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Shramjeevi Blast Case: रात में खाई दाल-रोटी... फांसी की सजा के बाद रहे बेचैन, कभी टलहते तो कभी बदलते दिखे करवट
Thu, 04 Jan 2024 11:03 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 04 Jan 2024 11:03 AM IST
सार
Shramjeevi Blast Case: श्रमजीवी विस्फोट कांड के आंतकी बांग्लादेशी हिलालुद्दीन व पश्चिम बंगाल के नफीकुल विश्वास को मृत्युदंड की सजा के बाद पृथक कक्ष में रखा गया। दोनों ने दाल रोटी खाई। हालांकि मृत्युदंड के बाद चेहरे पर मायूसी दिखी।
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Shramjeevi Blast Case
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्रमजीवी विस्फोट कांड के आंतकी बांग्लादेशी हिलालुद्दीन व पश्चिम बंगाल के नफीकुल विश्वास को मृत्युदंड की सजा सुनाने के बाद करीब साढ़े पांच बजे न्यायालय पहुंचाया गया। इसके बाद इनकी जांच पड़ताल के बाद पृथक कक्ष में रखा गया। सजा से मायूसी होने के चलते इन्होंने दाल रोटी खाया।
आठ साल पहले वर्ष 2016 में दोनों ही आतंकियों को हैदराबाद की जेल से लाया गया था। श्रमजीवी विस्फोट मामले की सुनवाई के लिए इन दोनों को यहां करीब साढ़े पांच बजे लाया गया। इस दौरान उनके चेहरे पर मायूसी रही।
इसको लेकर जब अंदर पहुंचे तो अधिकारियों से कहा कि हमें न्याय नहीं मिला। अंदर पहुंचने तक करीब साढ़े छह बज चुके थे। इस दौरान खाने का समय हो गया था। बुधवार की मीनू के अनुसार उनको दाल, चावल, रोटी, सब्जी दिया गया। जिसको वह अपने साथ अंदर ले गए।
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हालांकि उन्होंने कम ही खाना खाया। कारागार के अस्पताल के पास बने पृथक कक्ष में दोनों अपने बैरक में चले गए। फैसले से नाखुश आतंकी अपने बैरक में बेचैन दिखाई दिए। देर रात बैरक में टहलते दिखाई दिए। करवटें भी बदलते रहे। बता दें कि इन आठ वर्षों में इनसे दो साल से मिलने वाला कोई नहीं आया।
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आठ साल पहले वर्ष 2016 में दोनों ही आतंकियों को हैदराबाद की जेल से लाया गया था। श्रमजीवी विस्फोट मामले की सुनवाई के लिए इन दोनों को यहां करीब साढ़े पांच बजे लाया गया। इस दौरान उनके चेहरे पर मायूसी रही।
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इसको लेकर जब अंदर पहुंचे तो अधिकारियों से कहा कि हमें न्याय नहीं मिला। अंदर पहुंचने तक करीब साढ़े छह बज चुके थे। इस दौरान खाने का समय हो गया था। बुधवार की मीनू के अनुसार उनको दाल, चावल, रोटी, सब्जी दिया गया। जिसको वह अपने साथ अंदर ले गए।
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हालांकि उन्होंने कम ही खाना खाया। कारागार के अस्पताल के पास बने पृथक कक्ष में दोनों अपने बैरक में चले गए। फैसले से नाखुश आतंकी अपने बैरक में बेचैन दिखाई दिए। देर रात बैरक में टहलते दिखाई दिए। करवटें भी बदलते रहे। बता दें कि इन आठ वर्षों में इनसे दो साल से मिलने वाला कोई नहीं आया।
सजा के बाद से चेहरे पर छाई रही मायूसी
दोनों ही आतंकी फैसले से नाखुश रहे। कोर्ट में 3.13 बजे पहुंचने के बाद वह सजा को लेकर बेचैन दिखाई दिए। इस दौरान इनका हाथ कभी इनकी ढुढ़ी पर तो कभी जेब के अंदर रहा। वह एक बार जज साहब के आने के बारे में भी अधिवक्ताओं से पूछते देखे गए।
दोनों ही आतंकी फैसले से नाखुश रहे। कोर्ट में 3.13 बजे पहुंचने के बाद वह सजा को लेकर बेचैन दिखाई दिए। इस दौरान इनका हाथ कभी इनकी ढुढ़ी पर तो कभी जेब के अंदर रहा। वह एक बार जज साहब के आने के बारे में भी अधिवक्ताओं से पूछते देखे गए।
30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में कर सकते है अपील
मृत्युदंड के फैसले के बाद यह आतंकी न्यायमित्र अधिवक्ता के जरिए हाईकोर्ट में 30 दिन के अंदर अपील कर सकते है। बिना हाईकोर्ट के इनको फांसी की सजा नहीं दी जाएगी।
मृत्युदंड के फैसले के बाद यह आतंकी न्यायमित्र अधिवक्ता के जरिए हाईकोर्ट में 30 दिन के अंदर अपील कर सकते है। बिना हाईकोर्ट के इनको फांसी की सजा नहीं दी जाएगी।
श्रमजीवी विस्फोट कांड के दो आतंकियों को मृत्युदंड की सजा
आपको बता दें कि जौनपुर की अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश राय की कोर्ट ने बुधवार को श्रमजीवी विस्फोट कांड के दोषी दो आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई। बांग्लादेशी आतंकी हिलालुद्दीन और पश्चिम बंगाल के नफीकुल विश्वास को फैसला सुनाया गया। इसमें बीते 22 दिसंबर 2023 को दोनों को दोषी करार दिया गया था।
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार राय की अदालत में बुधवार को 18 साल पहले श्रमजीवी विस्फोट एक्सप्रेस में बम रखने के आरोपित बांग्लादेश निवासी हिलाल उर्फ हिलालुद्दीन व विस्फोट में सहयोग करने का आरोपित बंगाल निवासी नफीकुल विश्वास को पेश किया। कड़ी सुरक्षा के बीच दोपहर 3.13 बजे इन्हें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
शाम 4.15 बजे न्यायाधीश अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार राय द्वारा हिलाल उर्फ हिलालुद्दीन को धारा 148 में तीन वर्ष की सजा व पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 302 भा.द.स. में मृत्युदंड, धारा 307 भा.द.स. 10 वर्ष की कारावास व पांच लाख रुपये अर्थदंड, धारा तीन विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में आजीवन कारावास व पांच लाख रुपये अर्थदंड, धारा 150 रेलवे अधिनियम में आजीवन कारावास, धारा 14 फारेनर्स एक्ट में पांच वर्ष की सजा व 20 हजार का अर्थदंड दिया गया।
आतंकी नफीकुल विश्वास को धारा 148 में तीन वर्ष की सजा, पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 302 भा.द.स. में मृत्युदंड, धारा 307 भा.द.स. में 10 वर्ष की सजा व पांच लाख रुपये अर्थदंड, धारा तीन विस्फोटक अधिनियम में आजीवन कारावास व पांच लाख रुपये अर्थदंड, धारा 150 रेलवे अधिनियम में आजीवन कारावास से दंडित किया गया। अदालत के फैसले के बाद दोनों को आदेश की कॉपी के लिए इंतजार करना पड़ा। इसके बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया।
14 की गई थी जान, 62 यात्री हुए थे घायल
सिंगरामऊ के हरपालगंज हरिहरपुर के पास 28 जुलाई 2005 को पटना से दिल्ली जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस में आतंकियों ने बम विस्फोट किया था। धमाके में 14 लोगों की मौत हुई थी और 62 लोग घायल हुए थे।