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Jaunpur News: दो विभागों की खींचतान से 78 साल से अटका रास्ते का मसला, पिस रही जनता
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चन्दवक। जौनपुर-औड़िहार-गाजीपुर रेल प्रखंड के डोभी स्टेशन के पीछे स्थित मुकरीपुर व अन्य गांवों में जाने के लिए आजादी के 78 साल बाद भी पक्का रास्ता नहीं है। इसका कारण कोई और नहीं बल्कि दो विभाग रेलवे व पीडब्ल्यूडी हैं, जिनकी खींचतान में करीब 25 हजार की आबादी पिस रही है। सबसे अधिक बच्चों और महिलाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। ये लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर रेलवे लाइन और स्टेशन पार कर अपने गंतव्य को जाते हैं।
आजमगढ़- वाराणसी मार्ग पर स्थित गोनौली गांव पर बने रेलवे फाटक के बाएं से जाने वाली सुंदर सी सड़क लगभग पांच सौ मीटर तक दिलखुश कर देने लायक बनी है। लेकिन उसके बाद मुकरीपुर (रायपुर) गांव के लिए रास्ता ही नहीं मिलेगा। इस गांव के लिए कोई संपर्क मार्ग बना ही नही है। रास्ता है लेकिन सिर्फ पगडंडी नुमा। जैसा कभी 70 के दशक में गांवों में होता था। यह रास्ता एक बगीचे (डोभी रेलवे स्टेशन का दक्षिणी हिस्सा) से होता हुआ मुकुरीपुर(रायपुर), हरिहरपुर छावनी, विजयीपुर और देवलासपुर गांव के लिए जाता है। दरअसल इस मार्ग के लिए रेलवे ने एहसान स्वरूप जमीन तो छोड़ दी लेकिन 78 वर्षों से आज तक पक्की सड़क के लिए एनओसी जारी ही नहीं की।
ग्रामीण कर चुके हैं डीआरएम का घेराव
मुकुरीपुर के पूर्व प्रधान रामानुज यादव ने बताया कि जब से उनके कार्यकाल में साल 2015 से 2020 तक ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से कई बार गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नही हुई। डीआरएम को तत्कालीन सांसद द्वारा पत्र भी लिखा गया लेकिन मामला अटका ही रहा। डीआरएम जब निरीक्षण के लिए डोभी स्टेशन आये तो ग्रामीणों ने उनका घेराव किया लेकिन उस समय भी सिर्फ आश्वासन ही मिला।
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कच्चे रास्ते ने छीनीं जिंदगियां
केस 1- 4 वर्ष पूर्व बारिश के समय देवलासपुर गांव के अजीत कुमार को हार्ट अटैक आने पर हॉस्पिटल ले जाते समय ऑटोरिक्शा कीचड़ में फंस गया था। इसके कारण वो समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके और उनकी मौत हो गई।
केस 2- अगस्त 2017 में मंजू देवी अपनी गर्भवती बहू कल्याणी की डिलीवरी के पूर्व जांच लिए अस्पताल लेकर जा रही थीं खराब रास्ते के कारण लगे झटकों से उनके बहु का गर्भपात हो गया।
बोले गांव वाले: 1- आम दिनों की अपेक्षा बरसात के दिनों में काफी समस्या होती है। गाड़ी छोड़िए पैदल जाना दूभर हो जाता है। - गोपाल यादव (पूर्व प्रधान)
2 - रायपुर गांव के ही रहने वाला हूं। बरसात के दिनों में रिश्तेदार गांव में आना ही बंद कर देते हैं। आम दिनों में रास्ते पर आना जाना तो दूभर होता ही है लेकिन बरसात में तालाब जैसा दृश्य हो जाता है। - डॉ आरबी यादव (सीएचसी अधीक्षक चोलापुर)
इस संबंध में विभाग को कोई आवेदन नही प्राप्त हुआ है जिसकी अनुमति दी जाए। यदि प्रार्थना पत्र आया होगा तो मामले की जांच करवा ली जाएगी। - अशोक कुमार, जन संपर्क अधिकारी, एनई रेलवे, वाराणसी
