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निजी स्कूलों की शुल्क वसूली पर लगाम नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 07 Apr 2016 12:12 AM IST
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अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में शुल्क के नाम पर मनमानी चरम पर है। स्थिति यह है कि सामान्य व्यक्ति अपने बच्चों को इन स्कूलों में न तो दाखिला करा सकता है और न ही पढ़ाई का बोझ उठा सकता है। एक छात्र पर प्रति वर्ष 50 से 60 हजार रुपये अभिभावकों को खर्च करने पड़ रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में अर्हता प्राप्त अध्यापक भी नहीं हैं।
ऐसे में स्कूल संचालक बेलगाम हैं और उनके मनमाना शुल्क वसूली पर प्रशासन लगाम नहीं लगा पा रहा है। और तो और प्रशासनिक और पुलिस अफसर इनके यहां नामांकन कराने के लिए जुगाड़ लगाते हैं। परिषदीय विद्यालयों मेें आई गिरावट के कारण हर व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम के अच्छे स्कूलों में पढ़ाए।
लेकिन माली हालत ठीक न होने के कारण लोग ऐसे स्कूलों में नहीं पढ़ा पा रहे हैं। जो पढ़ा रहे हैं उनकी मजबूरी का फायदा उठाने में निजी स्कूल संचालक कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। सीबीएसई और आईसीएससी के निजी विद्यालयों में दाखिले पर गौर किया जाए तो नामांकन के नाम पर 4000, फीस के नाम पर कहीं वर्ष भर में 30 हजार तो कहीं 25 हजार, टाई बेल्ट, किताब, आई कार्ड, बैग, ड्रेस आदि के नाम पर आठ से 10 हजार रुपये अभिभावक को खर्च करना पड़
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रहा है। इसके अलावा कभी वार्षिकोत्सव तो कभी अन्य आयोजनों के नाम पर तीन से चार हजार रुपये वसूल किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्कूल बस के नाम पर अभिभावक को 800 से 1200 रुपये महीने खर्च करने पड़ रहे हैं। इनकी मनमानी पर कोई अंकुश शासन प्रशासन का नहीं है। जबकि नियम है कि राज्य सरकार की गाइड लाइन का अनुपालन कराया जाए।
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ऐसे में स्कूल संचालक बेलगाम हैं और उनके मनमाना शुल्क वसूली पर प्रशासन लगाम नहीं लगा पा रहा है। और तो और प्रशासनिक और पुलिस अफसर इनके यहां नामांकन कराने के लिए जुगाड़ लगाते हैं। परिषदीय विद्यालयों मेें आई गिरावट के कारण हर व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम के अच्छे स्कूलों में पढ़ाए।
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लेकिन माली हालत ठीक न होने के कारण लोग ऐसे स्कूलों में नहीं पढ़ा पा रहे हैं। जो पढ़ा रहे हैं उनकी मजबूरी का फायदा उठाने में निजी स्कूल संचालक कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। सीबीएसई और आईसीएससी के निजी विद्यालयों में दाखिले पर गौर किया जाए तो नामांकन के नाम पर 4000, फीस के नाम पर कहीं वर्ष भर में 30 हजार तो कहीं 25 हजार, टाई बेल्ट, किताब, आई कार्ड, बैग, ड्रेस आदि के नाम पर आठ से 10 हजार रुपये अभिभावक को खर्च करना पड़
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रहा है। इसके अलावा कभी वार्षिकोत्सव तो कभी अन्य आयोजनों के नाम पर तीन से चार हजार रुपये वसूल किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्कूल बस के नाम पर अभिभावक को 800 से 1200 रुपये महीने खर्च करने पड़ रहे हैं। इनकी मनमानी पर कोई अंकुश शासन प्रशासन का नहीं है। जबकि नियम है कि राज्य सरकार की गाइड लाइन का अनुपालन कराया जाए।