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Jaunpur News: महलों की जिंदगी छोड़कर राजघराने की राजिका फैशन डिजाइनिंग में कमा रहीं नाम
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जौनपुर। जौनपुर राज घराने की राजिका राजशाही शानोशौकत छोड़ कर फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाकर नाम कमा रही हैं। राजिका थरेजा जौनपुर रियासत के 12वें कुंवर अवनिंद्र दत्त की बड़ी बेटी हैं। जौनपुर और लखनऊ में तमाम संपत्ति होने के बाद भी वे दिल्ली में अपने पति और बच्चों के साथ रहती हैं। राजिका का नाम दिल्ली के मशहूर फैशन डिजाइनरों में गिना जाता है। आज वे अपना खुद का ऑनलाइन स्टोर चलाती हैं।
राजघराने से जुड़े लोगों को अक्सर पिता की संपत्ति का सुख भोगते देखा जाता है। लेकिन राजिका की कहानी थोड़ी अलग है। बता दें कि कुंवर अवनिंद्र दत्त को कोई पुत्र नहीं है, केवल दो पुत्रियां हैं। इनकी संपत्ति की वारिस इनकी दोनों लड़कियां ही हैं। राजिका ने लखनऊ से साल 1992 अपनी बारहवीं की परीक्षा पास की। 1995 में उन्होंने नई दिल्ली के निफ्ट इंस्टीट्यूट से पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली और मुंबई की मशहूर फैशन डिजाइनर रीना ढाका की सहायिका बनीं। तीन साल रीना ढाका की टीम का हिस्स बनने के बाद वे नूरजहां नाम टेक्स्टाइल कंपनी का हिस्सा बनीं। इसके बाद 2007 में नूरजहां कंपनी की क्रिएटिव डायरेक्टर बनीं। इसके बाद कंपनी का नेतृत्व करते हुए देश-विदेश में लगने वाले विभिन्न ट्रेड मेलों में प्रतिभाग किया। 2018 में राजिका ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। राजिका अपना खुद का ऑनलाइन स्टोर चलाती हैं। इसके अलावा लखनऊ में भी इनकी एक बुटिक चलती है।
यादवेंद्र दत्त जौनपुर रियासत के 11वें और अंतिम राजा थे
अवनिंद्र दत्त के पिता जौनपुर के राजा यादवेंद्र दत्त दुबे जौनपुर रियासत के 11वें व अंतिम राजा थे। राजपाठ समाप्त होने के बाद वे राजनीति में आए। जनसंघ व भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उत्तर प्रदेश के आरएसएस के प्रभारी रहे। वे चार बार विधायक व दो बार सांसद चुने गए।
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लखनऊ से ही हुई पढ़ाई
राजिका व उनकी बहन अपराजिता दोनों ही अपनी मां रानी नीता कुंवर के साथ शुरू से ही लखनऊ में रहीं। राजिका की पढ़ाई लिखाई लखनऊ से हुई। उन्होंने दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद दिल्ली से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की। तबसे से दिल्ली ही रह रही हें।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
राजिका के पति रजत थरेजा आर्किटेक्ट हैं। वे दिल्ली में राजिका के साथ व्यवसाय में हाथ बंटाने के साथ ही लखनऊ में बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों का निर्माण कर रहे हैं। राजिका का एक बेटा है जिसका नाम ऋशांक है और वह 12वीं में पढ़ता है।
बच्चे को देती हैं भरपूर समय
राजिका ने बताया कि वो अपने काम और घरेलू जीवन में संतुलन रखती हैं। एक मां होने के साथ ही कामकाजी महिला भी हैं। इसलिए संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनके पति रजत का सहयोग भी उन्हें भरपूर मिलता है। व्यस्तता के बाद भी वो ये सुनिश्चित करती हैं कि उनके बच्चे की सभी जरूरतें पूरी हों, क्योंकि बढ़ते बच्चे को मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता होती है।
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राजघराने से जुड़े लोगों को अक्सर पिता की संपत्ति का सुख भोगते देखा जाता है। लेकिन राजिका की कहानी थोड़ी अलग है। बता दें कि कुंवर अवनिंद्र दत्त को कोई पुत्र नहीं है, केवल दो पुत्रियां हैं। इनकी संपत्ति की वारिस इनकी दोनों लड़कियां ही हैं। राजिका ने लखनऊ से साल 1992 अपनी बारहवीं की परीक्षा पास की। 1995 में उन्होंने नई दिल्ली के निफ्ट इंस्टीट्यूट से पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली और मुंबई की मशहूर फैशन डिजाइनर रीना ढाका की सहायिका बनीं। तीन साल रीना ढाका की टीम का हिस्स बनने के बाद वे नूरजहां नाम टेक्स्टाइल कंपनी का हिस्सा बनीं। इसके बाद 2007 में नूरजहां कंपनी की क्रिएटिव डायरेक्टर बनीं। इसके बाद कंपनी का नेतृत्व करते हुए देश-विदेश में लगने वाले विभिन्न ट्रेड मेलों में प्रतिभाग किया। 2018 में राजिका ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। राजिका अपना खुद का ऑनलाइन स्टोर चलाती हैं। इसके अलावा लखनऊ में भी इनकी एक बुटिक चलती है।
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यादवेंद्र दत्त जौनपुर रियासत के 11वें और अंतिम राजा थे
अवनिंद्र दत्त के पिता जौनपुर के राजा यादवेंद्र दत्त दुबे जौनपुर रियासत के 11वें व अंतिम राजा थे। राजपाठ समाप्त होने के बाद वे राजनीति में आए। जनसंघ व भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उत्तर प्रदेश के आरएसएस के प्रभारी रहे। वे चार बार विधायक व दो बार सांसद चुने गए।
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लखनऊ से ही हुई पढ़ाई
राजिका व उनकी बहन अपराजिता दोनों ही अपनी मां रानी नीता कुंवर के साथ शुरू से ही लखनऊ में रहीं। राजिका की पढ़ाई लिखाई लखनऊ से हुई। उन्होंने दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद दिल्ली से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की। तबसे से दिल्ली ही रह रही हें।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
राजिका के पति रजत थरेजा आर्किटेक्ट हैं। वे दिल्ली में राजिका के साथ व्यवसाय में हाथ बंटाने के साथ ही लखनऊ में बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों का निर्माण कर रहे हैं। राजिका का एक बेटा है जिसका नाम ऋशांक है और वह 12वीं में पढ़ता है।
बच्चे को देती हैं भरपूर समय
राजिका ने बताया कि वो अपने काम और घरेलू जीवन में संतुलन रखती हैं। एक मां होने के साथ ही कामकाजी महिला भी हैं। इसलिए संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनके पति रजत का सहयोग भी उन्हें भरपूर मिलता है। व्यस्तता के बाद भी वो ये सुनिश्चित करती हैं कि उनके बच्चे की सभी जरूरतें पूरी हों, क्योंकि बढ़ते बच्चे को मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता होती है।