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गांव में चारों तरफ पसरा सन्नाटा
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 20 Sep 2016 01:55 AM IST
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शहीद के पर्थिव शरीर के पास रोती पत्नी जूली सिंह और परिवार के लोग।
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कश्मीर के बारामूला जिले के उड़ी में फिदायीन हमले में सिपाही राजेश सिंह के शहीद होने की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव सरायख्वाजा के भकुरा में सोमवार की सुबह मिली वहां मातम छा गया। परिवार वालों के आंसू नहीं थम रहे हैं। पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है।
जिला मुख्यालय से तकरीबन 12 किलोमीटर दूर स्थित भकुरा गांव में सोमवार की सुबह आठ बजे तक किसी को कुछ नहीं पता था। सरायख्वाजा पुलिस के जरिए पिता राजेंद्र सिंह को राजेश के शहीद होने की खबर मिली। धीरे धीरे आस पास के गांवों में भी यह बात फैल गई और भारी संख्या में लोग शहीद के घर पहुंचने लगे।
नायब तहसीलदार राजकुमार यादव, कानूनगो दूधनाथ पूरी राजस्व टीम के साथ डेरा डाल दिए। उधर ग्राम प्रधान गायत्री सिंह के पुत्र आशुतोष सिंह भी लोगों को शहीद के बारे में जानकारी देते रहे। पति का चेहरा देखने के लिए पत्नी जूली सिंह जिद पर अड़ी रहीं।
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उनका कहना था कि चार माह पहले छोड़कर गए तो ठीक से फोन पर भी बात नहीं हो पाई। मुझे पता है मेरे पति शहीद हो गए लेकिन बिना चेहरा देखे मैं जी नहीं पाऊंगी। यह कहकर वह दहाड़ मारकर रोती रहीं। महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला तो उनकी मां परमावता सिंह भी शहीद बेटे का चेहरा देखने की जिद करने लगीं। डीएम ने पूरे परिवार के साथ शव का फोटो करवाकर लोगों को सहेजने का प्रयास किया।
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जिला मुख्यालय से तकरीबन 12 किलोमीटर दूर स्थित भकुरा गांव में सोमवार की सुबह आठ बजे तक किसी को कुछ नहीं पता था। सरायख्वाजा पुलिस के जरिए पिता राजेंद्र सिंह को राजेश के शहीद होने की खबर मिली। धीरे धीरे आस पास के गांवों में भी यह बात फैल गई और भारी संख्या में लोग शहीद के घर पहुंचने लगे।
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नायब तहसीलदार राजकुमार यादव, कानूनगो दूधनाथ पूरी राजस्व टीम के साथ डेरा डाल दिए। उधर ग्राम प्रधान गायत्री सिंह के पुत्र आशुतोष सिंह भी लोगों को शहीद के बारे में जानकारी देते रहे। पति का चेहरा देखने के लिए पत्नी जूली सिंह जिद पर अड़ी रहीं।
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उनका कहना था कि चार माह पहले छोड़कर गए तो ठीक से फोन पर भी बात नहीं हो पाई। मुझे पता है मेरे पति शहीद हो गए लेकिन बिना चेहरा देखे मैं जी नहीं पाऊंगी। यह कहकर वह दहाड़ मारकर रोती रहीं। महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला तो उनकी मां परमावता सिंह भी शहीद बेटे का चेहरा देखने की जिद करने लगीं। डीएम ने पूरे परिवार के साथ शव का फोटो करवाकर लोगों को सहेजने का प्रयास किया।