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Nag Panchami 2025: नाग पंचमी पर बन रहे ये दुर्लभ संयोग, जानें- धार्मिक महत्व और पूजा का विधान
Mon, 28 Jul 2025 09:40 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
Published by: प्रगति चंद
Updated Mon, 28 Jul 2025 09:40 PM IST
सार
Nag Panchami 2025: इस नाग पंचमी पर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र और शिवयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस मुहूर्त में नागों के साथ भगवान शिव की पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा। साथ ही कालसर्प योग की पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
विस्तार
श्रावण मास की शुक्लपक्ष पंचमी तिथि नागपंचमी पर्व 29 जुलाई मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के साथ शिव योग का दुर्लभ संयोग मिल रहा है, जो भगवान शिव व नागों की पूजा के लिए विशेष लाभदायी माना जाता है।
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ज्योतिष एवं तंत्र के आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल बताते हैं कि उत्तराफाल्गुनी 12वां नक्षत्र है और इसका स्वामी सूर्य हैं। नागपंचमी के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का होना शुभ माना जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी कुंडली में कालसर्प योग, अंगारक योग, केमद्रुम योग या गुरु चांडाल योग हो। इस मुहूर्त में नागों के साथ भगवान शिव की पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा। साथ ही कालसर्प योग की पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।
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पूजा विधान
नागपंचमी के दिन उपासक को अपने घर के दहलीज के दोनों ओर गोबर से पांच सिर वाले नाग की आकृति बनाने का विधान है। गोबर न मिलने पर गेरू का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद नाग देवता को दूध, लावा, दूर्वा, कुशा, गंध, फूल, अक्षत व लड्डुओं सहित पूजा करके नागस्तोत्र व नागसूक्त का पाठ करना चाहिए। चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर इसे भगवान शंकर को चढ़ाने और गाय के दूध से अभिषेक करने से कालसर्प योग की पीड़ा दूर होती है।
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