जौनपुर। यूपी मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाया। श्रम कानूनों को रद्द करने, निजीकरण पर रोक लगाने सहित छह सूत्री मांगों का ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा दौर में केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों से किसानों-मजदूरों में असंतोष है। श्रम के 44 कानूनों को समाप्त कर केंद्र सरकार ने चार नए कानूनों को संहिताबद्ध किया है। यह मजदूरों को प्राप्त अभी तक के अधिकारों पर ही कुठाराघात है। उनके काम के घंटे, वेतन की शर्तें और नियुक्तियों के मापदंडों को ही यह कानून नष्ट करते हैं। संगठित क्षेत्र के साथ ही असंगठित क्षेत्र का मजदूर इन नीतियों के चलते एक तरह से सेवा योजकों के हाथ बंधुआ हो जाएगा। लिहाजा चारों श्रम कानूनों और तीनों कृषि कानूनों को समाप्त किया जाना चाहिए। निजीकरण पर रोक, बिजली कानून 2020 वापस लेना, सभी कोविड योद्धाओं का नि:शुल्क इलाज, आयकर के दायरे में न आने वालों को प्रतिमाह 7500 रुपये की मदद और मनरेगा में 200 दिन काम की गारंटी मिलनी चाहिए। प्रदर्शन में अजय चौरसिया, किरण शंकर रघुवंशी, राजेश रावत, नीरज श्रीवास्तव, विजय प्रताप सिंह, अमित रंजन आदि मौजूद रहे।