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Jaunpur News: अब सेटेलाइट से होगी जमीन की पैमाइश, हर तहसील को मिला 'जीएनएसएस रोवर'
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जौनपुर। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन की अध्यक्षता में भूमि सीमांकन को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जीएनएसएस (ग्लोबल नैविगेशन सेटेलाइट सिस्टम) रोवर के संचालन, उपयोग और सटीक भूमि सीमांकन की नई तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
डीएम ने बताया कि त्रुटिरहित पैमाइश के लिए राजस्व परिषद ने प्रत्येक तहसील को एक-एक रोवर एवं अन्य सहवर्ती उपकरण उपलब्ध कराया गया है। जीएनएसएस रोवर के संचालन के पहले तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार, एक राजस्व निरीक्षक तथा तीन लेखपालों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। तहसीलों में गठित राजस्व कर्मियों की टीम ही जीएनएसएस रोवर का प्रयोग करेगी। जीएनएसएस रोवर का प्रयोग सेटेलाइट से मिले निर्देशांक के माध्यम से किए जाने के कारण एक विशेष बिंदु से अन्य बिंदुओं के मध्य दूरी एवं कोण का सटीक आकलन संभव होगा।
मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अम्बष्ठ ने बताया कि सीमांकन से पहले प्रचलित विधि यथा फीता अथवा जरीब के माध्यम से पैमाइश में प्रायः यह देखने में आता है कि भूमि के उपर-नीचे होने की दशा में एक बिंदु विशेष से अन्य बिंदु के मध्य दूरी का आकलन में त्रुटि हो जाती है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व परमानन्द, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल, कलेक्ट्रेट बार के अध्यक्ष और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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जरीब और फीते के मुकाबले 'रोवर' बेहतर
पुरानी विधि (जरीब/फीता) जमीन के ऊंचे-नीचे या उबड़-खाबड़ होने पर दूरी के आकलन में अक्सर बड़ी मानवीय त्रुटियां (गलतियां) हो जाती हैं।नई विधि (जीएनएसएस रोवर) पूरी तरह सैटेलाइट आधारित होने के कारण इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है। दो बिंदुओं के बीच अधिकतम ±3 सेमी (प्लस-माइनस 3 सेंटीमीटर) का ही अंतर आ सकता है।
नियमों में बदलाव का अधिकार सुरक्षित
कार्यशाला में बताया गया कि इस रोवर तकनीक के इस्तेमाल के दौरान यदि कोई तकनीकी, विधिक (कानूनी) या प्रशासनिक समस्या आती है, तो राज्य सरकार के पास नियमों, शर्तों और प्रक्रियाओं में संशोधन या बदलाव करने का पूरा अधिकार सुरक्षित होगा। मुख्य राजस्व अधिकारी ने कलेक्ट्रेट बार के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं से इस नई पारदर्शी तकनीक को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है।
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डीएम ने बताया कि त्रुटिरहित पैमाइश के लिए राजस्व परिषद ने प्रत्येक तहसील को एक-एक रोवर एवं अन्य सहवर्ती उपकरण उपलब्ध कराया गया है। जीएनएसएस रोवर के संचालन के पहले तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार, एक राजस्व निरीक्षक तथा तीन लेखपालों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। तहसीलों में गठित राजस्व कर्मियों की टीम ही जीएनएसएस रोवर का प्रयोग करेगी। जीएनएसएस रोवर का प्रयोग सेटेलाइट से मिले निर्देशांक के माध्यम से किए जाने के कारण एक विशेष बिंदु से अन्य बिंदुओं के मध्य दूरी एवं कोण का सटीक आकलन संभव होगा।
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मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अम्बष्ठ ने बताया कि सीमांकन से पहले प्रचलित विधि यथा फीता अथवा जरीब के माध्यम से पैमाइश में प्रायः यह देखने में आता है कि भूमि के उपर-नीचे होने की दशा में एक बिंदु विशेष से अन्य बिंदु के मध्य दूरी का आकलन में त्रुटि हो जाती है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व परमानन्द, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल, कलेक्ट्रेट बार के अध्यक्ष और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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जरीब और फीते के मुकाबले 'रोवर' बेहतर
पुरानी विधि (जरीब/फीता) जमीन के ऊंचे-नीचे या उबड़-खाबड़ होने पर दूरी के आकलन में अक्सर बड़ी मानवीय त्रुटियां (गलतियां) हो जाती हैं।नई विधि (जीएनएसएस रोवर) पूरी तरह सैटेलाइट आधारित होने के कारण इसमें गलती की गुंजाइश न के बराबर है। दो बिंदुओं के बीच अधिकतम ±3 सेमी (प्लस-माइनस 3 सेंटीमीटर) का ही अंतर आ सकता है।
नियमों में बदलाव का अधिकार सुरक्षित
कार्यशाला में बताया गया कि इस रोवर तकनीक के इस्तेमाल के दौरान यदि कोई तकनीकी, विधिक (कानूनी) या प्रशासनिक समस्या आती है, तो राज्य सरकार के पास नियमों, शर्तों और प्रक्रियाओं में संशोधन या बदलाव करने का पूरा अधिकार सुरक्षित होगा। मुख्य राजस्व अधिकारी ने कलेक्ट्रेट बार के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं से इस नई पारदर्शी तकनीक को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है।