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प्रोजेक्टर से लैब में पढ़ाई करते हैं सबरहद विद्यालय के छात्र
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शाहगंज क्षेत्र के सबरहद स्थित कम्पोजिट विद्यालय का अत्याधुनिक टेली लेंस से देखते शिक्षक। संवाद
- फोटो : JAUNPUR
शाहगंज। मिशन कायाकल्प के तहत सबरहद गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय सूरत बदल गई है। विज्ञान लैब, कंप्यूटर आदि की व्यवस्था की गई है। मंगलवार को यहां की दूरबीन से सूर्यग्रहण का नजारा लिया गया।
विद्यालय में छात्रों संख्या 850 से अधिक है। विज्ञान, गणित, कंप्यूटर लैब के अलावा कल्पना चावला के नाम से खगोल विज्ञान का लैब ऐसा है। इसे देखने के लिए क्षेत्र के विद्यालयों के संचालक पहुंचते हैं। विद्यालय के कैमरों में सीसी कैमरे लगे हैं। प्रोजेक्टर से पढ़ाई होती है। पुस्तकालय भी है। खगोल विज्ञान में बच्चों को निपुण करने के लिए टेलीस्कोप तक की व्यवस्था है। बागवानी भी की गई है। यहां पर सुपर 20 के नाम से बीस छात्रों की सुबह-शाम अलग क्लास लगती है, जिसमें समान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान और चिकित्सा संबंधी जानकारी देकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाजा से छात्रों को तैयार किया जाता है।
वर्ष 2007 में इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर अशोक कुमार को तैनात किए गए। उस समय विद्यालय में केवल 70 छात्र थे। उन्होंने 15 साल में स्कूल सूरत बदल दी। वह बताते हैं कि छात्रों के हिसाब से अध्यापक की संख्या कम है। आठ अध्यापक, तीन शिक्षा मित्र व अनुदेशक हैं। व्यवस्था सुधारने में प्रधान मुकेश राजभर भी सहयोग रहता है। बीएसए डा.गोरखनाथ पटेल ने बताया कि कायाकल्प के तहत कंपोजिट विद्यालय सबरहद की सूरत बदली गई है।
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विद्यालय में छात्रों संख्या 850 से अधिक है। विज्ञान, गणित, कंप्यूटर लैब के अलावा कल्पना चावला के नाम से खगोल विज्ञान का लैब ऐसा है। इसे देखने के लिए क्षेत्र के विद्यालयों के संचालक पहुंचते हैं। विद्यालय के कैमरों में सीसी कैमरे लगे हैं। प्रोजेक्टर से पढ़ाई होती है। पुस्तकालय भी है। खगोल विज्ञान में बच्चों को निपुण करने के लिए टेलीस्कोप तक की व्यवस्था है। बागवानी भी की गई है। यहां पर सुपर 20 के नाम से बीस छात्रों की सुबह-शाम अलग क्लास लगती है, जिसमें समान्य ज्ञान, गणित, विज्ञान और चिकित्सा संबंधी जानकारी देकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाजा से छात्रों को तैयार किया जाता है।
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वर्ष 2007 में इस विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर अशोक कुमार को तैनात किए गए। उस समय विद्यालय में केवल 70 छात्र थे। उन्होंने 15 साल में स्कूल सूरत बदल दी। वह बताते हैं कि छात्रों के हिसाब से अध्यापक की संख्या कम है। आठ अध्यापक, तीन शिक्षा मित्र व अनुदेशक हैं। व्यवस्था सुधारने में प्रधान मुकेश राजभर भी सहयोग रहता है। बीएसए डा.गोरखनाथ पटेल ने बताया कि कायाकल्प के तहत कंपोजिट विद्यालय सबरहद की सूरत बदली गई है।
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