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अस्पताल में भर्ती के लिए गिड़गिड़ाते रहे परिजन, नहीं मिला बेड

Mon, 03 May 2021 12:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 03 May 2021 12:04 AM IST
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The family kept on praying for hospitalization, no beds were found.
जौनपुर। डॉक्टर साहब, मेरे पिताजी की हालत बहुत खराब है। प्लीज कुछ कीजिए। जल्द उपचार करिए, वरना उनकी जान चली जाएगी...। शनिवार की रात सिकरारा के जयप्रकाश सोनी (56) को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे परिजन ऐसे ही डॉक्टरों के समक्ष गिड़गिड़ाते रहे। हाथ जोड़ते रहे, लेकिन बेड न होने का हवाला देकर भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। काफी देर मिन्नतें करने के बाद भी जब बात नहीं बनी तो परिजन रोते हुए मरीज को लेकर घर चले गए। कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के इस रवैए पर आक्रोश जताते हुए सीएम कार्यालय में भी शिकायत की गई है।
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सिकरारा निवासी जयप्रकाश सोनी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उनका ऑक्सीजन लेवल 70 से नीचे आ गया था। परिजन काफी देर तक उपचार के लिए यहां-वहां भटकते रहे। बाद में उन्होंने मदर टेरेसा फांउडेशन की मदद से जौनपुर में मिशन जिंदगी के सदस्यों से संपर्क किया। कंट्रोल रूम के नंबरों पर संपर्क किया गया तो मरीज को लेकर तत्काल जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचने को कहा गया। परिजन जब अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने बेड और ऑक्सीजन का अभाव बताकर भर्ती करने से साफ इंकार कर दिया। गेट पर ही मरीज को लेकर परिजन दवा-उपचार के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। करीब आधे घंटे तक मरीज को लेकर परिजन वहां रुके रहे, मगर थकहारकर उन्हें लौटना पड़ा। मिशन जिंदगी के संस्थापक दिलीप तिवारी ने पूरे मामले से डीएम को अवगत कराया। उन्होंने भी अस्पताल के डॉक्टरों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने बात करने की भी जहमत नहीं उठाई। दिलीप ने इस पूरे मामले की शिकायत लिखित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय में की है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने जांच की बात कही है।
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इलाज के लिए भटकते रहे परिजन, महिला ने तोड़ दिया दम
जौनपुर। मुफ्तीगंज निवासी एहसान अली की पत्नी हसीना बेगम (52) की तबीयत शनिवार को खराब हुई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। अचानक ऑक्सीजन लेवल 60 के नीचे आ गया था। आनन-फानन में परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल आए, जहां बेड न होने की दलील देकर भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।
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परिजन जब नईगंज के निजी अस्पताल पहुंचे तो ऑक्सीजन न होने के कारण भर्ती नहीं किया गया। यहां से वह सिटी स्टेशन रोड स्थित दूसरे निजी अस्पताल ले जा रहे थे, तब तक महिला की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते उपचार किया गया होता तो महिला की जान बच सकती थी। इस बाबत सीएमएस डॉ. एके शर्मा का कहना था कि महिला की कोविड जांच नहीं हुई थी। उसकी हालत भी गंभीर थी। कोई भी बेड खाली न होने के कारण भर्ती नहीं ली जा सकी।
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