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आबादी की भूमि को लेकर खत्म हो जाएगा विवाद
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आबादी की भूमि को लेकर खत्म हो जाएगा विवाद
ड्रोन से हो रहा सर्वे, जनपद में लगी हैं छह टीमें
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। आबादी की भूमि को लेकर आए दिन होने वाले विवाद को खत्म करने, कब्जेदार ग्रामीणों को मालिकाना हक दिए जाने को लेकर जिले में घरौंदी तैयार कराई जा रही है। इसके लिए ड्रोन कैमरे की मदद से नक्शा तैयार कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्य शुभारंभ किया था, जो स्वामित्व योजना के तहत पूरे देश में चल रहा है। कार्य के पूरा होने से जहां आबादी की भूमि के मालिक कब्जेदार बनेंगे, वहीं आबादी की भूमि को लेकर हो रहे विवाद पर भी विराम लग जाएगा। इसके लिए सर्वे का कार्य पंचायती राज मंत्रालय, राजस्व विभाग, राज्य पंचायती राज विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से कराया जा रहा है। इसमें ड्रोन तकनीक और कार्स नेटवर्क के माध्यम से गांवों की आबादी की भूमि का सर्वे कर नक्शा तैयार किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने पर नक्शे को तहसील प्रशासन को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद राजस्वकर्मी नक्शे की सहायता से आबादी की भूमि, उसके अंदर और आसपास बने मकान आदि का सीमांकन करते हैं। सीमांकन के आधार पर भूमि के संबंधित कब्जेदार को घरौनी कार्ड वितरित किया जाना है, ताकि आबादी की उक्त जमीन का संबंधित व्यक्ति को मालिकाना हक मिल सके और होने वाला विवाद भी समाप्त हो जाए। इसके लिए मौजूदा समय में जनपद में छह टीमें लगाई गई हैं, जो छह ड्रोन कैमरे की मदद से अलग-अलग इलाकों में रोजाना सर्वे कर रही है। इसके बाद उसका डाटा भारतीय सर्वेक्षण विभाग को टीम भेज रही है, जहां से उसे राजस्व विभाग को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बाद लेखपाल, कानूनगो के माध्यम से सत्यापन करने का काम किया जा रहा है। सीआरओ रजनीश राय के मुताबिक, यह कार्य जनपद के 2199 गांवों में कराया जाना है। इस समय 549 की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इसमें से 268 गांवों की रिपोर्ट पड़ताल करने के बाद वापस भारतीय सर्वेक्षण टीम को भेज दी गई है। जबकि 203 गांवों का प्रपत्र 10 आवासीय अभिलेख बन गया है। शेष कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया जाएगा।
इस तरह से हो रहा सर्वे
सर्वे टीम के एक सदस्य ने बताया कि गांव के बाहर खुले स्थान से ड्रोन कैमरे को उड़ाया जाता है। जो 120 मीटर ऊंचाई तक उड़कर पहले से मार्क की गई आबादी की भूमि को अपने कैमरे में कैद कर लेता है। यह 45 मिनट तक आसमान में उड़कर अपना काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की भूमि गृह स्वामियों के लिए संपत्ति कार्ड के रूप में अधिकारों का रिकार्ड प्रदान करना है। इससे ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए ग्रामीण आवासीय संपत्तियों के मुद्रीकरण की सुविधा मिलती है।
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ड्रोन से हो रहा सर्वे, जनपद में लगी हैं छह टीमें
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। आबादी की भूमि को लेकर आए दिन होने वाले विवाद को खत्म करने, कब्जेदार ग्रामीणों को मालिकाना हक दिए जाने को लेकर जिले में घरौंदी तैयार कराई जा रही है। इसके लिए ड्रोन कैमरे की मदद से नक्शा तैयार कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्य शुभारंभ किया था, जो स्वामित्व योजना के तहत पूरे देश में चल रहा है। कार्य के पूरा होने से जहां आबादी की भूमि के मालिक कब्जेदार बनेंगे, वहीं आबादी की भूमि को लेकर हो रहे विवाद पर भी विराम लग जाएगा। इसके लिए सर्वे का कार्य पंचायती राज मंत्रालय, राजस्व विभाग, राज्य पंचायती राज विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से कराया जा रहा है। इसमें ड्रोन तकनीक और कार्स नेटवर्क के माध्यम से गांवों की आबादी की भूमि का सर्वे कर नक्शा तैयार किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने पर नक्शे को तहसील प्रशासन को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद राजस्वकर्मी नक्शे की सहायता से आबादी की भूमि, उसके अंदर और आसपास बने मकान आदि का सीमांकन करते हैं। सीमांकन के आधार पर भूमि के संबंधित कब्जेदार को घरौनी कार्ड वितरित किया जाना है, ताकि आबादी की उक्त जमीन का संबंधित व्यक्ति को मालिकाना हक मिल सके और होने वाला विवाद भी समाप्त हो जाए। इसके लिए मौजूदा समय में जनपद में छह टीमें लगाई गई हैं, जो छह ड्रोन कैमरे की मदद से अलग-अलग इलाकों में रोजाना सर्वे कर रही है। इसके बाद उसका डाटा भारतीय सर्वेक्षण विभाग को टीम भेज रही है, जहां से उसे राजस्व विभाग को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। इसके बाद लेखपाल, कानूनगो के माध्यम से सत्यापन करने का काम किया जा रहा है। सीआरओ रजनीश राय के मुताबिक, यह कार्य जनपद के 2199 गांवों में कराया जाना है। इस समय 549 की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इसमें से 268 गांवों की रिपोर्ट पड़ताल करने के बाद वापस भारतीय सर्वेक्षण टीम को भेज दी गई है। जबकि 203 गांवों का प्रपत्र 10 आवासीय अभिलेख बन गया है। शेष कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया जाएगा।
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इस तरह से हो रहा सर्वे
सर्वे टीम के एक सदस्य ने बताया कि गांव के बाहर खुले स्थान से ड्रोन कैमरे को उड़ाया जाता है। जो 120 मीटर ऊंचाई तक उड़कर पहले से मार्क की गई आबादी की भूमि को अपने कैमरे में कैद कर लेता है। यह 45 मिनट तक आसमान में उड़कर अपना काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की भूमि गृह स्वामियों के लिए संपत्ति कार्ड के रूप में अधिकारों का रिकार्ड प्रदान करना है। इससे ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए ग्रामीण आवासीय संपत्तियों के मुद्रीकरण की सुविधा मिलती है।
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