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कनुवानी : कभी कानून के जानकारों का गांव, अब डाॅक्टरों की धरती बनकर चमक रहा है
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केराकत। कभी कानून के जानकारों के लिए मशहूर रहा जिले का कनुवानी गांव अब डाॅक्टरों के गांव’ के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। शिक्षा की परंपरा में रचा-बसा यह गांव आज चिकित्सा के क्षेत्र में मिसाल बन चुका है। इस गांव के 47 युवक-युवतियां डाॅक्टर बन चुके हैं, जो देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं 14 छात्र वर्तमान में मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीएएमएस और पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं। इससे प्रेरित होकर 56 से ज्यादा छात्र डॉक्टर बनने की तैयारी में जुटे हैं।
शुरुआत एक से, प्रेरणा बन गई परंपरा :-इस प्रेरक परंपरा की शुरुआत डॉ.प्रभु नारायण पाठक से हुई, जो न्यूरो सर्जन बने और झांसी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद डॉ.राममूर्ति पाठक प्रदेश के पशु चिकित्सा महानिदेशक और डा.गोपालनाथ वर्मा में बीएचयू रिसर्च डीन पद पर आसीन रहते हुए इस परंपरा को अब आगे बढ़ा रहे हैं। जिन्होंने वर्ष 2012 में यूएस में रिसर्च के संबंध में कार्य किए हैं जिनका उल्लेख कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ है। इनसे कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बचाव को लेकर बातचीत की थी जिसको टीवी पर साझा किया गया था। इनकी सफलता ने गांव के युवाओं को दिशा दी, और अब कनुवानी से हर साल कोई न कोई युवा सफेद कोट पहनने का सपना साकार कर रहा है। डा.गोपालनाथ वर्मा ने बताया कि नैतिकता आधारित कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है। बच्चे पुरानी पीढि़यों से प्रेरणा लेकर चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। इनको समय-समय पर मदद की जाती है।
सामूहिक प्रयास बना बदलाव की रीढ़ :-गांव के शिक्षित और सेवा भावी नागरिकों ने मिलकर ‘मेरा गांव, मेरा देश’ नाम से एक संस्था बनाई है। यह संस्था हर वर्ष होली और दीपावली पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करती है। “मड़ई से खपरैल तक” नामक पत्रिका प्रकाशित की जाती है, जिसे डॉ.गोपालनाथ वर्मा संपादित करते हैं। मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है। यह संस्था बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि, लक्ष्य के प्रति समर्पण और ग्रामीण युवाओं में आत्मविश्वास पैदा कर रही है।
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ये हैं प्रमुख चिकित्सकों के नाम :-डाॅ.राम कुमार वर्मा जिला चिकित्सालय चंदौली में, डाॅ.सोनी सिंह एमबीबीएस डीजीओ, डाॅ.अनिल कुमार वर्मा एमएस, डाॅ.स्वाति वर्मा एमबीबीएस एमएस गाइनी, डा.अमित वर्मा एमबीबीएस, एमडी, पीएचडी, डॉ.संवेग वर्मा एमबीबीएस एमडी, डाॅ.विवेक त्रिपाठी एमबीबीएस, डाॅ.रवि यादव एमबीबीएस, डॉ.जय प्रकाश वर्मा एमबीबीएस जो फतेहपुर में सेवा दे रहे हैं। इसी डाॅ.प्रशांत कुमार वर्मा एमबीबीएस रेडियोलॉजी, डाॅ.अवनीश कुमार वर्मा एमडी एल, डाॅ.अजय वर्मा, डाॅ.देवनाथ वर्मा, डाॅ.रोजा वर्मा, डाॅ.नीरज चौधरी दिल्ली डाॅ.अवनीश कुमार सरोज एमबीबीएस, प्रोस्थो सर्जन केजीएमयू, डा.सचिन कुमार पटेल जौनपुर मेडिकल कालेज में कार्यरत हैं, साक्षी वर्मा हाल ही में एमबीबीएस में चयनित हुई हैं। पिछले वर्ष डाॅ.ममता फैजाबाद विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि डॉ.ज्योति वर्मा गोरखपुर विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इन परिवारों की उपलब्धि से यह स्पष्ट हो जाता है कि कनुआनी में अब डाक्टर बनना व्यवसाय नहीं, विरासत बन चुका है। अन्य क्षेत्र में भी लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चयनित हुए डाॅक्टर गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित और आर्थिक सहयोग भी करते हैं।
