिलने के बाद इलाकों को सील कर सैनिटाइज कराने और स्वास्थ्य परीक्षण में सुस्ती बरती जा रही है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां मरीज मिलने के कई दिन बाद भी न तो दवा का छिड़काव और न ही वहां की घेरेबंदी हुई है। कंटेनमेंट एरिया की निशानदेही में कोरमपूर्ति का असर है कि लोग बेधड़क वहां से आ-जा रहे हैं। दुकानें खोलकर खरीद-बिक्री की जा रही है। सड़कों पर लोग घूम रहे हैं तो घरों से बाहर निकलकर बच्चे क्रिकेट खेलते नजर आ रहे हैं। आमजन से सुरक्षा और सावधानी की अपील कर रहे जिम्मेदार खुद लापरवाही की ऐसी मिसालें पेश कर रहे हैं, जिसे देख लोग भी बेपरवाही पर उतारू हैं। सरकारी अमले की सुस्ती से वह मानने लगे हैं कि अब कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इन लापरवाहियों की असर है कि अब संक्रमण स्थानीय स्तर पर फैलने लगा है।
23 मार्च को कोरोना का पहला मरीज मिलने के बाद शहर के फिरोसेपुर मोहल्ले से एक किमी की परिधि को हॉट स्पॉट घोषित करते हुए सील कर दिया गया था। बाद में बड़ी मस्जिद, लाल दरवाजा, बदलापुर के वार्ड नंबर आठ, जलालपुर के ओइना सहित अन्य इलाकों में भी मरीज मिलने के बाद हॉट स्पॉट बनाकर चौकसी बढ़ा दी गई। किसी को भी उस इलाके से बाहर और न ही अंदर जाने की अनुमति मिल रही थी। 28 दिनों तक सतर्कता बनी रही। बाद में हॉट स्पॉट की बजाए कंटेनमेन जोन बनाए जाने लगे। इसमें ढाई सौ मीटर का दायरा सील करने का निर्देश दिया गया। मरीज मिलने के बाद घर से ढाई सौ मीटर में पूरे इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाकर घर-घर जांच और दवाओं के छिड़काव का निर्देश दिया गया है। इस दौरान कंटेनमेंट एरिया में किसी की आवाजाही नहीं होगी। लोगों को घरों में ही रहना है। दुकानें भी बंद रखनी है। जिले में इस वक्त 71 कंटेनमेंट जोन सक्रिय हैं। इसमें शहर का धरनीधरपुर और शाहगंज में आजमगढ़ रोड का हुसैनगंज मोहल्ला भी शामिल हैं। कहने के लिए तो इन इलाकों को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है, मगर यहां सतर्कता सिर्फ कागजों में ही बरती जा रही है। शहर के धरनीधरपुर मोहल्ले में स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी पॉजिटिव मिला था। मोहल्ले में कहीं भी न तो घेरेबंदी हुई है और न ही छिड़काव कराया गया है। मोहल्ले में ज्यादातर लोगों का यह पता नहीं कि वहां कोई मरीज भी मिला है। जानकारी के अभाव में लोग बेधड़क प्रतिबंधित क्षेत्र से आवाजाही भी कर रहे हैं। ऐसे में कोरोना किसी और को भी गिरफ्त में ले ले तो कोई हैरानी नहीं।
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23 मार्च को कोरोना का पहला मरीज मिलने के बाद शहर के फिरोसेपुर मोहल्ले से एक किमी की परिधि को हॉट स्पॉट घोषित करते हुए सील कर दिया गया था। बाद में बड़ी मस्जिद, लाल दरवाजा, बदलापुर के वार्ड नंबर आठ, जलालपुर के ओइना सहित अन्य इलाकों में भी मरीज मिलने के बाद हॉट स्पॉट बनाकर चौकसी बढ़ा दी गई। किसी को भी उस इलाके से बाहर और न ही अंदर जाने की अनुमति मिल रही थी। 28 दिनों तक सतर्कता बनी रही। बाद में हॉट स्पॉट की बजाए कंटेनमेन जोन बनाए जाने लगे। इसमें ढाई सौ मीटर का दायरा सील करने का निर्देश दिया गया। मरीज मिलने के बाद घर से ढाई सौ मीटर में पूरे इलाके को कंटेनमेंट जोन बनाकर घर-घर जांच और दवाओं के छिड़काव का निर्देश दिया गया है। इस दौरान कंटेनमेंट एरिया में किसी की आवाजाही नहीं होगी। लोगों को घरों में ही रहना है। दुकानें भी बंद रखनी है। जिले में इस वक्त 71 कंटेनमेंट जोन सक्रिय हैं। इसमें शहर का धरनीधरपुर और शाहगंज में आजमगढ़ रोड का हुसैनगंज मोहल्ला भी शामिल हैं। कहने के लिए तो इन इलाकों को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है, मगर यहां सतर्कता सिर्फ कागजों में ही बरती जा रही है। शहर के धरनीधरपुर मोहल्ले में स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी पॉजिटिव मिला था। मोहल्ले में कहीं भी न तो घेरेबंदी हुई है और न ही छिड़काव कराया गया है। मोहल्ले में ज्यादातर लोगों का यह पता नहीं कि वहां कोई मरीज भी मिला है। जानकारी के अभाव में लोग बेधड़क प्रतिबंधित क्षेत्र से आवाजाही भी कर रहे हैं। ऐसे में कोरोना किसी और को भी गिरफ्त में ले ले तो कोई हैरानी नहीं।
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