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इमामबाड़े में गूंजते रहे नारा-ए हैदरी
jaunpur
Updated Wed, 12 Apr 2017 12:43 AM IST
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केक काटते शिया धर्म के लोग।
- फोटो : jounpur
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शेरे खुदा हजरत अली के विलादत (जन्म) पर 13 रजब मंगलवार को शिया बाहुल्य इलाकों में खुशी का माहौल रहा। लोगों ने एक दूसरे को मौला अली की आमद पर मुबारकबाद पेश की। उलेमाओं ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला। सदर इमाम बारगाह स्थित जामिया इमाम जाफर सादिक में महफिल का आयोजन हुआ। जिसमें शायरों ने कलाम पेश किए। इस दौरान नारा-ए-हैदरी से इमामबाड़े गूंजते रहे।
शिया धर्मगुरु मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि मुसलमानों के चौथे खलीफा शिया समुदाय के पहले इमाम और पैगंबरे इस्लाम के दामाद हजरत अली एक ऐसे आदर्श महापुरुष थे जिनका पूरा जीवन ईश्वरी उपदेश के सांचे में ढला था। जो उपदेश वह लोगों को देते थे उस पर अमल कर के दिखाते थे। इमाम और खलीफा होने के बाद भी उनका समय इबादत में बीतता था। हजरत अली का जन्म अल्लाह के घर पवित्र काबा शरीफ में हुआ था। आपकी वालिदा (मां) आपकी विलादत के पहले जब काबे शरीफ के पास गई तो अल्लाह के हुक्म से काबे की दीवार ने आपकी मां को रास्ता दे दिया था। उनके काबे में तशरीफ लाने के चार दिन बाद 13 रजब को हजरत अली पैदा हुए। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद का मौला अली की जिंदगी पर गहरा असर पड़ा था।
19 रमजान को सहरी के बाद जब सुबह की नमाज अदा की जा रही थी तो नमाजियों के बीच खड़े कातिल रहमान इब्ने मुलजिम ने जहर से बुझी तलवार से मौला अली पर वार कर दिया। लोगों ने बाद में कातिल को पकड़ लिया। इस मौके पर अनमोल, अली कैसर, आकिफ हुसैनी, मौलाना दिलशाद खान, मौलाना रजा अब्बास, मौलाना आसिफ, मोहम्मद सोहराब मौजूद रहे। उधर, हजरत अली का जन्म दिन मानिक चौक पर धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। गोपालपुरी जामियां नासीरिया महाविद्यालय के मौलाना सैय्यद मुबस्सिर हुसैन रिजवी ने कुरान की तेलावत की और नज्र किया। वक्ताओं ने कहा कि हजरत अली ऊंच-नीच व नस्ल -भेद पर यकीन नहीं रखते थे। आयोजक सैय्यद शमशीर हुसैन रहे। इस दौरान सैय्यद जावेद रिजवी, डा.दिलगीर हसन, शमीम हैदर, मीसम अली, विनय मिश्रा एडवोकेट, रामआसरे गुप्ता, संजय श्रीवास्तव मौजूद थे।
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शिया धर्मगुरु मौलाना सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि मुसलमानों के चौथे खलीफा शिया समुदाय के पहले इमाम और पैगंबरे इस्लाम के दामाद हजरत अली एक ऐसे आदर्श महापुरुष थे जिनका पूरा जीवन ईश्वरी उपदेश के सांचे में ढला था। जो उपदेश वह लोगों को देते थे उस पर अमल कर के दिखाते थे। इमाम और खलीफा होने के बाद भी उनका समय इबादत में बीतता था। हजरत अली का जन्म अल्लाह के घर पवित्र काबा शरीफ में हुआ था। आपकी वालिदा (मां) आपकी विलादत के पहले जब काबे शरीफ के पास गई तो अल्लाह के हुक्म से काबे की दीवार ने आपकी मां को रास्ता दे दिया था। उनके काबे में तशरीफ लाने के चार दिन बाद 13 रजब को हजरत अली पैदा हुए। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद का मौला अली की जिंदगी पर गहरा असर पड़ा था।
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19 रमजान को सहरी के बाद जब सुबह की नमाज अदा की जा रही थी तो नमाजियों के बीच खड़े कातिल रहमान इब्ने मुलजिम ने जहर से बुझी तलवार से मौला अली पर वार कर दिया। लोगों ने बाद में कातिल को पकड़ लिया। इस मौके पर अनमोल, अली कैसर, आकिफ हुसैनी, मौलाना दिलशाद खान, मौलाना रजा अब्बास, मौलाना आसिफ, मोहम्मद सोहराब मौजूद रहे। उधर, हजरत अली का जन्म दिन मानिक चौक पर धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। गोपालपुरी जामियां नासीरिया महाविद्यालय के मौलाना सैय्यद मुबस्सिर हुसैन रिजवी ने कुरान की तेलावत की और नज्र किया। वक्ताओं ने कहा कि हजरत अली ऊंच-नीच व नस्ल -भेद पर यकीन नहीं रखते थे। आयोजक सैय्यद शमशीर हुसैन रहे। इस दौरान सैय्यद जावेद रिजवी, डा.दिलगीर हसन, शमीम हैदर, मीसम अली, विनय मिश्रा एडवोकेट, रामआसरे गुप्ता, संजय श्रीवास्तव मौजूद थे।
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