मुन्ना बजरंगी की तरह ही जेल में मारा गया मुख्तार का करीबी मेराज, जानिए- खास से धुर विरोधी बनने की कहानी
ईद के दिन चित्रकूट जेल गैंगवार में मारा गया मुख्तार अंसारी का करीबी मेराज अली एक जमाने में मुन्ना बजरंगी का खास आदमी हुआ करता था। लेकिन एक विवाद के बाद वह धुर विरोधी बन गया था। बागपत जेल में बजरंगी की हत्या के बाद शक के दायरे में मेराज का नाम आया था।
विस्तार
चित्रकूट जेल गैंगवार में माफिया मुख्तार के गुर्गे मेराज और बदमाश मुकीम काला की हत्या ने जौनपुर के लोगों को जुलाई 2018 की याद दिला दी है। करीब तीन साल पहले ठीक इसी तर्ज पर माफिया मुन्ना बजरंगी की जेल के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या की जिम्मेदारी भले ही पश्चिम यूपी के बदमाश सुनील राठी ने अपने सिर पर ली थी, लेकिन इसमें कई अन्य लोगों की संलिप्तता का भी शक जताया गया था।
मेराज भी उनमें से एक था। पुलिस को दिए बयान में मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने मेराज का नाम लिया था। सीबीआई कोर्ट में भी अपील की थी। अब मुन्ना बजरंगी की तरह ही जेल में मेराज की हत्या ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। गाजीपुर के महेन गांव का मूल निवासी मेराज अली बनारस समेत पूर्वांचल में जरायम की दुनिया का नामी चेहरा था।
एक समय वह मुन्ना बजरंगी का बेहद करीबी हुआ करता था, मगर बाद में मुख्तार अंसारी का खास हो गया। मछली के धंधे व अन्य ठेके-पट्टों का ब्योरा वही रखता था। बजरंगी और मेराज में विवाद की मुख्य वजह प्रापर्टी से जुड़ा एक विवाद था, जिसमें एक पक्ष से बजरंगी तो दूसरी ओर से मेराज पैरवीकार था। मेराज के साथ वाराणसी के पूर्व डिप्टी एसपी और उनका पुत्र भी था।
यह अदावत इस कदर बढ़ी कि दोनों एक-दूसरे का हर नुकसान करने को आतुर हो गए थे। वर्ष 2016 में बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह की हत्या में भी बजरंगी के विरोधी खेमे का नाम आया था और दिसंबर 2017 में बजरंगी के एक अन्य करीबी तारिक की लखनऊ में हुई हत्या में भी मेराज की संलिप्तता की चर्चा रही। हालांकि केस दर्ज कराने के बाद मुकदमे की वादी रहीं तारिक की पत्नी नामजदगी से मुकर गईं, लिहाजा सभी आरोपियों का नाम बाहर कर दिया गया।
जुलाई 2018 में बागपत जेल के अंदर दुस्साहसिक ढंग से मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पत्नी सीमा सिंह ने बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। इसमें राजनीतिक व प्रशासनिक गठजोड़ के साथ मेराज का भी नाम लिया था। बजरंगी के पैतृक गांव सुरेरी थाना के पूरे दयाल में शव पहुंचने पर बिलखते हुए सीमा सिंह चीख-चीख कर मेराज का नाम ले रही थीं।
पुलिस को दिए बयान में भी उन्होंने मेराज का नाम लिया था। हालांकि बाद में यह जांच सीबीआई को ट्रांसफर हो गई। बजरंगी की हत्या की टीस उसके गैंग को अब तक सालती रही है। ऐसे में चित्रकूट जेल के अंदर ठीक उसी तरह मेराज की हत्या को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।