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Jaunpur News: डायलिसिस कराना है तो दो से ढाई महीने का करना होगा इंतजार
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जौनपुर। जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में बेड का अभाव है। इस कारण मरीजों को दो-दो महीने तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। यही नहीं इमरजेंसी वाले मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में महज 15 बेड हैं। इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है। आलम यह है कि एक मरीज की डायलिसिस बेड के अभाव के कारण लगातार नहीं हो पाती। बल्कि एक-एक दिन के अंतराल पर की जाती है। वहीं किसी को डायलिसिस करानी हो तो उसे कम से कम दो से ढाई महीने का इंतजार करना होगा। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, 90 मरीजों का इलाज नियमित रूप से चल रहा है। अभी 104 मरीज प्रतीक्षा में हैं। मरीजों के परिजन नंबर लगाने के लिए हर दिन जिला अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल में पहले दस बेड पर ही डायलिसिस होती थी। करीब एक साल पहले पांच बेड बढ़ा दिया गया है। इसके बाद भी मरीजों का समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है।
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रोस्टर के हिसाब से की जा रही है डायलिसिस
जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर के प्रबंधक मनीष यादव ने बताया कि डायलिसिस के लिए रोस्टर बनाकर मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ मरीजों का सोमवार, बुधवार और शुक्रवार तो कुछ की मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार को डायलिसिस की जा रही है। सभी मरीजों के तिथि तय की गई है। किसी भी मरीज का नंबर रोका नहीं जा सकता है। एक रुपये की पर्ची पर होती है डायलिसिस
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जिला अस्पताल में पंजीकृत मरीजों को एक रुपये की पर्ची पर डायलिसिस की सुविधा दी जाती है। वहीं निजी केंद्रों पर डायलिसिस के लिए एक हजार से 25 सौ रुपये देना पड़ता है। जिला अस्पताल में शुल्क कम होने के कारण मरीजों की भीड़ अधिक रहती है। लेकिन बेड कम होने के कारण सभी को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
केस स्टडी
केस एक
नगर के किला रोड निवासी मोहम्मद (42) ने जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए नंबर लगाया था। लेकिन डेढ़ माह बाद का नंबर मिल रहा था। मजबूरी में निजी अस्पताल में करा रहे हैं।
केस दो
बनकट निवासी रामराज (58) को डायलिसिस की जरूरत थी। जिला अस्पताल आए थे। लेकिन उन्हें यह कह कर टाल दिया गया कि एक माह बाद नंबर लगेगा। वह निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
डायलिसिस केंद्र का संचालन निजी हाथों में है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए बेड की संख्या बढ़ाने के लिए काफी कहने पर 5 बेड बढ़ाए गए। बेड बढ़ाने के लिए संस्था को पत्र लिखा है। - केके राय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट में महज 15 बेड हैं। इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है। आलम यह है कि एक मरीज की डायलिसिस बेड के अभाव के कारण लगातार नहीं हो पाती। बल्कि एक-एक दिन के अंतराल पर की जाती है। वहीं किसी को डायलिसिस करानी हो तो उसे कम से कम दो से ढाई महीने का इंतजार करना होगा। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, 90 मरीजों का इलाज नियमित रूप से चल रहा है। अभी 104 मरीज प्रतीक्षा में हैं। मरीजों के परिजन नंबर लगाने के लिए हर दिन जिला अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। अस्पताल में पहले दस बेड पर ही डायलिसिस होती थी। करीब एक साल पहले पांच बेड बढ़ा दिया गया है। इसके बाद भी मरीजों का समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है।
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रोस्टर के हिसाब से की जा रही है डायलिसिस
जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर के प्रबंधक मनीष यादव ने बताया कि डायलिसिस के लिए रोस्टर बनाकर मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ मरीजों का सोमवार, बुधवार और शुक्रवार तो कुछ की मंगलवार, बृहस्पतिवार और शनिवार को डायलिसिस की जा रही है। सभी मरीजों के तिथि तय की गई है। किसी भी मरीज का नंबर रोका नहीं जा सकता है। एक रुपये की पर्ची पर होती है डायलिसिस
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जिला अस्पताल में पंजीकृत मरीजों को एक रुपये की पर्ची पर डायलिसिस की सुविधा दी जाती है। वहीं निजी केंद्रों पर डायलिसिस के लिए एक हजार से 25 सौ रुपये देना पड़ता है। जिला अस्पताल में शुल्क कम होने के कारण मरीजों की भीड़ अधिक रहती है। लेकिन बेड कम होने के कारण सभी को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
केस स्टडी
केस एक
नगर के किला रोड निवासी मोहम्मद (42) ने जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए नंबर लगाया था। लेकिन डेढ़ माह बाद का नंबर मिल रहा था। मजबूरी में निजी अस्पताल में करा रहे हैं।
केस दो
बनकट निवासी रामराज (58) को डायलिसिस की जरूरत थी। जिला अस्पताल आए थे। लेकिन उन्हें यह कह कर टाल दिया गया कि एक माह बाद नंबर लगेगा। वह निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।
डायलिसिस केंद्र का संचालन निजी हाथों में है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए बेड की संख्या बढ़ाने के लिए काफी कहने पर 5 बेड बढ़ाए गए। बेड बढ़ाने के लिए संस्था को पत्र लिखा है। - केके राय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल