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बिना काम किए खाते में आ गया मनरेगा का पैसा
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बक्शा विकास खंड के गोरियापुर गांव निवासी श्याम बहादुर यादव ने मनरेगा में अनियमितता का आरोप लगाते हुए ब्लॉक प्रमुख को शिकायती पत्र देकर जांच की मांग की है।
ब्लॉक प्रमुख को दिए शिकायती पत्र में उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने कभी भी मनरेगा में काम नहीं किया है। इसके बावजूद उनके खाते में मनरेगा मजदूरी के नाम पर 5,916 रुपये भेज दिए गए हैं। उन्होंने पत्र में बताया है कि उन्हें इसकी जानकारी तब हुई जब ब्लॉक कार्यालय में प्राइवेट कंप्यूटर आपरेटर के तौर पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने आकर उन्हें बताया कि मनरेगा के तहत उनके खाते में 5,916 रुपये भेजे गए हैं। आरोप है कि आपरेटर ने उनसे यह भी कहा कि 916 रुपये रख लीजिए और 5 हजार रुपये निकालकर वापस कर दीजिए। उसे अधिकारी को देना है। एक बार भरोसा कायम हो गया तो खाते में बहुत पैसा आएगा। उन्होंने बैंक में जाकर खाता चेक किया तो वास्तव में पैसा आया था। श्याम बहादुर ने शिकायती पत्र में कहा है कि इस बात से मनरेगा में अनियमितता का अंदेशा होने पर उन्होंने मनरेगा की वेबसाइट पर गोरियापुर ग्राम पंचायत में काम करने वालों के बारे में जानकारी की तो सकते में आ गए। मनरेगा में काम करने वाले जॉब कार्ड धारकों में नाबालिग, बीमार और ऐसे बुजुर्गों के नाम हैं जो ठीक से चल भी नहीं सकते। श्याम बहादुर ने गलत तरीके से खाते में आए रुपये चेक के माध्यम से वापस करने को भी कहा है। इस संबंध में बक्शा के ब्लॉक प्रमुख मनोज यादव का कहना है कि गोरियापुर ग्राम पंचायत के अलावा मखदूमपुर और कुछ अन्य गांवों में भी अनियमितता की शिकायत मिली है। जांच कर कार्रवाई का निर्देश बीडीओ को दिया गया है। इस संबंध में डीसी मनरेगा भूपेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसे किसी प्रकरण की जानकारी नहीं है। शिकायत मिली तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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ब्लॉक प्रमुख को दिए शिकायती पत्र में उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने कभी भी मनरेगा में काम नहीं किया है। इसके बावजूद उनके खाते में मनरेगा मजदूरी के नाम पर 5,916 रुपये भेज दिए गए हैं। उन्होंने पत्र में बताया है कि उन्हें इसकी जानकारी तब हुई जब ब्लॉक कार्यालय में प्राइवेट कंप्यूटर आपरेटर के तौर पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने आकर उन्हें बताया कि मनरेगा के तहत उनके खाते में 5,916 रुपये भेजे गए हैं। आरोप है कि आपरेटर ने उनसे यह भी कहा कि 916 रुपये रख लीजिए और 5 हजार रुपये निकालकर वापस कर दीजिए। उसे अधिकारी को देना है। एक बार भरोसा कायम हो गया तो खाते में बहुत पैसा आएगा। उन्होंने बैंक में जाकर खाता चेक किया तो वास्तव में पैसा आया था। श्याम बहादुर ने शिकायती पत्र में कहा है कि इस बात से मनरेगा में अनियमितता का अंदेशा होने पर उन्होंने मनरेगा की वेबसाइट पर गोरियापुर ग्राम पंचायत में काम करने वालों के बारे में जानकारी की तो सकते में आ गए। मनरेगा में काम करने वाले जॉब कार्ड धारकों में नाबालिग, बीमार और ऐसे बुजुर्गों के नाम हैं जो ठीक से चल भी नहीं सकते। श्याम बहादुर ने गलत तरीके से खाते में आए रुपये चेक के माध्यम से वापस करने को भी कहा है। इस संबंध में बक्शा के ब्लॉक प्रमुख मनोज यादव का कहना है कि गोरियापुर ग्राम पंचायत के अलावा मखदूमपुर और कुछ अन्य गांवों में भी अनियमितता की शिकायत मिली है। जांच कर कार्रवाई का निर्देश बीडीओ को दिया गया है। इस संबंध में डीसी मनरेगा भूपेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसे किसी प्रकरण की जानकारी नहीं है। शिकायत मिली तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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