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राम कथा सुनने से मन का टॉक्सिन निकलता है- आचार्य शांतनु
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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में सात दिवसीय राम कथा के पहले दिन रविवार को आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि राम कथा सुनने से मन का विष निकलता है। भक्ति मार्ग कठिन है। उस पर वही आता है, जिस पर प्रभु की कृपा होती है।
एकनाथ के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उन्होंने एकनाथ जी ने कहा कि अशोक वाटिका में श्वेत फूल थे लेकिन हनुमान जी का कहना था कि लाल फूल थे। दोनों ने सीता जी से पूछा तो उन्होंने कह कि पुष्प नीले थे। इसके बाद यह प्रकरण भगवान राम के पास पहुंचा, तो उन्होंने कहा शास्त्र गलत नहीं है लेकिन हनुमान और सीता भी गलत नहीं है। हनुमान लंका गए सीता का हाल देख उनका मन गुस्से ले लाल हो गया था और सीता के मन में हमेशा मेरा नीला रंग ही बसा रहा। कुलपति डॉ राजाराम यादव ने विश्वविद्यालय परिवार को भगवान राम के आदर्श चरित्र से परिचित करना ही आयोजन का उद्देश्य है। शुरुआत में उन्होंने व्यासपीठ का पूजन किया। पूजन आचार्य सौरभ शास्त्री ने कराया। संचालन डॉ मनोज मिश्र ने किया। इसके पूर्व अतिथिगृह में शांतनु महाराज का स्वागत किया गया। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, परीक्षा नियंता बीएन सिंह, प्रो केपी सिंह, प्रो अनिता गोपेश, प्रो अजय द्विवेदी, प्रो अजय प्रताप सिंह, राकेश यादव, डॉ के एस तोमर, डॉ जगदेव, डॉ विजय प्रताप तिवारी, डॉ अनिल यादव, डॉ राजकुमार, डॉ सुबास चंद्र बिसोई, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अमरेंद्र सिंह, डॉ अनुराग मिश्र, प्रमेंद्र सिंह, डॉ जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ पुनीत धवन, डॉ विनय वर्मा, अमलदार यादव, डॉ संजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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एकनाथ के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उन्होंने एकनाथ जी ने कहा कि अशोक वाटिका में श्वेत फूल थे लेकिन हनुमान जी का कहना था कि लाल फूल थे। दोनों ने सीता जी से पूछा तो उन्होंने कह कि पुष्प नीले थे। इसके बाद यह प्रकरण भगवान राम के पास पहुंचा, तो उन्होंने कहा शास्त्र गलत नहीं है लेकिन हनुमान और सीता भी गलत नहीं है। हनुमान लंका गए सीता का हाल देख उनका मन गुस्से ले लाल हो गया था और सीता के मन में हमेशा मेरा नीला रंग ही बसा रहा। कुलपति डॉ राजाराम यादव ने विश्वविद्यालय परिवार को भगवान राम के आदर्श चरित्र से परिचित करना ही आयोजन का उद्देश्य है। शुरुआत में उन्होंने व्यासपीठ का पूजन किया। पूजन आचार्य सौरभ शास्त्री ने कराया। संचालन डॉ मनोज मिश्र ने किया। इसके पूर्व अतिथिगृह में शांतनु महाराज का स्वागत किया गया। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, परीक्षा नियंता बीएन सिंह, प्रो केपी सिंह, प्रो अनिता गोपेश, प्रो अजय द्विवेदी, प्रो अजय प्रताप सिंह, राकेश यादव, डॉ के एस तोमर, डॉ जगदेव, डॉ विजय प्रताप तिवारी, डॉ अनिल यादव, डॉ राजकुमार, डॉ सुबास चंद्र बिसोई, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ अमरेंद्र सिंह, डॉ अनुराग मिश्र, प्रमेंद्र सिंह, डॉ जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ पुनीत धवन, डॉ विनय वर्मा, अमलदार यादव, डॉ संजय श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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