आईआईटी बीएचयू: दो साल में 250 खोजों का मांगा स्वामित्व अधिकार, तकनीक ट्रांसफर एक भी नहीं
आईआईटी बीएचयू ने दो साल में 250 खोजों का स्वामित्व अधिकार मांगा, लेकिन एक भी तकनीक ट्रांसफर नहीं हो सकी। यहां पिछले 13 साल में जितने पेटेंट दाखिल किए गए हैं, उनमें से आधे को ही स्वीकृति मिली है।
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आईआईटी बीएचयू में दो साल यानी 2025 और 2026 में करीब 250 खोजें और रिसर्च के स्वामित्व अधिकार मांगे गए, लेकिन इस बीच एक भी तकनीक ट्रांसफर नहीं हो सकी। 2024 में तीन तकनीक ट्रांसफर होने के बाद इन दो साल का आंकड़ा जीरो है। हालांकि, इन दो साल में संस्थान के 153 खोजों को पेटेंट मिला है, जबकि 254 पेटेंट प्रकाशित हुए।
आईअी से आईआईटी बनने के बाद 2014 से 13 वर्षों में 12 तकनीक ट्रांसफर की जा चुकी है। सिर्फ पांच ही ऐसे साल हैं जब-जब तकनीक ट्रांसफर की गई। 2014 से लेकर 2020 तक सात साल में 201 दाखिल हुए लेकिन ग्रांट सिर्फ तीन ही हो सके।
आईआईटी बीएचयू में पिछले 13 साल में जितने पेटेंट दाखिल किए गए हैं, उनमें से आधे को ही स्वीकृति मिली है। 620 पेटेंट दाखिल और 572 प्रकाशित है। 336 पेटेंट को स्वीकृतियां दी गईं हैं। आईआईटी बीएचयू की ओर से वेबसाइट पर जारी सूची के अनुसार, ये आंकड़े इस साल सात जुलाई तक के हैं।
लैब का आविष्कार जमीन तक पहुंचाने का लाइसेंस
संस्थान के आईपीआर सेल और डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट की ओर से तकनीक ट्रांसफर करने की प्रक्रिया कराई जाती है। संस्थान में विकसित होने वाली तकनीक जब सरकार या बाजार के माध्यम से आम लोगों के पास पहुंचती है तो पूरी प्रक्रिया तकनीक ट्रांसफर कही जाती है। प्रयोगशाला में हुई रिसर्च या आविष्कार किसी कंपनी या सरकार को बेचने के लिए लाइसेंस दिया जाता है और उसका बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाता है।
वर्ष 2014 से 2018 तक संस्थान के किसी खोज को पेटेंट नहीं मिला था। हालांकि 2017, 2019 और 2022 में एक-एक, 2023 में दो और 2024 में तीन तकनीक ट्रांसफर हुई थी। दूसरी ओर भारत सरकार ने 2019 में तीन, 2021 में दो, 2022 में 40, 2023 में 47, 2024 में 91, 2025 में 74 और 2026 में 79 खोजों को पेटेंट की स्वीकृति दी। सबसे ज्यादा 162 पेटेंट साल 2025 में फाइल किए गए।