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Jaunpur News: 5 रुपये देने पर केवल टहलने वालों के लिए खुलता है शहर का इकलौता पार्क

Mon, 08 Dec 2025 12:06 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Dec 2025 12:06 AM IST
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The city's only park opens for walkers only for a fee of 5 rupees.
जौनपुर। शहर का इकलौते लोहिया पर्यावरणीय उद्यान पार्क केवल सुबह और शाम ही खुलता है। दिन में यहां ताला लगा रहता है। यहां सुबह-शाम टहलने आने वालों से प्रवेश के नाम पर पांच रुपये वसूल किए जाते हैं। यह शुल्क देने वालों को अधिकतम दो घंटे तक ही पार्क में रहने की अनुमति होती है। शुल्क लिए जाने के कारण कभी आठ सौ तक आने वालों की संख्या कम होकर सौ से डेढ़ सौ के बीच पहुंच गई है।
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वर्ष 2006 में सूबे के पांच जिलों में उद्यान विभाग की ओर से पार्क का निर्माण किया गया था। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव की पहल पर जिले में भी लोहिया पार्क के निर्माण की योजना स्वीकृत हुई। पार्क के लिए 1.50 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इसके बाद कृषि विभाग परिसर में पार्क के लिए जमीन भी अधिगृहीत की गई। पांच एकड़ क्षेत्रफल में पार्क का निर्माण किया गया। पार्क के अंदर लान, चिल्ड्रेन पार्क के साथ ही फौव्वारा, ग्रीन हाउस, वाटर फाल, गुलाब बाड़ी आदि के निर्माण कराए गए हैं। वर्किंग शेड, शौचालय, पंप हाउस के साथ ही गुलाब बाड़ी में 200 वेरायटी के दो हजार गुलाब के पौधे लगे हैं। इसके साथ ही आकर्षक लाइटिंग की गई है। वर्ष 2017 के बाद पार्क खोला गया। इससे वहां चहल-पहल बढ़ गई। इसके बाद करीब 800 लोग पार्क में रोजाना पहुंचने लगे। पार्क होने से आसपास के लोगों के अलावा बाहर से आने वाले लोग भी वहां पहुंचने लगे। लोग दिन में समय गुजारने के लिए वहां चले जाते थे। पार्क में आने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी को देखते हुए इस साल 16 अगस्त से टिकट की व्यवस्था कर दी गई। यहां रोजाना आने वालों से पांच रुपये के हिसाब से टिकट लगा दिया गया। जबकि मासिक पास 100 रुपये, त्रैमासिक 250 रुपये, छमाही 500 रुपये और सालाना पास के लिए एक हजार रुपये शुल्क लगा दिया गया। उद्यान विभाग के इस निर्णय से पार्क में आने वालों की संख्या कम हो गई और यह घटकर सौ से डेढ़ सौ पर आ गई। नई व्यवस्था के लिए दिन में पार्क में ताला लटका दिया गया, जबकि सुबह-शाम टहलने वालों के लिए ही केवल पार्क खोला जाने लगा। इसमें भी टहलने वालों से पांच रुपये के हिसाब से शुल्क लिया जाने लगा है। इससे बड़ी संख्या में लोग पार्क न जाकर सड़क के किनारे टहलते नजर आने लगे हैं। इनमें बुजुर्ग भी शामिल हैं। जो लोग पार्क में दो-तीन चक्कर लगाने के लिए जाते थे, अब उन्हें टहलने के लिए पांच रुपये रोजाना देने पड़ रहे हैं।
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उधर, शुल्क वसूल करने के लिए कर्मचारी लगा दिए गए हैं, जो रसीद लेकर गेट पर ही सुबह-शाम बैठते हैं। वे अंदर जाने वाले लोगों से पांच रुपये की रसीद कटवाने के लिए कहते हैं। यदि पांच रुपये कोई ऑनलाइन देना चाहे तो नहीं लेते हैं। वे कैश रुपये ही लेते हैं। डीएम दिनेश चंद्र का कहना है कि दिन में अराजक तत्व व कुछ लोग घुस जाते थे। इससे दिक्कत होती थी। लोगों की मांग के अनुरूप व्यवस्था पार्क में दी जा रही है। बुजुर्ग और बच्चों से पैसे नहीं लिए जाते हैं। फिलहाल इसे देखा जा रहा है कि दिन में और क्या किया जा सकता है।
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