{"_id":"57f553674f1c1bd05b26f788","slug":"the-sacrifice-for-humanity","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंसानियत के लिए हुए कुर्बान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंसानियत के लिए हुए कुर्बान
jaunpur
Updated Thu, 06 Oct 2016 12:54 AM IST
विज्ञापन
अलम
- फोटो : jaunpur
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के हमाम दरवाजा स्थित इमामबाड़ा में दूसरी मोहर्रम पर बुधवार को मोहल्ला फकीर हुसैन में मजलिस का आयोजन किया गया। शहर की विभिन्न मातमी अंजुमनों ने नौहा मातम किया। मजलिस को खिताब करते हुए खतीब ने कहा कि इंसानियत को बचाने लिए इमाम हुसैन अपने कुनबे के साथ शहीद हो गए। लेकिन यजीद के सामने अपना सिर नहीं झुकाया। जौनपुर अजादारी कौंसिल के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद हसन ने तकरीर करते हुए कहा कि कर्बला का वाकया हुए लगभग 14 सौ साल बीत चुके हैं। लेकिन हर साल मोहर्रम में ऐसा लगता है कि यह घटना अभी कर्बला में हुई है। हजरत इमाम हुसैन को जालिम यजीद के आदेश पर उसकी फ ौजों ने कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूखा प्यासा रखकर कत्ल कर दिया।
जबकि इमाम हुसैन यजीद के इस्लाम विरोधी कार्यों का विरोध कर रहे थे। उन्होंने शहीद हो जाना बेहतर समझा लेकिन यजीद के आगे सिर झुकाना उन्हे गवारा नहीं था। कर्बला का यह बयान सुनकर मौजूद अजादार जारो कतार रोने लगे और या हुसैन की दर्द भरी सदाएं मजलिस में बुलंद होेने लगीं। तकरीर के बाद जुलूस अलम ताबूत जुलजनाह शबीहे चौक मुख्तार हुसैन पर पहुंचा। जुलूस में अंजुमनों के साथ इमाम चौक जव्वाद हुसैन होता हुआ वापस आकर इमामबाड़ा फ कीर हुसैन हमाम दरवाजा पर समाप्त हुआ। जुलूस में बानिये जुलूस व जौनपुर अजादारी कौंसिल के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने जुलूस में सहयोग किया। कौंसिल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व जुलूस संयोजक इसरार हुसैन ने आभार जताया। उधर, ख्वातीन ने भी मजलिस कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश्ा की।
विज्ञापन
जबकि इमाम हुसैन यजीद के इस्लाम विरोधी कार्यों का विरोध कर रहे थे। उन्होंने शहीद हो जाना बेहतर समझा लेकिन यजीद के आगे सिर झुकाना उन्हे गवारा नहीं था। कर्बला का यह बयान सुनकर मौजूद अजादार जारो कतार रोने लगे और या हुसैन की दर्द भरी सदाएं मजलिस में बुलंद होेने लगीं। तकरीर के बाद जुलूस अलम ताबूत जुलजनाह शबीहे चौक मुख्तार हुसैन पर पहुंचा। जुलूस में अंजुमनों के साथ इमाम चौक जव्वाद हुसैन होता हुआ वापस आकर इमामबाड़ा फ कीर हुसैन हमाम दरवाजा पर समाप्त हुआ। जुलूस में बानिये जुलूस व जौनपुर अजादारी कौंसिल के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने जुलूस में सहयोग किया। कौंसिल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व जुलूस संयोजक इसरार हुसैन ने आभार जताया। उधर, ख्वातीन ने भी मजलिस कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश्ा की।
विज्ञापन