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महिलाओं के लिए मुफीद रही मड़ियाहूं की सीट
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जौनपुर। मडि़याहूं विधानसभा क्षेत्र की सियासत शुरू से ही महिलाओं के लिए मुफीद रही है। इस सीट पर 19 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें छह बार ऐसे मौके आए, जब महिलाएं ही चुनाव जीतीं। इतना ही नहीं, आजादी के बाद जनपद में पहली महिला विधायक तारा देवी भी इसी सीट से चुनी गई थीं। जबकि साल 2012 से लेकर अब तक इस सीट पर महिला विधायक ही प्रतिनिधित्व कर रही है।
साल 1952 से लेकर अब तक 19 बार चुनाव हुए हैं। इसमें 2 बार उप चुनाव हुआ था। चुनावी आंकड़ों पर नजर करें तो इस दौरान छह ऐसे मौके आए, जब इस सीट पर महिला प्रत्याशी ने ही बाजी मारी। इतना ही नहीं, इसी सीट से 1957 के विधानसभा चुनाव में फतह हासिल कर कांग्रेस की तारा देवी ने जिले की पहली महिला विधायक चुने जाने का रुतबा हासिल किया था। उन्होंने दूसरे विधानसभा चुनाव में जनसंघ के उम्मीदवार जगन्नाथ राव को 9989 मतों से हराया था। यहां अब तक कुल 17 बार हुए विधानसभा चुनाव और दो बार उप चुनाव हुए हैं। उप चुनाव में भी एक बार महिला प्रत्याशी ने ही बाजी मारी है।
आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में 1989 और 1993 में सावित्री पटेल ने क्रमश: जनता दल और सपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। यहां से विधायक रहे पारसनाथ यादव के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद 2004 में हुए उपचुनाव में सपा की श्रद्धा यादव विजयी हुईं। इसके बाद, 2012 में एक बार फिर सपा से श्रद्धा यादव ही क्षेत्र की विधायक चुनीं गईं। पिछले चुनाव में अपना दल एस की डा. लीना तिवारी ने पहली ही प्रयास में 58804 मत पाकर विजय हासिल की थीं। जबकि दूसरे स्थान पर रही सपा की सिटिंग विधायक श्रद्धा यादव को 47454 मत मिले थे। ऐसे में महिलाओं के लिए यह सीट काफी मुफीद साबित होती है। इस बार इस सीट से तीन प्रमुख महिलाओं ने दावेदारी की है। इसमें एक पूर्व विधायक और दो निवर्तमान विधायक शामिल हैं।
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साल 1952 से लेकर अब तक 19 बार चुनाव हुए हैं। इसमें 2 बार उप चुनाव हुआ था। चुनावी आंकड़ों पर नजर करें तो इस दौरान छह ऐसे मौके आए, जब इस सीट पर महिला प्रत्याशी ने ही बाजी मारी। इतना ही नहीं, इसी सीट से 1957 के विधानसभा चुनाव में फतह हासिल कर कांग्रेस की तारा देवी ने जिले की पहली महिला विधायक चुने जाने का रुतबा हासिल किया था। उन्होंने दूसरे विधानसभा चुनाव में जनसंघ के उम्मीदवार जगन्नाथ राव को 9989 मतों से हराया था। यहां अब तक कुल 17 बार हुए विधानसभा चुनाव और दो बार उप चुनाव हुए हैं। उप चुनाव में भी एक बार महिला प्रत्याशी ने ही बाजी मारी है।
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आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में 1989 और 1993 में सावित्री पटेल ने क्रमश: जनता दल और सपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। यहां से विधायक रहे पारसनाथ यादव के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद 2004 में हुए उपचुनाव में सपा की श्रद्धा यादव विजयी हुईं। इसके बाद, 2012 में एक बार फिर सपा से श्रद्धा यादव ही क्षेत्र की विधायक चुनीं गईं। पिछले चुनाव में अपना दल एस की डा. लीना तिवारी ने पहली ही प्रयास में 58804 मत पाकर विजय हासिल की थीं। जबकि दूसरे स्थान पर रही सपा की सिटिंग विधायक श्रद्धा यादव को 47454 मत मिले थे। ऐसे में महिलाओं के लिए यह सीट काफी मुफीद साबित होती है। इस बार इस सीट से तीन प्रमुख महिलाओं ने दावेदारी की है। इसमें एक पूर्व विधायक और दो निवर्तमान विधायक शामिल हैं।
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