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सीवर लाइन बिछाने में फंसा डिजाइन का पेंच
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26- पंचहटियां में निमार्णधीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। शहर में गंदे पाने की निकासी के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की योजना फिर से खटाई में पड़ गई है। ले आउट में तकनीकी खामी के चलते काम रोक दिया गया है। अब इसमें संशोधन के लिए फिर से एमएनएनआईटी प्रयागराज को भेजा गया है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही काम आगे आरंभ हो पाएगा। उधर, सीवर लाइन बिछाने की प्रक्रिया पर भी पाइप की खराब गुणवत्ता के कारण रोक लगा दी गई है।
तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 30 एमएलडी गंदा पानी निकलता है। यह पानी 14 नालों से होते हुए गोमती नदी में गिरता है। गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए शहर में सीवर लाइन बिछाने और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 208 करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है। करीब एक पखवाड़ा पूर्व कार्य भी आरंभ कर दिया गया था। कुछ इलाकों में पाइप बिछाई गई और पचहटिया में प्लांट स्थल पर कार्य आरंभ हुआ, मगर कुछ दिनों बाद ही इस पर रोक लगा दी गई। इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट के ले आऊट में तकनीकी खामी को कारण बताया जा रहा है। विभागीय अफसरों के मुताबिक ट्रीटमेंट प्लांट तक गंदा पानी पहुंचाने के लिए पाइप को जगह-जगह घुमाव और उतार-चढ़ाव के जो स्थल पूर्व में तय किए गए थे, वह सही नहीं थे। अब इसमें संशोधन कराया जा रहा है। एमएनएनआईटी प्रयागराज के माध्यम से नया ले-आउट स्वीकृत होते ही कार्यारंभ कराया जाएगा। उधर, पाइप लाइन बिछाने का कार्य रोकने के लिए पाइप की गुणवत्ता खराब होने का तर्क दिया गया है। कार्यदाई संस्था मानक को दरकिनार कर खराब गुणवत्ता का पाइप बिछा रही थी, इस पर जलनिगम ने आपत्ति जताते हुए रोक लगा दी है। ऐसे में बहुप्रतीक्षित इस योजना के भविष्य पर फिर से ग्रहण लग गया है।
इन नालों से निकलता है शहर का गंदा पानी
जौनपुर। शहर का गंदा पानी 14 नालों से निकलता है। इसमें मुफ्तीगंज, तुतीपुर, हनुमान घाट, किला मोहल्ला, बलुआ घाट, रासमंडल, अचनादेवी घाट, कटघरा, जोगियापुर, मियांपुर, हरईपुर, शेखपुर, मलुअन टोला व अहियापुर नाला शामिल है।
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ले-आउट में तकनीकी खामी के कारण ट्रीटमेंट प्लांट और सीवर लाइन बिछाने का कार्य रुक गया है। प्रयागराज के एमएनएनआईटी से संशोधित ले आउट मिलते ही कार्य स्वीकृत करा दिया जाएगा। कोशिश है कि जल्द से जल्द कार्य पूरा कर दिया जाए। -सुनील कुमार यादव, एक्सईएन, जल निगम।
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तीन लाख आबादी वाले शहर में प्रतिदिन 30 एमएलडी गंदा पानी निकलता है। यह पानी 14 नालों से होते हुए गोमती नदी में गिरता है। गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए शहर में सीवर लाइन बिछाने और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 208 करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है। करीब एक पखवाड़ा पूर्व कार्य भी आरंभ कर दिया गया था। कुछ इलाकों में पाइप बिछाई गई और पचहटिया में प्लांट स्थल पर कार्य आरंभ हुआ, मगर कुछ दिनों बाद ही इस पर रोक लगा दी गई। इसके लिए ट्रीटमेंट प्लांट के ले आऊट में तकनीकी खामी को कारण बताया जा रहा है। विभागीय अफसरों के मुताबिक ट्रीटमेंट प्लांट तक गंदा पानी पहुंचाने के लिए पाइप को जगह-जगह घुमाव और उतार-चढ़ाव के जो स्थल पूर्व में तय किए गए थे, वह सही नहीं थे। अब इसमें संशोधन कराया जा रहा है। एमएनएनआईटी प्रयागराज के माध्यम से नया ले-आउट स्वीकृत होते ही कार्यारंभ कराया जाएगा। उधर, पाइप लाइन बिछाने का कार्य रोकने के लिए पाइप की गुणवत्ता खराब होने का तर्क दिया गया है। कार्यदाई संस्था मानक को दरकिनार कर खराब गुणवत्ता का पाइप बिछा रही थी, इस पर जलनिगम ने आपत्ति जताते हुए रोक लगा दी है। ऐसे में बहुप्रतीक्षित इस योजना के भविष्य पर फिर से ग्रहण लग गया है।
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इन नालों से निकलता है शहर का गंदा पानी
जौनपुर। शहर का गंदा पानी 14 नालों से निकलता है। इसमें मुफ्तीगंज, तुतीपुर, हनुमान घाट, किला मोहल्ला, बलुआ घाट, रासमंडल, अचनादेवी घाट, कटघरा, जोगियापुर, मियांपुर, हरईपुर, शेखपुर, मलुअन टोला व अहियापुर नाला शामिल है।
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ले-आउट में तकनीकी खामी के कारण ट्रीटमेंट प्लांट और सीवर लाइन बिछाने का कार्य रुक गया है। प्रयागराज के एमएनएनआईटी से संशोधित ले आउट मिलते ही कार्य स्वीकृत करा दिया जाएगा। कोशिश है कि जल्द से जल्द कार्य पूरा कर दिया जाए। -सुनील कुमार यादव, एक्सईएन, जल निगम।