{"_id":"57f408714f1c1b8a32270bf9","slug":"siru-moved-hridayam-period-barber","type":"story","status":"publish","title_hn":"चले हृदयं अवधहि सिरु नाई...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चले हृदयं अवधहि सिरु नाई...
jaunpur
Updated Wed, 05 Oct 2016 01:22 AM IST
विज्ञापन
ामलीला में दशरथ विलाप की लीला करते कलाकार।
- फोटो : jaunpur
मुंगराबादशाहपुर के गुडाही मोहल्ला में चल रही रामलीला के आठवें दिन राम वन गमन, चित्रकूट सभा व राजादशरथ मरण का मंचन किया गया। भगवान राम, माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ वन की ओर जाता देख दर्शकों के आखों में आंसू छलक पडे़। रामलीला में भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। जबकि पुत्र मोह में राजा दशरथ विलाप करते हुए अपना प्राण त्याग देते हैं। इससे पंडाल में माहौल गमगीन में हो जाता है।
राजादशरथ का निर्णय था कि राम को राजा बनाया जाए। इसकी सूचना मंथरा रानी कैकेयी को देती है। कैकेयी आवेश में आकर कोप भवन में चली जाती है। कैकेयी ने राजादशरथ से दो वचन मांगा था। जिसमें भरत को राजगद्दी तथा राम को 14 वर्ष का वनवास भी शामिल था। पिता के आदेश को सिर माथे लगाते हुए भगवान राम, सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन की ओर निकल पड़ते हैं। राम के वन की तरफ प्रस्थान की जानकारी होते ही राजादशरथ के प्राण निकल गए।
पूरे राज्य में शोक की लहर फै ल जाती है। हर चरफ राम वन गमन की चर्चा होने लगती है। बस यही चर्चा होती है कि आखिर राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा। उधर राम, लक्ष्मण और सीता अयोध्या छोड़कर तपस्वी वेश में वन की तरफ चले जाते हैं। इस भावपूर्ण मंचन को देख कर पंडाल में बैठे लोग भावुक हो उठे। पूरा पंडाल गमगीन हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजादशरथ का निर्णय था कि राम को राजा बनाया जाए। इसकी सूचना मंथरा रानी कैकेयी को देती है। कैकेयी आवेश में आकर कोप भवन में चली जाती है। कैकेयी ने राजादशरथ से दो वचन मांगा था। जिसमें भरत को राजगद्दी तथा राम को 14 वर्ष का वनवास भी शामिल था। पिता के आदेश को सिर माथे लगाते हुए भगवान राम, सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन की ओर निकल पड़ते हैं। राम के वन की तरफ प्रस्थान की जानकारी होते ही राजादशरथ के प्राण निकल गए।
विज्ञापन
पूरे राज्य में शोक की लहर फै ल जाती है। हर चरफ राम वन गमन की चर्चा होने लगती है। बस यही चर्चा होती है कि आखिर राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा। उधर राम, लक्ष्मण और सीता अयोध्या छोड़कर तपस्वी वेश में वन की तरफ चले जाते हैं। इस भावपूर्ण मंचन को देख कर पंडाल में बैठे लोग भावुक हो उठे। पूरा पंडाल गमगीन हो गया।
विज्ञापन