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नैनोमेटेरियल आधारित बायोसेंसर चिकित्सा विज्ञान के लिए वरदान
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर स्थित रज्जू भइया संस्थान में रसायन विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय ई-कार्यशाला के पांचवें दिन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण आधारित स्पेक्ट्रोस्कोपी के सिद्धांत, उसकी कार्य प्रणाली व नैनो मटेरियल आधारित बायो सेंसर की जानकारी दी गई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर के डॉ. मृगेंद्र दूबे ने यूवी-विसिबल स्पेक्ट्रोस्कोपी तथा इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकी के बारे में जानकारी दी। बताया की दोनों तकनीकी नए बनने वाले विभिन्न प्रकार के पदार्थो व रसायनों के पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। इस तकनीक से विभिन्न रासायनों में विभेद करने में करने में मदद मिलती है।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान के डॉ. जय सिंह ने नैनोमटेरियल आधारित कोलेस्ट्रॉल बायोसेंसेर के संश्लेषण, पहचान व अनुप्रयोग के बारे में बताया। कहा कि कोलस्ट्रॉल जल में अविलेय होता है। मानव शरीर मे एक सीमा से अधिक कोलेस्ट्रॉल कई तरह के रोग का कारण होता है। 1993 में पहले कोलेस्ट्रॉल बायोसेंसेर बनने के बाद से इस दिशा में वैज्ञानिक विभिन्न तरह के नैनोमटेरियल बायोसेंसेर के ऊपर शोध कर रहे है। बायोसेंसेर उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर की पहचान बहुत कम समय मे करने में मदद करते है। जिससे रोग के निदान करने में सहायता मिलती है। मुख्य अतिथि इलाहाबाद विवि के डीन विज्ञान संकाय प्रो. शेखर श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक विज्ञान में उपकरणीय तकनीकी की बहुत आवश्यकता है। इस दिशा में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। जिससे विश्वविद्यालय स्तर पर केंद्रीयकृत उपकरणीय सुविधा का विकास किया जा सके। पूविवि की कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने आयोजन के लिए शुभकामना दी।
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान के डॉ. जय सिंह ने नैनोमटेरियल आधारित कोलेस्ट्रॉल बायोसेंसेर के संश्लेषण, पहचान व अनुप्रयोग के बारे में बताया। कहा कि कोलस्ट्रॉल जल में अविलेय होता है। मानव शरीर मे एक सीमा से अधिक कोलेस्ट्रॉल कई तरह के रोग का कारण होता है। 1993 में पहले कोलेस्ट्रॉल बायोसेंसेर बनने के बाद से इस दिशा में वैज्ञानिक विभिन्न तरह के नैनोमटेरियल बायोसेंसेर के ऊपर शोध कर रहे है। बायोसेंसेर उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर की पहचान बहुत कम समय मे करने में मदद करते है। जिससे रोग के निदान करने में सहायता मिलती है। मुख्य अतिथि इलाहाबाद विवि के डीन विज्ञान संकाय प्रो. शेखर श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक विज्ञान में उपकरणीय तकनीकी की बहुत आवश्यकता है। इस दिशा में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। जिससे विश्वविद्यालय स्तर पर केंद्रीयकृत उपकरणीय सुविधा का विकास किया जा सके। पूविवि की कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने आयोजन के लिए शुभकामना दी।
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