सांसद कार्यकाल में मैंने अथक प्रयास किया रेलवे विभाग से अनुमति लेने के लिए लेकिन स्टेशन के भविष्य में विस्तार को देखते हुए रेलवे ने अनुमति नहीं दी। फिलहाल मैं रास्ते का कोई दूसरा विकल्प ढूंढने में लगा हूं। - तूफानी सरोज, सपा विधायक केराकत
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आजमगढ़- वाराणसी मार्ग पर स्थित गोनौली गांव पर बने रेलवे फाटक के बाएं से जाने वाली सुंदर सी सड़क लगभग पांच सौ मीटर तक दिलखुश कर देने लायक बनी है। लेकिन उसके बाद मुकरीपुर (रायपुर) गांव के लिए रास्ता ही नहीं मिलेगा। इस गांव के लिए कोई संपर्क मार्ग बना ही नही है। रास्ता है लेकिन सिर्फ पगडंडी नुमा। जैसा कभी 70 के दशक में गांवों में होता था। यह रास्ता एक बगीचे (डोभी रेलवे स्टेशन का दक्षिणी हिस्सा) से होता हुआ मुकुरीपुर(रायपुर), हरिहरपुर छावनी, विजयीपुर और देवलासपुर गांव के लिए जाता है। दरअसल इस मार्ग के लिए रेलवे ने एहसान स्वरूप जमीन तो छोड़ दी लेकिन 78 वर्षों से आज तक पक्की सड़क के लिए एनओसी जारी ही नहीं की।
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ग्रामीण कर चुके हैं डीआरएम का घेराव
मुकुरीपुर के पूर्व प्रधान रामानुज यादव ने बताया कि जब से उनके कार्यकाल में साल 2015 से 2020 तक ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से कई बार गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नही हुई। डीआरएम को तत्कालीन सांसद द्वारा पत्र भी लिखा गया लेकिन मामला अटका ही रहा। डीआरएम जब निरीक्षण के लिए डोभी स्टेशन आये तो ग्रामीणों ने उनका घेराव किया लेकिन उस समय भी सिर्फ आश्वासन ही मिला।
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कच्चे रास्ते ने छीनीं जिंदगियां
केस 1- 4 वर्ष पूर्व बारिश के समय देवलासपुर गांव के अजीत कुमार को हार्ट अटैक आने पर हॉस्पिटल ले जाते समय ऑटोरिक्शा कीचड़ में फंस गया था। इसके कारण वो समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके और उनकी मौत हो गई।
केस 2- अगस्त 2017 में मंजू देवी अपनी गर्भवती बहू कल्याणी की डिलीवरी के पूर्व जांच लिए अस्पताल लेकर जा रही थीं खराब रास्ते के कारण लगे झटकों से उनके बहु का गर्भपात हो गया।
बोले गांव वाले: 1- आम दिनों की अपेक्षा बरसात के दिनों में काफी समस्या होती है। गाड़ी छोड़िए पैदल जाना दूभर हो जाता है। - गोपाल यादव (पूर्व प्रधान)
2 - रायपुर गांव के ही रहने वाला हूं। बरसात के दिनों में रिश्तेदार गांव में आना ही बंद कर देते हैं। आम दिनों में रास्ते पर आना जाना तो दूभर होता ही है लेकिन बरसात में तालाब जैसा दृश्य हो जाता है। - डॉ आरबी यादव (सीएचसी अधीक्षक चोलापुर)
इस संबंध में विभाग को कोई आवेदन नही प्राप्त हुआ है जिसकी अनुमति दी जाए। यदि प्रार्थना पत्र आया होगा तो मामले की जांच करवा ली जाएगी। - अशोक कुमार, जन संपर्क अधिकारी, एनई रेलवे, वाराणसी
सांसद कार्यकाल में मैंने अथक प्रयास किया रेलवे विभाग से अनुमति लेने के लिए लेकिन स्टेशन के भविष्य में विस्तार को देखते हुए रेलवे ने अनुमति नहीं दी। फिलहाल मैं रास्ते का कोई दूसरा विकल्प ढूंढने में लगा हूं। - तूफानी सरोज, सपा विधायक केराकत