पूर्वांचल विवि का दीक्षांत समारोह: राज्यपाल ने छात्राओं की मेहनत को सराहा, छात्रों को संस्कारवान बनाने पर जोर
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह में कुल 66 मेधावियों को गोल्ड मेडल दिया गया। इसमें 41 छात्राएं शामिल हैं। राज्यपाल ने शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की तेजी से बढ रही भागीदारी की सराहना की वहीं दूसरी तरफ छात्रों को आगे बढ़ने के लिए चेताया भी।
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यूपी के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय का 26वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को धूमधाम के साथ मनाया गया। दीक्षांत समारोह के स्वर्णिम बेला में कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल के हाथों मंच पर मेडल पाकर मेधावी गदगद हो उठे। टॉपर छात्रों ने अपनी सफलता के पीछे अपने माता पिता और गुरुजनों का योगदान बताया।
कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 66 मेधाधियों को गोल्ड मेडल और 307 शोधार्थियों को शोध उपाधि प्रदान किया। सर्वाधिक गोल्ड मेडल छात्राओं को मिलने पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खुशी जाहिर की। राज्यपाल ने शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की तेजी से बढ रही भागीदारी की सराहना की वहीं दूसरी तरफ छात्रों को आगे बढ़ने के लिए चेताया भी। साथ ही उन्हें संस्कारवान बनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि इस बार भी लड़कियां लड़कों से आगे निकल गईं। लड़कों को भी प्रयास करना होगा। हर क्षेत्र में लड़कियां आगे बढ़ रही हैं। विश्वविद्यालय में आधी आबादी का दबदबा बरकरार है। दीक्षांत समारोह में इस बार 66 मेधावियों को गोल्ड मेडल मिला। इसमें 41 छात्राएं और 21 छात्र शमिल हैं।
राज्यपाल बोलीं- यही असली सशक्तिकरण
देश तेजी से बदल रहा है। लड़कियां शिक्षा के साथ खेल, सेना, अंतरिक्ष समेत सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। यही असली सशक्तिकरण है। युवा नवाचार के लिए तैयार हैं। उन्हें आगे लाना होगा। जरूरत इस बात की है कि उनकी उर्जा को देश के विकास में लगाया जाए। 21वीं सदी विज्ञान की सदी है। युवा शक्ति के कौशल को बढ़ाने में शिक्षण संस्थाएं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता से ट्रेंड बदलेगा। कौशल आधारित शिक्षा से शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होगा। साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेगें। शोध को स्थानीय स्तर प्राथमिकता देनी होगी। नई शिक्षा नीति से काफी बदलाव आया है। नैक के लिए शिक्षण संस्थाओं को तैयार रहना होगा।
मुख्य अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि भारत ऋषियों-मुनियों की कर्मभूमि रही है। दीक्षा ग्रहण करने के बाद जीवन के हर क्षेत्र में शिक्षा की उपयोगिता को साबित करें, यही हमारी शुभकामनाएं है। आज उर्जा और ज्ञान के अक्षय भंडार है। आप को इसका सकारात्मक और सर्जनात्मक उपयोग देश और समाज की उन्नति के लिए करना है। आप कौशल, ज्ञान और अनुसंधान का उपयोग करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए तैयार रहना होगा। कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने अतिथियों का स्वागत किया।