{"_id":"62644e1a87630b00973ea46c","slug":"most-school-vehicles-will-fail-jaunpur-news-vns6498219109","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरमपूर्ति न किए तो तो फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाएंगे अधिकांश स्कूली वाहन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरमपूर्ति न किए तो तो फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाएंगे अधिकांश स्कूली वाहन
विज्ञापन
मानक को दरकिनार कर धड़ल्ले से स्कूली बसों को चलाया जा रहा है। इसे लेकर अब परिवहन विभाग अभियान चलाने की तैयारी में है। लेकिन, यह अभियान अगर सख्ती से चलाया गया तो गिनती के वाहनों को छोड़कर अधिकांश स्कूली वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाएंगे। हालांकि इस बार एआरटीओ द्वारा सभी स्कूलों को इसके लिए नोटिस दिया गया है। साथ ही सोमवार से बड़े स्कूलों में जाकर गाड़ियों की फिटनेस की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जल्द ही एक बड़े ग्राउंड में सभी स्कूली बसों को एकत्र कर उनके फिटनेस जांच की योजना बनाई गई है।
जनपद में 90 सीबीएसई, 641 माध्यमिक विद्यालय हैं। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक जनपद में 700 वाहन पंजीकृत हैं, जिसमें 150 स्कूल वैन भी शामिल हैं। जबकि हकीकत में यह संख्या काफी कम है, क्योंकि केवल शहर की ही बात करें तो कई स्कूलों में अकेले ही वाहनों की अच्छीखासी संख्या है। कहा तो यहां तक जाता है कि नागालैंड, बिहार, पंजाब, दिल्ली नंबर की गाड़ियों को स्कूली बसें लगाई गई हैं, जबकि ग्रामीण इलाके में भी बहुत से विद्यालयों के वाहन बिना परमिट के ही दौड़ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों से संबद्ध वाहनों का परिवहन विभाग से परमिट लेना जरूरी है, मगर यहां तो ज्यादातर स्कूलों में बिना परमिट ही गाड़ियों को दौड़ाया जा रहा है। इन वाहनों में सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं रहता। नियमानुसार प्रत्येक वर्ष इन वैन का फिटनेस होना है, लेकिन कई वाहन तो लंबे समय तक फिटनेस प्रमाण पत्र लिए बगैर ही दौड़ रहे हैं। स्कूल प्रशासन वाहनों की फिटनेस पर कोई ध्यान नहीं देता। कई स्कूल में टाटा मैजिक और छोटे वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंस कर बैठा दिया जाता है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चे जान जोखिम में डाल कर सफर तय करते हैं।
विज्ञापन
जनपद में 90 सीबीएसई, 641 माध्यमिक विद्यालय हैं। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक जनपद में 700 वाहन पंजीकृत हैं, जिसमें 150 स्कूल वैन भी शामिल हैं। जबकि हकीकत में यह संख्या काफी कम है, क्योंकि केवल शहर की ही बात करें तो कई स्कूलों में अकेले ही वाहनों की अच्छीखासी संख्या है। कहा तो यहां तक जाता है कि नागालैंड, बिहार, पंजाब, दिल्ली नंबर की गाड़ियों को स्कूली बसें लगाई गई हैं, जबकि ग्रामीण इलाके में भी बहुत से विद्यालयों के वाहन बिना परमिट के ही दौड़ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों से संबद्ध वाहनों का परिवहन विभाग से परमिट लेना जरूरी है, मगर यहां तो ज्यादातर स्कूलों में बिना परमिट ही गाड़ियों को दौड़ाया जा रहा है। इन वाहनों में सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं रहता। नियमानुसार प्रत्येक वर्ष इन वैन का फिटनेस होना है, लेकिन कई वाहन तो लंबे समय तक फिटनेस प्रमाण पत्र लिए बगैर ही दौड़ रहे हैं। स्कूल प्रशासन वाहनों की फिटनेस पर कोई ध्यान नहीं देता। कई स्कूल में टाटा मैजिक और छोटे वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंस कर बैठा दिया जाता है। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चे जान जोखिम में डाल कर सफर तय करते हैं।
विज्ञापन