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फिर बिगड़ा मौसम का मिजाज, बढ़ी किसानों की चिंता
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जौनपुर/बरईपार। मौसम ने शनिवार को फिर करवट बदली है। सुबह से ही बादल छाए रहे। हल्की बूंदाबादी और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि अब फिर से बारिश हुई तो फसलों से बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो जाएगी। उधर, आम लोगों में इस बात की चिंता है कि कहीं बारिश के बाद तापमान लुढ़कने से कोरोना वायरस को फैलने का मौका न मिल जाए।
पिछले सप्ताह 12-13 मार्च को आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। कई क्षेत्रों में खड़ी गेहूं की फसल खेत में ही लोट गई। मौसम साफ होने के बाद किसान फसलों को फिर से खड़ा करने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। इस बीच शनिवार की सुबह मौसम ने फिर करवट ली। तेज हवा के साथ बूंदाबादी हुई तो किसान सहम गए। उन्हें फसलों की चिंता सताने लगी। आसमान की ओर देखकर वह ईश्वर से बारिश रोकने की प्रार्थना में जुट गए। संयोग रहा कि बारिश तेज नहीं हुई, लेकिन उनके भय में आशंकाएं अभी खत्म नहीं हुई है। दोपहर तक बदली छाई रही। अपराह्न तीन बजे के बाद हल्की धूप निकली तो खेतिहर वर्ग को थोड़ी राहत मिली। बरईपार क्षेत्र के किसान अखिलेश कुमार, रमेश चंद्र, सुले यादव, रामसूरत, हरिप्रसाद यादव आदि ने बताया कि बरसात से काफी फसलों को नुकसान हो चुका है। गेहूं की फसल बरसात से लोट गई थी। अन्य फसलें भी बरसात में भीग जाने से अंकुरित होने लगी थी। जो कुछ बची है उसे निपटा लेने में ही कुछ मिल सकता है, लेकिन बूंदाबादी से फसल नरम हो गई। उधर, कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक डॉ.पंकज जायसवाल ने बताया कि मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है। 22 मार्च को भी हल्की से मध्यम वर्षा के आसार हैं। किसान फसलों की देखभाल के लिए सतर्कता बरतें।
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पिछले सप्ताह 12-13 मार्च को आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। कई क्षेत्रों में खड़ी गेहूं की फसल खेत में ही लोट गई। मौसम साफ होने के बाद किसान फसलों को फिर से खड़ा करने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। इस बीच शनिवार की सुबह मौसम ने फिर करवट ली। तेज हवा के साथ बूंदाबादी हुई तो किसान सहम गए। उन्हें फसलों की चिंता सताने लगी। आसमान की ओर देखकर वह ईश्वर से बारिश रोकने की प्रार्थना में जुट गए। संयोग रहा कि बारिश तेज नहीं हुई, लेकिन उनके भय में आशंकाएं अभी खत्म नहीं हुई है। दोपहर तक बदली छाई रही। अपराह्न तीन बजे के बाद हल्की धूप निकली तो खेतिहर वर्ग को थोड़ी राहत मिली। बरईपार क्षेत्र के किसान अखिलेश कुमार, रमेश चंद्र, सुले यादव, रामसूरत, हरिप्रसाद यादव आदि ने बताया कि बरसात से काफी फसलों को नुकसान हो चुका है। गेहूं की फसल बरसात से लोट गई थी। अन्य फसलें भी बरसात में भीग जाने से अंकुरित होने लगी थी। जो कुछ बची है उसे निपटा लेने में ही कुछ मिल सकता है, लेकिन बूंदाबादी से फसल नरम हो गई। उधर, कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक डॉ.पंकज जायसवाल ने बताया कि मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है। 22 मार्च को भी हल्की से मध्यम वर्षा के आसार हैं। किसान फसलों की देखभाल के लिए सतर्कता बरतें।
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