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शुरुआत एक से, प्रेरणा बन गई परंपरा :-इस प्रेरक परंपरा की शुरुआत डॉ.प्रभु नारायण पाठक से हुई, जो न्यूरो सर्जन बने और झांसी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद डॉ.राममूर्ति पाठक प्रदेश के पशु चिकित्सा महानिदेशक और डा.गोपालनाथ वर्मा में बीएचयू रिसर्च डीन पद पर आसीन रहते हुए इस परंपरा को अब आगे बढ़ा रहे हैं। जिन्होंने वर्ष 2012 में यूएस में रिसर्च के संबंध में कार्य किए हैं जिनका उल्लेख कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ है। इनसे कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बचाव को लेकर बातचीत की थी जिसको टीवी पर साझा किया गया था। इनकी सफलता ने गांव के युवाओं को दिशा दी, और अब कनुवानी से हर साल कोई न कोई युवा सफेद कोट पहनने का सपना साकार कर रहा है। डा.गोपालनाथ वर्मा ने बताया कि नैतिकता आधारित कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है। बच्चे पुरानी पीढि़यों से प्रेरणा लेकर चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। इनको समय-समय पर मदद की जाती है।
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सामूहिक प्रयास बना बदलाव की रीढ़ :-गांव के शिक्षित और सेवा भावी नागरिकों ने मिलकर ‘मेरा गांव, मेरा देश’ नाम से एक संस्था बनाई है। यह संस्था हर वर्ष होली और दीपावली पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करती है। “मड़ई से खपरैल तक” नामक पत्रिका प्रकाशित की जाती है, जिसे डॉ.गोपालनाथ वर्मा संपादित करते हैं। मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है। यह संस्था बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि, लक्ष्य के प्रति समर्पण और ग्रामीण युवाओं में आत्मविश्वास पैदा कर रही है।
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ये हैं प्रमुख चिकित्सकों के नाम :-डाॅ.राम कुमार वर्मा जिला चिकित्सालय चंदौली में, डाॅ.सोनी सिंह एमबीबीएस डीजीओ, डाॅ.अनिल कुमार वर्मा एमएस, डाॅ.स्वाति वर्मा एमबीबीएस एमएस गाइनी, डा.अमित वर्मा एमबीबीएस, एमडी, पीएचडी, डॉ.संवेग वर्मा एमबीबीएस एमडी, डाॅ.विवेक त्रिपाठी एमबीबीएस, डाॅ.रवि यादव एमबीबीएस, डॉ.जय प्रकाश वर्मा एमबीबीएस जो फतेहपुर में सेवा दे रहे हैं। इसी डाॅ.प्रशांत कुमार वर्मा एमबीबीएस रेडियोलॉजी, डाॅ.अवनीश कुमार वर्मा एमडी एल, डाॅ.अजय वर्मा, डाॅ.देवनाथ वर्मा, डाॅ.रोजा वर्मा, डाॅ.नीरज चौधरी दिल्ली डाॅ.अवनीश कुमार सरोज एमबीबीएस, प्रोस्थो सर्जन केजीएमयू, डा.सचिन कुमार पटेल जौनपुर मेडिकल कालेज में कार्यरत हैं, साक्षी वर्मा हाल ही में एमबीबीएस में चयनित हुई हैं। पिछले वर्ष डाॅ.ममता फैजाबाद विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि डॉ.ज्योति वर्मा गोरखपुर विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इन परिवारों की उपलब्धि से यह स्पष्ट हो जाता है कि कनुआनी में अब डाक्टर बनना व्यवसाय नहीं, विरासत बन चुका है। अन्य क्षेत्र में भी लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चयनित हुए डाॅक्टर गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित और आर्थिक सहयोग भी करते हैं।