जौनपुर। बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार चंचल सिंह का मानना है कि भविष्य का भारत सशक्त गांवों का देश होगा। शहर टूटेंगे और गांव मजबूत होंगे। कोरोना ने हमारे जीवन शैली और सामाजिक ढांचे को काफी हद तक प्रभावित किया है, जिसका असर शहरों से पलायन के रुप में सामने है। शहरों में विकल्प खत्म हो रहे हैं, जबकि स्वच्छ और सुंदर वातावरण से परिपूर्ण गांवों में अवसर की प्रचूरता है। यहां ऑक्सीजन और हरियाली मुफ्त है, जिसकी तलाश में लोग शहर से गांवों की ओर भागने लगे हैं। शहर बस लूट का हिस्सा बनकर रह गए थे, जिससे अब लोगों का मोहभंग हो रहा है।
लॉक डाउन के बाद से अपने गांव पूरा लाल ढेमा में रहकर चंचल सिंह लगातार लेखन में तल्लीन हैं। वह चित्रकारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर लगातार लिख रहे हैं। लेखन का केंद्र बिंदू सड़क है। कहीं सड़कों पर शहरों से पलायन मजदूरों की बेबसी का जिक्र है तो कहीं भूख-प्यास से तड़पते मजदूरों और उनके बच्चों की पीड़ा पर तल्ख टिप्पणी कर रहे हैं। चित्रों के जरिए भी उनके दर्द को उकेरने की कोशिश जारी है। इसके अलावा वह पं. हजारी प्रसाद द्विवेदी, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जैसे साहित्यकारों व बड़े नेताओं के साथ अपने संस्मकरण पर आधारित किताब भी लिख रहे हैं। मौजूदा हालात पर उनका कहना है कि शहरों से मजदूरों का पलायन ऐसे ही नहीं है। शहर लूट का हिस्सा बन गए थे। इनका टूटना तय है। वहीं गांव अब सशक्त होंगे। गांव में रौनक लौटेगी। पहले गांवों मुद्रा का अभाव था तो विनिमय प्रणाली लागू थी। अनाज आदि वस्तुओं का आदान-प्रदान होता था। मुद्रा की चाह में गांवों से लोग शहरों की ओर भागे और लूट तंत्र में खो गए। अब वह फिर से गांवों में लौट रहे हैं। देश की खुशहाली के लिए गांवों को खुशहाली जरुरी है। यह हालात तभी बदलेंगे, जब गांधी जी के विचारों पर अमल किया जाएगा। छोटे और कुटीर इकाइयों को पुर्नजीवित करना होगा।