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कोविड टीकाकरण के साथ चल रहा मिशन इंद्र धनुष और पल्स पोलिया अभियान
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जौनपुर। महामारी के दौरान कोविड-19 टीकाकरण से कई लोगों की जान बच गई। लेकिन बार-बार लौटकर आ रही कोविड लहर लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ। टीका लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। पहले लहर में जहां लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे थे, वहीं तीसरी लहर के दौरान लोग बेफिक्र होकर घूमते नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो म्यूटेशन के चलते बदलाव के कारण कोरोना को कोई वैरियंट कम तो कोई अधिक घातक साबित हो रहा है। पहली लहर में संक्रमण कम था लेकिन दूसरी लहर सबसे खतरनाक साबित हुआ। तीसरी लहर में कोई खास असर नहीं दिखा। कोरोना का संक्रमण वैरियंट के स्वभाव पर निर्भर करता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो अब तक करीब 6831202 डोज टीका लगा दिया गया है। टीक लगने के कारण जहां लोगों की जान बच गई। वहीं, कुल बीमार लोगों को बीमारी से निजात भी मिल गई है। इसके पीछे रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना माना जा रहा है। कोविड टीकाकरण के साथ ही सघन पल्स पोलियो अभियान और मिशन इंद्र धनुष भी चल रहा है। कोविड टीकाकरण के कारण दूसरे अभियान प्रभावित नहीं हो रहे हैं। इंद्रधनुष मुहिम के तहत गर्भवती महिलाओं और बच्चों के बचाव के लिए टीका लगाया जा रहा है। पोलियो टीकाकरण अभियान पर इसका कोई असर नहीं है।
मिशन इंद्र धनुष में गर्भवती टीका लगने से टिटनेस, गलाघोंटू, कालीखांसी, वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया, दस्त रोग (डायरिया), हेपेटाइटिस, टीबी, पोलियो, चेचक (खसरा), रुबेला, जापानी मस्तिष्क ज्वर से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित करता है। जिले में 426 टीमें बनाई गई। 426 एएनएम, 3099 आशा तथा 3090 आंगनबाड़ी की ड्यूटी लगाई गई। 168 विभागीय पर्यवेक्षक ने निगरानी की। सात दिनों में 2982 टीकाकरण सत्र में टीकाकरण से वंचित 17,640 बच्चे तथा 6,723 गर्भवती को टीका लगाया गया। - डा. नरेंद्र कुमार सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
कोविड टीकाकरण के चलते सघन पल्स पोलियो अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा है। इसके लिए, छह जिला नोडल अधिकारी नामित किए गए थे। 21 से 25 मार्च तक जनपद में कुल 1241 टीमें बनाई गई थीं। जिन घरों के बच्चे बाहर गए होंगे, उन घरों पर बी टीम 28 मार्च को पल्स पोलियो अभियान चलाया। जनपद में पांच वर्ष तक के कुल 6,72,209 बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्य था। पोलियो टीमें 7,37,996 परिवारों का भ्रमण कर पांच वर्ष के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। - डा. राजीव कुमार यादव, एसीएमओ
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मिशन इंद्र धनुष में गर्भवती टीका लगने से टिटनेस, गलाघोंटू, कालीखांसी, वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया, दस्त रोग (डायरिया), हेपेटाइटिस, टीबी, पोलियो, चेचक (खसरा), रुबेला, जापानी मस्तिष्क ज्वर से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित करता है। जिले में 426 टीमें बनाई गई। 426 एएनएम, 3099 आशा तथा 3090 आंगनबाड़ी की ड्यूटी लगाई गई। 168 विभागीय पर्यवेक्षक ने निगरानी की। सात दिनों में 2982 टीकाकरण सत्र में टीकाकरण से वंचित 17,640 बच्चे तथा 6,723 गर्भवती को टीका लगाया गया। - डा. नरेंद्र कुमार सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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कोविड टीकाकरण के चलते सघन पल्स पोलियो अभियान पर कोई असर नहीं पड़ा है। इसके लिए, छह जिला नोडल अधिकारी नामित किए गए थे। 21 से 25 मार्च तक जनपद में कुल 1241 टीमें बनाई गई थीं। जिन घरों के बच्चे बाहर गए होंगे, उन घरों पर बी टीम 28 मार्च को पल्स पोलियो अभियान चलाया। जनपद में पांच वर्ष तक के कुल 6,72,209 बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्य था। पोलियो टीमें 7,37,996 परिवारों का भ्रमण कर पांच वर्ष के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। - डा. राजीव कुमार यादव, एसीएमओ
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