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मछलीशहर के पूर्व सांसद और सपा नेता रामचरित्र निषाद का निधन
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जौनपुर। मछलीशहर संसदीय सीट के पूर्व सांसद व सपा नेता रामचरित्र निषाद (57) का रविवार की रात कोरोना से निधन हो गया। वह कुछ दिनों पहले बीमार हुए थे। नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। भाजपा और सपा के कई दिग्गज नेताओं के करीबी रामचरित्र निषाद के निधन की खबर से जिले में शोक की लहर दौड़ गई।
मूल रूप से बस्ती जिले के कटरा बुजुर्ग गांव निवासी रामचरित्र निषाद ने वर्ष 2007 में संतकबीरनगर जिले की मेंहदावल सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में हार के बाद उन्होंने जौनपुर का रुख कर लिया। यहां वर्ष 2009 में अपना दल से राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए मछलीशहर संसदीय सीट से मैदान में उतरे, लेकिन इस चुनाव में भी उन्हें हार मिली। वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। बड़े अंतर से चुनाव जीतकर वह सांसद बने। वह केंद्र सरकार की कई समितियों में सदस्य भी रहे। भाजपा के कई शीर्ष नेताओं से उनकी करीबी रही। मछुआरा समाज के बड़े नेताओं में शामिल रहे रामचरित्र निषाद ने वर्ष 2019 में भाजपा से टिकट कटने पर सपा का दामन थाम लिया था। वह मिर्जापुर संसदीय सीट से मैदान में उतरे। अपना दल की अनुप्रिया पटेल से उन्हें शिकस्त खानी पड़ी थी। सपा में वह अखिलेश यादव के भी काफी करीबी रहे। पूर्वांचल में अखिलेश के सभी कार्यक्रमों में वह आगे रहते थे। पूर्व सांसद के प्रतिनिधि राजेश सिंह ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ दिनों से वह कोरोना से ग्रसित थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। निधन से जिले के राजनीतिक हलके में शोक की लहर है। सपा और भाजपा में तमाम नेताओं ने दुख प्रकट किया है।
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एससी सीट पर जीत के बाद विवाद में आए थे रामचरित्र
- कोर्ट तक पहुंचा मामला, गत वर्ष हुआ था खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। वर्ष 2014 के चुनाव में मछलीशहर संसदीय सीट पर चुनाव जीतने के बाद रामचरित्र निषाद जाति प्रमाण पत्र को लेकर काफी विवादों में भी रहे। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से वह सांसद चुने गए थे। उन्होंने चुनाव के लिए नामांकन पत्र में दिल्ली सरकार की ओर से जारी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र संलग्न किया था। दिल्ली में निषाद को अनुसूचित जाति में रखा गया है, जबकि यूपी में यह अति पिछड़ी जाति में आते हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से उनके चुनाव को अवैध ठहराते हुए कुछ लोगों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। करीब पांच वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद एक याचिकाकर्ता के निधन और दूसरे के आपत्ति वापस लेने के बाद मामला खारिज हो गया था।
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पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने जताया दुख
जौनपुर। मछलीशहर के पूर्व सांसद रामचरित्र निषाद के निधन पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने दुख जताया। अपने ट्वीटर एकाउंट पर उन्होंने लिखा कि मछलीशहर लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रामचरित्र निषाद का देहावसान हृदय विदारक है। दिवगंत आत्मा को शांति दें भगवान। शोक संतप्त परिवार के प्रति गहन संवेदना। बता दें, सपा में आने के बाद रामचरित्र निषाद अखिलेश के काफी करीबी रहे।
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अपनी ही सरकार में धरने पर बैठ गए थे रामचरित्र
मीरगंज। रामचरित्र निषाद बगावती तेवर वाले नेता थे। गलत का विरोध करने के लिए वह अपनी ही सरकार में भी भिड़ने से नहीं चूकते थे। तिलौरा गांव में कुछ लोगों ने एक गरीब परिवार को घर से बाहर निकालकर मकान पर कब्जा कर लिया था। इस मामले में पुलिस की हीलाहवाली से क्षुब्ध होकर रामचरित्र निषाद अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। महिला सीओ से उनकी तीखी नोकझोंक भी सुर्खियों में रही। मामला सुलझाने के लिए एसडीएम व एएसपी ग्रामीण को मौके पर आना पड़ा था। उनका यह तेवर भी टिकट कटने का एक कारण रहा। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए भी कई उल्लेखनीय कार्य किए। मछलीशहर के कटाहित गांव में बिजली का उपकेंद्र स्वीकृत कराया था। पहले इसका निर्माण गोरखपुर में होना था। कटाहित खास, मीरगंज में पेयजल टंकी, जंघई स्टेशन का सौंदर्यीकरण, जंघई से रामपुर की सड़क का चौड़ीकरण, गोपालपुर में विद्युत उपकेंद्र, मछलीशहर से जंघई तक पुराने तार का नवीनीकरण सहित कई कार्य उन्होंने किए थे।
