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Jaunpur News: सचिव पर कमीशन मांगने और बजट से 50 हजार रुपये काटने का आरोप

Sun, 28 Jun 2026 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:51 AM IST
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Secretary accused of demanding a commission and deducting funds from the budget.
बरसठी क्षेत्र के गोरापट्टी गांव में स्थित गोशाला में बेसहारा गायों की स्थिति। स्रोत-संवाद
बरसठी। गोरापट्टी गांव स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल (गौशाला) में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी का मामला सामने आया है। ग्राम प्रधान कृष्णावती देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव) पर भरण-पोषण मद से कमीशन मांगने और बजट में कटौती करने का गंभीर आरोप लगाया है।
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ग्राम प्रधान कृष्णावती देवी ने बताया कि आश्रय स्थल में कुल 110 गोवंश संरक्षित हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी अमित कुमार यादव लगातार पशुओं के भरण-पोषण मद में आने वाली धनराशि से कमीशन की मांग कर रहे थे। कमीशन न देने पर फरवरी में गोवंशों की संख्या कम दर्शाई गई। इससे लगभग 50 हजार रुपये की धनराशि घटा दी गई। संख्या कम दिखाने के कारण भरण-पोषण मद की राशि में से लगभग 50 हजार रुपये की कटौती कर दी गई, जिससे पशुओं के चारे-पानी की व्यवस्था प्रभावित हुई।
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प्रधान ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में यह भी आरोप लगाया कि सचिव ने पूर्व खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को गुमराह किया और करीब 20 से 25 गोवंशों को दूसरे आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करवा दिया। अधिकारियों को यह रिपोर्ट दी गई कि गौशाला बंद होने के कगार पर है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आज भी वहां 85 गोवंश मौजूद हैं। प्रधान ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
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सचिव ने आरोपों को बताया निराधार
ग्राम प्रधान द्वारा लगाए गए कमीशन मांगने और बजट काटने के सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं। विभागीय नियमों के तहत ही सारा कार्य किया गया है।— अमित कुमार यादव, ग्राम पंचायत अधिकारी (सचिव), गोरापट्टी


गौशाला में लापरवाही की शिकायतें मिलने के कारण ही पूर्व में कुछ गोवंशों को दूसरे आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया गया था। अगर वहां दोबारा गोवंशों की संख्या बढ़ी है, तो इसकी मौके पर जांच कराई जाएगी। वैसे, नियमतः गोआश्रय स्थल के सुचारू संचालन के लिए ग्राम प्रधान और सचिव दोनों ही समान रूप से जिम्मेदार हैं।

— जगदीश कुमार, खंड विकास अधिकारी, बरसठी
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