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पंचायतों को दें तीसरी सरकार की संप्रभुता
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Fri, 10 Apr 2015 11:58 PM IST
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पंचायती राज विशेषज्ञ और तीसरी सरकार अभियान के प्रणेता डा. चंद्रशेखर प्राण ने शुक्रवार को यहां कहा कि पंचायत महज ठेकेदार और एजेंट बनकर रह गई है।
जबकि 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप पंचायतों को तीसरी सरकार की संप्रभुता प्राप्त है। उन्होंने पंचायतों को पूर्ण अधिकार की मांग करते हुए कहा कि तीसरी सरकार के संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने से ही सही मायने में आजादी आएगी।
वह तीसरी सरकार संवाद यात्रा के साथ शुक्रवार को जिले में पहुंचे थे। जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्राण ने कहा कि पंचायतों को सोचने, निर्णय लेने और क्रियान्वयन का अधिकार सही मायने में मिलना चाहिए।
संवाद यात्रा के जौनपुर पहुंचने पर पूर्वांचल जन सहयोग मंच और एकता परिषद की ओर से तीसरी सरकार में वंचितों की दिशा, दशा और रणनीति विषयक खुला संवाद का आयोजन किया गया था। इस मौके पर प्राण ने कहा कि उत्तर प्रदेश
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पंचायती राज व्यवस्था में पंचायतों को सबसे कम अधिकार देने वाला राज्य बन गया है। लिहाजा जो पंचायतें सहभागी लोकतंत्र की बेहतर इकाई थीं, वह आज प्रधान और सेक्रेटरी की बदंरबांट की बलि चढ़ रही हैं।
सर्वोदयी विचारक राम धीरज ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता स्वावलंबी, पारदर्शी एवं जवाबदेह पंचायती राज के लिए पंचायतों में सक्षम नेतृत्व तैयार करें।
संचालन करते हुए एकता परिषद के संयोजक द्विजेंद्र विश्वात्मा ने कहा कि अगर गांवों को सही अर्थों में आजादी मिलती तो देश के प्राकृतिक संसाधनों जल, जंगल, जमीन, खनिज आदि की लूट पूंजीपतियों के इशारे पर न होती।
इस मौके पर गाजीपुर की सावित्री, भदोही के राममूर्ति यादव, छत्रपाल गौतम, अनुपमा प्रजापति, रामसजीवन, गोपाल सिंह, रामजीत, बृजेश तिवारी, जय प्रकाश यादव आदि ने अपने अनुभव साझा किए। यात्रियों का माल्यार्पण कर गुलाब चंद्र पटेल, नन्हें लाल सरोज, वरुण राय, विनोद ने स्वागत किया।
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जबकि 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप पंचायतों को तीसरी सरकार की संप्रभुता प्राप्त है। उन्होंने पंचायतों को पूर्ण अधिकार की मांग करते हुए कहा कि तीसरी सरकार के संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने से ही सही मायने में आजादी आएगी।
वह तीसरी सरकार संवाद यात्रा के साथ शुक्रवार को जिले में पहुंचे थे। जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्राण ने कहा कि पंचायतों को सोचने, निर्णय लेने और क्रियान्वयन का अधिकार सही मायने में मिलना चाहिए।
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संवाद यात्रा के जौनपुर पहुंचने पर पूर्वांचल जन सहयोग मंच और एकता परिषद की ओर से तीसरी सरकार में वंचितों की दिशा, दशा और रणनीति विषयक खुला संवाद का आयोजन किया गया था। इस मौके पर प्राण ने कहा कि उत्तर प्रदेश
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पंचायती राज व्यवस्था में पंचायतों को सबसे कम अधिकार देने वाला राज्य बन गया है। लिहाजा जो पंचायतें सहभागी लोकतंत्र की बेहतर इकाई थीं, वह आज प्रधान और सेक्रेटरी की बदंरबांट की बलि चढ़ रही हैं।
सर्वोदयी विचारक राम धीरज ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता स्वावलंबी, पारदर्शी एवं जवाबदेह पंचायती राज के लिए पंचायतों में सक्षम नेतृत्व तैयार करें।
संचालन करते हुए एकता परिषद के संयोजक द्विजेंद्र विश्वात्मा ने कहा कि अगर गांवों को सही अर्थों में आजादी मिलती तो देश के प्राकृतिक संसाधनों जल, जंगल, जमीन, खनिज आदि की लूट पूंजीपतियों के इशारे पर न होती।
इस मौके पर गाजीपुर की सावित्री, भदोही के राममूर्ति यादव, छत्रपाल गौतम, अनुपमा प्रजापति, रामसजीवन, गोपाल सिंह, रामजीत, बृजेश तिवारी, जय प्रकाश यादव आदि ने अपने अनुभव साझा किए। यात्रियों का माल्यार्पण कर गुलाब चंद्र पटेल, नन्हें लाल सरोज, वरुण राय, विनोद ने स्वागत किया।