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जौनपुर ः आशनाई में हुई थी वाराणसी के लॉन संचालक की हत्या
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जौनपुर। वाराणसी जिले के पहडि़या निवासी लान संचालक बृजेश कुमार सिंह (42) की हत्या आशनाई में हुई थी। उसकी लाश थानागद्दी चौकी क्षेत्र के सोहनी गांव में मिली थी। हत्या उसके ही नौकर ने अपने दोस्त और जीजा संग मिलकर की थी। पुलिस ने आरोपी नौकर, उसकी बहन, दोस्त और जीजा को गिरफ्तार कर लिया। आईजी रेंज वाराणसी के सत्यनारायण ने पुलिस लाइन में मीडिया को बताया कि वाराणसी के पहडि़या निवासी बृजेश कुमार सिंह उर्फ बबलू का उसके नौकर मनीष पाल की बहन से संबंध था। 20 मार्च की शाम बबलू कार से मनीष की बहन की ससुराल चौबेपुर थाना क्षेत्र के चुनमुनपुर पहुंच गया। आईजी के मुताबिक बृजेश नशे में था और अपना मोबाइल कार में ही भूल गया था। रात आठ बजे शौच के लिए जा रहे गांव के सोनू नामक युवक से मदद मांगी और उसके मोबाइल से कॉल कर अपना फोन खोजा।
इसके बाद उसने फोन कर मनीष की बहन को गांव के बाहर बुलाया तो उसके साथ उसका पति नितिन भी आ गया। इस पर बृजेश हंगामा करने लगा। इस पर बहन ने मनीष को फोन कहा कि तुम्हारा मालिक यहां आकर हंगामा कर रहा है। इससे आग बबूला मनीष अपने दोस्त दीपक चौहान उर्फ दीपू निवासी श्रीनगर कालोनी रमरेपुर (पहडि़या) थाना सारनाथ के साथ चुनमुनपुर गांव पहुंचा। दोनों में विवाद हो गया और मारपीट होने लगी इसी दौरान मनीष ने रॉड से वार कर दिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर ईंट-पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसी की कार से शव को जौनपुर के थानागद्दी क्षेत्र के सोहनी गांव में फेंक दिया। मनीष ने यहां भी उस पर ईंट से कई वार किये। पहचान छुपाने के लिए उसकी जींस की पैंट में आग लगा दी। फिर गाड़ी से लौट आए और चौबेपुर थाना क्षेत्र में हाइवे के किनारे खुटहना में कार को जला दिया। पुलिस के मुताबिक यह सब करने में आरोपियों को 34 मिनट लगे थे। आईजी रेंज ने कहा कि 14 घंटे के अंदर हत्याकांड के अनावरण पर केराकत कोतवाली और एसओजी टीम को 20 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा एएसपी सिटी डॉक्टर संजय कुमार और सीओ केराकत शुभम तोड़ी को इस कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।
सोनू के पकड़े जाने पर सामने आई पूरी कहानी
पुलिस ने बृजेश के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया और सीडीआर की जांच की तो पता चला कि बृजेश फोन पर आखिरी कॉल सोनू की थी। सोनू ने पुलिस को बताया कि घटना के ठीक पहले वह शौच के लिए गया था, बृजेश का मोबाइल उसकी कार में ही गिरा था। उसने मुझ से मदद मांगी और मेरा फोन लेकर अपने नंबर पर काल किया था। जांच के दौरान ही उसने नितिन के बारे में बताया। पुलिस ने उसे पकड़ा तो पूरी कहानी सामने आ गई।
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चौबेपुर में उपली रखकर जला दी थी कार
एएसपी सिटी डा. संजय कुमार के मुताबिक मनीष और दीपू शव लेकर कार से जौनपुर के लिए निकले थे, जबकि मनीष का जीजा नितिन रुक गया और उसने चौबेपुर थाना क्षेत्र में हाइवे के किनारे खुटहना में ऊपलों का ढेर रखकर कार को जलाने का इंतजाम किया था।
लॉन में हुई थी मनीष की बहन से बृजेश की मुलाकात
एएसपी सिटी के मुताबिक मनीष की बहन अपने भाई के साथ कई बार लॉन में गई थी। जहां उसकी मुलाकात बृजेश से हुई थी। मनीष के लेट होने पर वह बृजेश को फोन करती थी। धीरे-धीरे दोनों में नजदीकियां बढ़ गई। मनीष को दोनों के संबंध का शक हो गया था। लेकिन मालिक होने और उसकी मनबढ़ई से वह कुछ नहीं कह पाता था। उधर, नशे में बृजेश अक्सर उसकी बहन के घर पहुंच जाता था और कई बार हंगामा भी किया।
