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टाटा प्रोजेक्ट्स ही बनाएगा मेडिकल कॉलेज, नई डेडलाइन सितंबर 2022

Tue, 23 Feb 2021 11:40 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 11:40 PM IST
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Tata Projects to build medical college, new deadline September 2022
सिद्दीकपुर स्थित मडिकल कालेज की चल रही रंगाई पुताई। संवाद - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। काम की धीमी गति, मनमानी और अनियमितता जैसे तमाम आरोपों के कारण हटाए गए टाटा प्रोजेक्ट्स को फिर से मेडिकल कॉलेज बनाने का जिम्मा मिल गया है। उस पर लगा 30 करोड़ रुपये का जुर्माना भी खत्म हो गया है। अब मेडिकल कॉलेज को चालू करने के लिए सितंबर 2022 की नई डेडलाइन तय की गई है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद कंपनी ने काम शुरू करा दिया है। जल्द ही इसमें मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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पूर्ववर्ती सपा सरकार में सितंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सिद्दीकपुर में बंद पड़ी कताई मिल परिसर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की नींव रखी थी। पांच सौ बेड वाले अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के निर्माण पर 554 करोड़ रुपये खर्च होने थे। इसे जून 2018 में ही बनकर तैयार हो जाना था। राजकीय निर्माण निगम को कार्यदाई संस्था बनाते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया गया। शुरुआत में काम तेजी से हुआ, मगर धीरे-धीरे इसकी रफ्तार थमती गई। कभी बजट के अभाव में तो कभी अन्य कारणों से अब तक महज 45 फीसदी ही काम हो सका है। इस बीच निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने के चलते इस परियोजना का बजट भी बढ़कर 597 करोड़ हो गया है। इसे पूरा करने की डेडलाइन दिसंबर 2021 तय की गई थी। पर्याप्त बजट होने के बाद भी काम की गति न बढ़ने पर राजकीय निर्माण निगम ने पिछले दिनों टाटा प्रोजेक्ट्स का टेंडर रद्द कर दिया था। धीमी गति, मनमानी, अनियमितता, अनुबंध की शर्तों का पालन न करने जैसे तमाम आरोपों के कारण उस पर 30 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया था। अधिकारियों ने दावा किया था कि अब नए सिरे से टेंडर कराकर तय समय में काम पूरा करने की कोशिश होगी। लेकिन नए टेंडर की बजाय अब फिर से टाटा प्रोजेक्ट्स को ही अधूरा मेडिकल कॉलेज पूरा कराने का जिम्मा सौंपा गया है। उस पर लगाया गया जुर्माना तो माफ हुआ ही, इसे बनाने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है।
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सरकार के बजट में जिक्र न होने से मायूस हैं लोग
प्रदेश सरकार की ओर से सोमवार को प्रस्तुत किए गए बजट में जौनपुर के मेडिकल कॉलेज का कोई जिक्र न होने से लोग मायूस हैं। लोगों का कहना है कि अमेठी, बलरामपुर सहित अन्य जिलों में बन रहे मेडिकल कॉलेज को सुदृढ़ करने पर बजट दिया गया है, लेकिन जौनपुर का जिक्र भी न होना दुखद है। यह कॉलेज बनता तो सिर्फ जौनपुर ही नहीं, आसपास के अन्य जिलों की गरीब ग्रामीण जनता लाभान्वित होती। बस राजनीतिक खींचतान में इस परियोजना की उपेक्षा हो रही है।
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नाम बदलने को भी लेकर रहा है विवाद
जिले का मेडिकल कॉलेज का विवादों से भी खूब नाता हो चुका है। इसके नामकरण को लेाकर भी काफी होहल्ला मचा था। निर्माण के वक्त इसे राजकीय मेडिकल कॉलेज का ही नाम दिया गया था। बाद में शहीद उमानाथ सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज के रुप में स्थापित करने की घोषणा हुई। गत वर्ष सरकार ने इसे स्वशासी मेडिकल कॉलेज के रूप में बनाने का प्रावधान किया। इन तमाम कवायदों के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो पा रही।

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जौनपुर मेडिकल कॉलेज का काम फिर से टाटा प्रोजेक्ट्स को ही दिया गया है। जुुर्माना भी खत्म हो गया है। कंपनी को सितंबर 2022 तक निर्माण पूर्ण करने की मोहलत दी गई है। यह फैसला शासन स्तर का है। कोशिश रहेगी कि मजदूरों की संख्या बढ़ाकर इस बार तय समय से पहले गुणवत्तापूर्ण ढंग से काम पूरा करा लिया जाए। -एमपी सिंह, परियोजना प्रबंधक, राजकीय निर्माण निगम आजमगढ़ इकाई।
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