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मूल रूप से बस्ती जिले के कटरा बुजुर्ग गांव निवासी रामचरित्र निषाद ने वर्ष 2007 में संतकबीरनगर जिले की मेंहदावल सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में हार के बाद उन्होंने जौनपुर का रुख कर लिया। यहां वर्ष 2009 में अपना दल से राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए मछलीशहर संसदीय सीट से मैदान में उतरे, लेकिन इस चुनाव में भी उन्हें हार मिली। वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। बड़े अंतर से चुनाव जीतकर वह सांसद बने। वह केंद्र सरकार की कई समितियों में सदस्य भी रहे। भाजपा के कई शीर्ष नेताओं से उनकी करीबी रही। मछुआरा समाज के बड़े नेताओं में शामिल रहे रामचरित्र निषाद ने वर्ष 2019 में भाजपा से टिकट कटने पर सपा का दामन थाम लिया था। वह मिर्जापुर संसदीय सीट से मैदान में उतरे। अपना दल की अनुप्रिया पटेल से उन्हें शिकस्त खानी पड़ी थी। सपा में वह अखिलेश यादव के भी काफी करीबी रहे। पूर्वांचल में अखिलेश के सभी कार्यक्रमों में वह आगे रहते थे। पूर्व सांसद के प्रतिनिधि राजेश सिंह ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि कुछ दिनों से वह कोरोना से ग्रसित थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं। निधन से जिले के राजनीतिक हलके में शोक की लहर है। सपा और भाजपा में तमाम नेताओं ने दुख प्रकट किया है।
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एससी सीट पर जीत के बाद विवाद में आए थे रामचरित्र
- कोर्ट तक पहुंचा मामला, गत वर्ष हुआ था खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। वर्ष 2014 के चुनाव में मछलीशहर संसदीय सीट पर चुनाव जीतने के बाद रामचरित्र निषाद जाति प्रमाण पत्र को लेकर काफी विवादों में भी रहे। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से वह सांसद चुने गए थे। उन्होंने चुनाव के लिए नामांकन पत्र में दिल्ली सरकार की ओर से जारी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र संलग्न किया था। दिल्ली में निषाद को अनुसूचित जाति में रखा गया है, जबकि यूपी में यह अति पिछड़ी जाति में आते हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से उनके चुनाव को अवैध ठहराते हुए कुछ लोगों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। करीब पांच वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद एक याचिकाकर्ता के निधन और दूसरे के आपत्ति वापस लेने के बाद मामला खारिज हो गया था।
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पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने जताया दुख
जौनपुर। मछलीशहर के पूर्व सांसद रामचरित्र निषाद के निधन पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने दुख जताया। अपने ट्वीटर एकाउंट पर उन्होंने लिखा कि मछलीशहर लोकसभा सीट से पूर्व सांसद रामचरित्र निषाद का देहावसान हृदय विदारक है। दिवगंत आत्मा को शांति दें भगवान। शोक संतप्त परिवार के प्रति गहन संवेदना। बता दें, सपा में आने के बाद रामचरित्र निषाद अखिलेश के काफी करीबी रहे।
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अपनी ही सरकार में धरने पर बैठ गए थे रामचरित्र
मीरगंज। रामचरित्र निषाद बगावती तेवर वाले नेता थे। गलत का विरोध करने के लिए वह अपनी ही सरकार में भी भिड़ने से नहीं चूकते थे। तिलौरा गांव में कुछ लोगों ने एक गरीब परिवार को घर से बाहर निकालकर मकान पर कब्जा कर लिया था। इस मामले में पुलिस की हीलाहवाली से क्षुब्ध होकर रामचरित्र निषाद अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। महिला सीओ से उनकी तीखी नोकझोंक भी सुर्खियों में रही। मामला सुलझाने के लिए एसडीएम व एएसपी ग्रामीण को मौके पर आना पड़ा था। उनका यह तेवर भी टिकट कटने का एक कारण रहा। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए भी कई उल्लेखनीय कार्य किए। मछलीशहर के कटाहित गांव में बिजली का उपकेंद्र स्वीकृत कराया था। पहले इसका निर्माण गोरखपुर में होना था। कटाहित खास, मीरगंज में पेयजल टंकी, जंघई स्टेशन का सौंदर्यीकरण, जंघई से रामपुर की सड़क का चौड़ीकरण, गोपालपुर में विद्युत उपकेंद्र, मछलीशहर से जंघई तक पुराने तार का नवीनीकरण सहित कई कार्य उन्होंने किए थे।