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Jaunpur News: परिवार में कोई पुरुष सदस्य न होने से नहीं हो पाई तेरहवीं

Tue, 10 Jun 2025 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Jun 2025 12:12 AM IST
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The thirteenth day ceremony could not be held due to absence of any male member in the family
जफराबाद। थाना क्षेत्र के नेवादा बाईपास मार्ग पर 25 मई की रात हुए तिहरे हत्याकांड में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की निर्मम हत्या की गई। इस वारदात में मुखिया लालजी समेत उसके दोनों पुत्रों को हत्या कर दी गई। उसका एक पुत्र जिलाजीत जेल में है, पैरोल पर दो घंटे के लिए बाहर आया था, मुखाग्नि देने के बाद पुन: जेल भेज दिया गया। इसके बाद परिवार में मरने वाले तीनों पुरुषों का तेरहवीं करने वाला कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा है। मामले में 15 दिन बीत जाने के बाद अखबार की टीम को सरिता पत्नी गुड्डू ने बताया कि मेरे देवर जिलाजीत एक मुकदमे में जेल में बंद हैं, सरकार से मांग करेंगे कि उनकी जल्द रिहाई कर दे, जिससे मेरे परिवार का जीविकोपार्जन चले और हमारा बंद पड़ा कारखाना चालू हो सके। इस घटना से परिवार खत्म हो गया है न ही अब कोई बचा है। तेरहवीं में लगने वाला खर्च व उसको संपन्न कराने के लिए कोई पुरुष नहीं बचा है। घटना के दिन अंतिम संस्कार के लिए दो घंटे पैरोल पर देवर को छोड़ा गया था। उसके बाद की सारी प्रक्रियाएं हम महिलाओं को ही करनी पड़ रही है। हम लोगों को आज तक कही से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है, न ही कोई संस्था व नेता ने कुछ दिया। हम लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि देवर को पैरोल पर छोड़ दें। हम लोगों का खर्च चलाना बहुत दूभर हो गया है। हमारे परिवार में ससुर व पति का बैंकों में कहा खाता है हम लोगों को कुछ भी नहीं पता है। मानिसक और आर्थिक स्थिति कमजोर है इस वजह से शांति पाठ 11 जून को सुबह 10 बजे करेंगे। जिसमें प्रसाद रखा जाएगा। यह कार्यक्रम सिर्फ घर की महिलाओं और पड़ोस के ही लोगों तक सीमित रहेगा। प्रभावती पत्नी लालजी ने कहा कि मेरे बेटे लालजी को एक मुकदमे में जेल में बंद किया गया है। सरकार उसकी सजा मेरे परिवार के ऊपर हुए इस नरसंहार के बाद माफ कर दे। ताकि मेरा बंद पड़ा कारखाना चालू हो सके और मेरा बुढ़ापा और परिवार के खर्च का बोझ जिलाजीत उठा सके।
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