घरवालों के साथ हर जगह था मनीष
मनीष ने बताया कि बृजेश के छोटे भाई कमलेश ने उसे फोन किया था, लेकिन, उसने उनसे झूठ बोला। अगले दिन शव मिलने पर घरवालों के साथ थानागद्दी चौकी, केराकत कोतवाली और मर्चरी हाउस भी आया। घरवालों की तरह वह बीच-बीच में रो भी रहा था, ताकि उस पर कोई शक करे। उसने कहा उसका मालिक को मारने का इरादा नहीं था, लेकिन वह समझ नहीं रहे थे तो गुस्से में आकर यह कदम उठ गया।
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इसके बाद उसने फोन कर मनीष की बहन को गांव के बाहर बुलाया तो उसके साथ उसका पति नितिन भी आ गया। इस पर बृजेश हंगामा करने लगा। इस पर बहन ने मनीष को फोन कहा कि तुम्हारा मालिक यहां आकर हंगामा कर रहा है। इससे आग बबूला मनीष अपने दोस्त दीपक चौहान उर्फ दीपू निवासी श्रीनगर कालोनी रमरेपुर (पहडि़या) थाना सारनाथ के साथ चुनमुनपुर गांव पहुंचा। दोनों में विवाद हो गया और मारपीट होने लगी इसी दौरान मनीष ने रॉड से वार कर दिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर ईंट-पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसी की कार से शव को जौनपुर के थानागद्दी क्षेत्र के सोहनी गांव में फेंक दिया। मनीष ने यहां भी उस पर ईंट से कई वार किये। पहचान छुपाने के लिए उसकी जींस की पैंट में आग लगा दी। फिर गाड़ी से लौट आए और चौबेपुर थाना क्षेत्र में हाइवे के किनारे खुटहना में कार को जला दिया। पुलिस के मुताबिक यह सब करने में आरोपियों को 34 मिनट लगे थे। आईजी रेंज ने कहा कि 14 घंटे के अंदर हत्याकांड के अनावरण पर केराकत कोतवाली और एसओजी टीम को 20 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा एएसपी सिटी डॉक्टर संजय कुमार और सीओ केराकत शुभम तोड़ी को इस कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।
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सोनू के पकड़े जाने पर सामने आई पूरी कहानी
पुलिस ने बृजेश के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया और सीडीआर की जांच की तो पता चला कि बृजेश फोन पर आखिरी कॉल सोनू की थी। सोनू ने पुलिस को बताया कि घटना के ठीक पहले वह शौच के लिए गया था, बृजेश का मोबाइल उसकी कार में ही गिरा था। उसने मुझ से मदद मांगी और मेरा फोन लेकर अपने नंबर पर काल किया था। जांच के दौरान ही उसने नितिन के बारे में बताया। पुलिस ने उसे पकड़ा तो पूरी कहानी सामने आ गई।
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चौबेपुर में उपली रखकर जला दी थी कार
एएसपी सिटी डा. संजय कुमार के मुताबिक मनीष और दीपू शव लेकर कार से जौनपुर के लिए निकले थे, जबकि मनीष का जीजा नितिन रुक गया और उसने चौबेपुर थाना क्षेत्र में हाइवे के किनारे खुटहना में ऊपलों का ढेर रखकर कार को जलाने का इंतजाम किया था।
लॉन में हुई थी मनीष की बहन से बृजेश की मुलाकात
एएसपी सिटी के मुताबिक मनीष की बहन अपने भाई के साथ कई बार लॉन में गई थी। जहां उसकी मुलाकात बृजेश से हुई थी। मनीष के लेट होने पर वह बृजेश को फोन करती थी। धीरे-धीरे दोनों में नजदीकियां बढ़ गई। मनीष को दोनों के संबंध का शक हो गया था। लेकिन मालिक होने और उसकी मनबढ़ई से वह कुछ नहीं कह पाता था। उधर, नशे में बृजेश अक्सर उसकी बहन के घर पहुंच जाता था और कई बार हंगामा भी किया।
घरवालों के साथ हर जगह था मनीष
मनीष ने बताया कि बृजेश के छोटे भाई कमलेश ने उसे फोन किया था, लेकिन, उसने उनसे झूठ बोला। अगले दिन शव मिलने पर घरवालों के साथ थानागद्दी चौकी, केराकत कोतवाली और मर्चरी हाउस भी आया। घरवालों की तरह वह बीच-बीच में रो भी रहा था, ताकि उस पर कोई शक करे। उसने कहा उसका मालिक को मारने का इरादा नहीं था, लेकिन वह समझ नहीं रहे थे तो गुस्से में आकर यह कदम उठ गया।