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मातृ मृत्यु की सूचना देने वाले को मिलेगी 1000 रुपये प्रोत्साहन राशि
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प्रसव के पहले अथवा के प्रसव के दौरान होने वाली मौत को रोकने के लिए सरकार ने नई पहल शुरू की है। मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शासन ने सूचना देने वालों को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की निर्णय लिया है। टोल फ्री नंबर 104 पर गांव का कोई भी व्यक्ति मातृ मृत्यु के बारे में सूचना दे सकता है। सूचना का सत्यापन करने के बाद प्रथम सूचना देने वाले व्यक्ति के खाते में 1000 रुपये स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। प्रसव के दौरान होने वाली मौत की सही सूचना नहीं मिलने के कारण सरकार ने यह पहल शुरू की है। एक लाख महिलाओं में से कितनी महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसव बाद मौत हुई है, उसे मातृ मृत्यु दर कहते हैं।
एन्युवल हेल्थ सर्वे के अनुसार वर्ष 2012-13 में वाराणसी मंडल की मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 281 थी। 2016 से 2018 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) के आंकड़ों के अनुसार राज्य की मातृ मृत्यु दर 197 हो गई है, जबकि 2014 से 16 तक 201 थी। रीप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ (आरसीएच) के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. सत्य नारायण हरिश्चंद्र ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व के तहत गर्भवतियों को गुणात्मक सेवाएं दी जा रही हैं। मातृ मृत्यु एवं नवजात की मृत्यु में कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिले के मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता नीरज सिंह ने बताया कि 2020-21 में 56 मातृ मृत्यु की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। इस वर्ष अभी तक 21 मातृ मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सत्यव्रत त्रिपाठी का कहना है कि मातृ मृत्यु की प्रथम सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए उस महिला का नाम, आयु, पति का नाम, घर का पता बताना जरूरी होगा। इस योजना का उद्देश्य मातृ मृत्यु की रिपोर्टिंग में सुधार लाना है। मातृ मृत्यु की सूचना समुदाय का हर कोई जैसे आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या कोई अन्य भी दे सकता है। सूचना मिलने पर उस क्षेत्र का प्रभारी मेडिकल अफसर एक सप्ताह के अंदर पूरी रिपोर्ट भेजेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर गठित टीम मामले की जांच करेगी। टीम मातृ मृत्यु के कारणों का पता लगाएगी तथा मातृ मृत्यु में कमी लाने के प्रयास किए जाएंगे। अभी मातृ मृत्यु की सही सूचना नहीं मिलती है। इसकी वजह से शासन स्तर पर प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। हालांकि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।
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एन्युवल हेल्थ सर्वे के अनुसार वर्ष 2012-13 में वाराणसी मंडल की मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 281 थी। 2016 से 2018 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) के आंकड़ों के अनुसार राज्य की मातृ मृत्यु दर 197 हो गई है, जबकि 2014 से 16 तक 201 थी। रीप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ (आरसीएच) के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. सत्य नारायण हरिश्चंद्र ने बताया कि सुरक्षित मातृत्व के तहत गर्भवतियों को गुणात्मक सेवाएं दी जा रही हैं। मातृ मृत्यु एवं नवजात की मृत्यु में कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिले के मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता नीरज सिंह ने बताया कि 2020-21 में 56 मातृ मृत्यु की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। इस वर्ष अभी तक 21 मातृ मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है।
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जिला कार्यक्रम प्रबंधक सत्यव्रत त्रिपाठी का कहना है कि मातृ मृत्यु की प्रथम सूचना देने वाले व्यक्ति के लिए उस महिला का नाम, आयु, पति का नाम, घर का पता बताना जरूरी होगा। इस योजना का उद्देश्य मातृ मृत्यु की रिपोर्टिंग में सुधार लाना है। मातृ मृत्यु की सूचना समुदाय का हर कोई जैसे आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या कोई अन्य भी दे सकता है। सूचना मिलने पर उस क्षेत्र का प्रभारी मेडिकल अफसर एक सप्ताह के अंदर पूरी रिपोर्ट भेजेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर गठित टीम मामले की जांच करेगी। टीम मातृ मृत्यु के कारणों का पता लगाएगी तथा मातृ मृत्यु में कमी लाने के प्रयास किए जाएंगे। अभी मातृ मृत्यु की सही सूचना नहीं मिलती है। इसकी वजह से शासन स्तर पर प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। हालांकि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।
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