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Jaunpur News: 150 वर्षों से जीर्णोद्धार की राह देख रहा पिलकिछा तालाब
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बदलापुर। खुटहन ब्लाक के मॉडल ग्राम स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक तालाब पिलकिछा तालाब बीते 150 वर्षों से अपने जीर्णोद्धार की राह देख रहा है। इस तालाब को संवारने के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन भी कोई रुचि नहीं ले रहा है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
जिले में जहां एक ओर अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर पिलकिछा स्थित इस ऐतिहासिक तालाब की ओर किसी का ध्यान नहीं है। तीन बीघा क्षेत्रफल में फैला यह तालाब जलकुंभियों से पटा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में जब भी कोई शादी विवाह का कार्यक्रम होता है आसपास की औरतें तालाब पर रीति रिवाज पूरा करने आती हैं। इसका जीर्णोद्धार तो छोड़िए साफ सफाई भी नहीं कराई जा रही है।
धार्मिक पहलू से तालाब की साफ-सफाई कराना आवश्यक है। तालाब जलकुंभी से पट गया है। तालाब की सफाई कराने में कोई रुचि नहीं ले रहा है। -सावित्री देवी
तालाब और कुएं हमारी धरोहर हैं। इसको पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। ताकि हमारी पहचान बनी रहे।-- - पं. राम प्यारे दुबे
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तालाब में पहले पानी साफ हुआ करता था। लोग स्नान आदि करते थे। लेकिन जलकुंभी से पट जाने के कारण लोग किनारे ही पूजा करके चले जाते हैं।-- - प्रभावती देवी
तालाब की केवल सफाई करा दी जाए तो जल संरक्षण का सबसे बड़ा साधन सुरक्षित हो जाएगा। हमारी धार्मिक मान्यताएं भी सुरक्षित हो जाएगी। धार्मिक आस्था जुड़ी रहेगी।-- -- शिवनाथ सिंह
तालाब की धार्मिक मान्यता को पुनर्जीवित करने के लिए बहुत जल्द ही तालाब का सौन्दर्यीकरण कराया जाएगा।-- -गौर्वेन्द्र सिंह, बीडीओ खुटहन
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जिले में जहां एक ओर अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर पिलकिछा स्थित इस ऐतिहासिक तालाब की ओर किसी का ध्यान नहीं है। तीन बीघा क्षेत्रफल में फैला यह तालाब जलकुंभियों से पटा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में जब भी कोई शादी विवाह का कार्यक्रम होता है आसपास की औरतें तालाब पर रीति रिवाज पूरा करने आती हैं। इसका जीर्णोद्धार तो छोड़िए साफ सफाई भी नहीं कराई जा रही है।
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धार्मिक पहलू से तालाब की साफ-सफाई कराना आवश्यक है। तालाब जलकुंभी से पट गया है। तालाब की सफाई कराने में कोई रुचि नहीं ले रहा है। -सावित्री देवी
तालाब और कुएं हमारी धरोहर हैं। इसको पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। ताकि हमारी पहचान बनी रहे।
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तालाब में पहले पानी साफ हुआ करता था। लोग स्नान आदि करते थे। लेकिन जलकुंभी से पट जाने के कारण लोग किनारे ही पूजा करके चले जाते हैं।
तालाब की केवल सफाई करा दी जाए तो जल संरक्षण का सबसे बड़ा साधन सुरक्षित हो जाएगा। हमारी धार्मिक मान्यताएं भी सुरक्षित हो जाएगी। धार्मिक आस्था जुड़ी रहेगी।
तालाब की धार्मिक मान्यता को पुनर्जीवित करने के लिए बहुत जल्द ही तालाब का सौन्दर्यीकरण कराया जाएगा।