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सूबे में बिना जुगाड़ के नहीं हो रहा कोई काम
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Sat, 15 Aug 2015 12:36 AM IST
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प्रदेश के प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम विभाग सूर्य प्रताप सिंह ने सपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस्तीफा देने के बाद शुक्रवार को पहली बार जिले में आए और पत्रकारों से मुखातिब हुए तो सरकार पर कई आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इसमें लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव के भ्रष्टाचार और यूपी बोर्ड में नकल का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने सीधे कहा कि प्रदेश में कोई भी कार्य बिना जुगाड़ या सिफारिश के नहीं हो रहा है।
आज सारी दुनिया में भारत ऊंची विकास दर के लिहाज अच्छी स्थिति में है। ऐसे अवसर को प्रदेश सरकार को गंवाना नहीं चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैने नौकरी से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति चाही, मगर सरकार ने उसे अस्वीकार कर दिया। अब सेवा के छह महीने और बाकी हैं धीरे धीरे वह भी बीत जाएगा।
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उसके बाद मुझे कहीं न कहीं पढ़ाने की नौकरी मिल जाएगी लेकिन प्रदेश का क्या होगा इसकी मुझे चिंता है। उन्होंने कहा ओलावृष्टि से किसानों को हुई क्षति का मुआवजा अभी मात्र 33 प्रतिशत को ही मिला है। 2014 का सूखा राहत का मुआवजा एक भी पैसा किसानों को अभी नही दिया गया। गन्ना किसानों का करोड़ों रुपए सरकार पर बकाया है।
सरकार इन मुद्दों पर कुछ नहीं कर रही है।उन्होंने यमुना एक्सप्रेस वे का विरोध करते हुए कहा कि एक्सप्रेस वे पर बीस हजार करोड़ रुपए क्यों खर्च किया जा रहा जबकि उससे जोड़ने के लिए दो नेशनल हाईवे हैं। उनका चौड़ीकरण किया जा सकता है। बचे पैसों से लखनऊ वाराणसी होते हुए बलिया तक की सड़क बनाई जा सकती है।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इसमें लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव के भ्रष्टाचार और यूपी बोर्ड में नकल का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने सीधे कहा कि प्रदेश में कोई भी कार्य बिना जुगाड़ या सिफारिश के नहीं हो रहा है।
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आज सारी दुनिया में भारत ऊंची विकास दर के लिहाज अच्छी स्थिति में है। ऐसे अवसर को प्रदेश सरकार को गंवाना नहीं चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैने नौकरी से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति चाही, मगर सरकार ने उसे अस्वीकार कर दिया। अब सेवा के छह महीने और बाकी हैं धीरे धीरे वह भी बीत जाएगा।
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उसके बाद मुझे कहीं न कहीं पढ़ाने की नौकरी मिल जाएगी लेकिन प्रदेश का क्या होगा इसकी मुझे चिंता है। उन्होंने कहा ओलावृष्टि से किसानों को हुई क्षति का मुआवजा अभी मात्र 33 प्रतिशत को ही मिला है। 2014 का सूखा राहत का मुआवजा एक भी पैसा किसानों को अभी नही दिया गया। गन्ना किसानों का करोड़ों रुपए सरकार पर बकाया है।
सरकार इन मुद्दों पर कुछ नहीं कर रही है।उन्होंने यमुना एक्सप्रेस वे का विरोध करते हुए कहा कि एक्सप्रेस वे पर बीस हजार करोड़ रुपए क्यों खर्च किया जा रहा जबकि उससे जोड़ने के लिए दो नेशनल हाईवे हैं। उनका चौड़ीकरण किया जा सकता है। बचे पैसों से लखनऊ वाराणसी होते हुए बलिया तक की सड़क बनाई जा सकती है।