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संतान की दीर्घायु के लिए रखा निर्जला व्रत
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 24 Sep 2016 01:04 AM IST
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हनुमान घाट पर शुक्रवार को जीवित्पुत्रिका पूजन करतीं व्रती महिलाएं।
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महिलाओं ने शुक्रवार को जीवित्पुत्रिका का निर्जला व्रत रखकर संतान की सलामती और उनके दीर्घायु की कामना की। शाम को विधि विधान से पूजन अर्चन किया। मंदिरों में दोपहर से ही दर्शन पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। महिलाओं ने थाल में प्रसाद लेकर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा की।
पूजा के लिए सुबह से तैयारी चल रही थी। दोपहर बाद पूजा के लिए महिलाएं घर से निकलकर मंदिर और तालाबों पहुंची। जहां विधि विधान से पूजा की। मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका का व्रत रखने से भगवान शंकर और माता पार्वती खुश होते हैं और बच्चों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देते हैं।
वित्पुत्रिका का व्र्रत को लेकर एक दिन पहले से तैयारी चल रही थी। गुरुवार को ही बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ रही। फल और रक्षा की जगह-जगह दुकानें सज गई थी। महिलाओं ने व्र्रत और पूजा के लिए सामान की खरीदारी की। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जीवित्पुत्रिका का त्योहार मनाया गया।
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व्र्रती महिलाओं ने निराजल व्र्रत रखकर शाम को हवन पूजन के लिए शुक्रवार को शाम एक स्थान पर इकट्ठा हुई। फल, प्रसाद, मिष्ठान आदि सिर पर लेकर पूजा स्थल तक गए। पूजा स्थल पर सभी न कहानी सुनाई पूजा के बाद शाम को घर वापस लौट गई।
पूजा में परिवार के सभी लोग सहयोग करते हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जीवित्पुत्रिका मनाया गया। शहर के पालिटेक्निक चौराहा, नईगंज, लाइनबाजार, मछलीशहर पड़ाव, ओलंदगंज, कोतवाली, शाहगंज पड़ाव समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मेला लगा। जहां बच्चों के अलावा महिलाओं ने भी खरीदारी की।
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पूजा के लिए सुबह से तैयारी चल रही थी। दोपहर बाद पूजा के लिए महिलाएं घर से निकलकर मंदिर और तालाबों पहुंची। जहां विधि विधान से पूजा की। मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका का व्रत रखने से भगवान शंकर और माता पार्वती खुश होते हैं और बच्चों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देते हैं।
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वित्पुत्रिका का व्र्रत को लेकर एक दिन पहले से तैयारी चल रही थी। गुरुवार को ही बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ रही। फल और रक्षा की जगह-जगह दुकानें सज गई थी। महिलाओं ने व्र्रत और पूजा के लिए सामान की खरीदारी की। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जीवित्पुत्रिका का त्योहार मनाया गया।
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व्र्रती महिलाओं ने निराजल व्र्रत रखकर शाम को हवन पूजन के लिए शुक्रवार को शाम एक स्थान पर इकट्ठा हुई। फल, प्रसाद, मिष्ठान आदि सिर पर लेकर पूजा स्थल तक गए। पूजा स्थल पर सभी न कहानी सुनाई पूजा के बाद शाम को घर वापस लौट गई।
पूजा में परिवार के सभी लोग सहयोग करते हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक जीवित्पुत्रिका मनाया गया। शहर के पालिटेक्निक चौराहा, नईगंज, लाइनबाजार, मछलीशहर पड़ाव, ओलंदगंज, कोतवाली, शाहगंज पड़ाव समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मेला लगा। जहां बच्चों के अलावा महिलाओं ने भी खरीदारी की।