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पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने प्राइवेट परीक्षा फॉर्म लेने पर लगाई रोक
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करंजाकला। नई शिक्षा नीति में प्राइवेट फार्म भरकर परीक्षा देने पर रोक लगा दी गई है। प्राइवेट परीक्षा फार्म भरकर अब कोई भी छात्र पढ़ाई नहीं कर सकेगा। पढ़ाई करने के लिए छात्रों को अब संस्थागत रूप में ही परीक्षा फार्म भरना पड़ेगा। पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने प्राइवेट परीक्षा फार्म लेने से इनकार कर दिया है। विवि के इस फैसले से लाखों छात्र अब प्राइवेट फार्म भरकर पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।
विवि प्रशासन की और से यह फरमान जारी होने के बाद तमाम छात्रों को झटका लगा है। यदि कोई छात्र पढ़ाई करना चाहता है तो उसे संस्थागत फार्म भरकर की पढ़ाई करने की अनुमति मिलेगी। प्राइवेट परीक्षा फॉर्म आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में भरे जाते थे। विश्वविद्यालय से संबद्ध वित्तपोषित महाविद्यालयों में छात्र प्राइवेट परीक्षा फार्म भरकर स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करते थे। हर साल बढ़ी संख्या में छात्र विभिन्न विषयों में आवेदन कर प्राइवेट छात्र के तौर पर परीक्षा में शामिल होते थे। इससे विवि की निर्धारित सीटों के अलावा भी छात्रों से परीक्षा शुल्क के रूप में आय होती थी। शिक्षा से जुड़े कई लोगों का मानना है कि प्राइवेट फॉर्म भरने पर पाबंदी लगने के बाद तमाम विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। उन्हें दुरुस्त शिक्षा का सहारा लेना पडे़गा। विवि के अधिकारियों की माने तो हर साल करीब एक लाख के लगभग छात्र प्राइवेट परीक्षा फार्म भरते थे। इससे विवि की आय भी होती थी। प्राइवेट परीक्षा फार्म भरने पर रोक लगाने से विवि को भी नुकसान उठाना पडे़गा।
कोट
स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों का प्राइवेट परीक्षा फॉर्म नहीं भरा गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया है। पढ़ाई के लिए छात्रों को संस्थागत रूप से पंजीकरण कराना होगा। - बीएन सिंह, परीक्षा नियंत्रक
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विवि प्रशासन की और से यह फरमान जारी होने के बाद तमाम छात्रों को झटका लगा है। यदि कोई छात्र पढ़ाई करना चाहता है तो उसे संस्थागत फार्म भरकर की पढ़ाई करने की अनुमति मिलेगी। प्राइवेट परीक्षा फॉर्म आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में भरे जाते थे। विश्वविद्यालय से संबद्ध वित्तपोषित महाविद्यालयों में छात्र प्राइवेट परीक्षा फार्म भरकर स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करते थे। हर साल बढ़ी संख्या में छात्र विभिन्न विषयों में आवेदन कर प्राइवेट छात्र के तौर पर परीक्षा में शामिल होते थे। इससे विवि की निर्धारित सीटों के अलावा भी छात्रों से परीक्षा शुल्क के रूप में आय होती थी। शिक्षा से जुड़े कई लोगों का मानना है कि प्राइवेट फॉर्म भरने पर पाबंदी लगने के बाद तमाम विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। उन्हें दुरुस्त शिक्षा का सहारा लेना पडे़गा। विवि के अधिकारियों की माने तो हर साल करीब एक लाख के लगभग छात्र प्राइवेट परीक्षा फार्म भरते थे। इससे विवि की आय भी होती थी। प्राइवेट परीक्षा फार्म भरने पर रोक लगाने से विवि को भी नुकसान उठाना पडे़गा।
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कोट
स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों का प्राइवेट परीक्षा फॉर्म नहीं भरा गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया है। पढ़ाई के लिए छात्रों को संस्थागत रूप से पंजीकरण कराना होगा। - बीएन सिंह, परीक्षा नियंत्रक
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