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सरकारी केंद्रों पर कैसे पहुंचें गर्भवती, जब आंगनबाड़ी कार्यकत्री और दाई करा रहीं प्रसव

Wed, 23 Dec 2020 11:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Dec 2020 11:44 PM IST
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How to reach pregnant at government centers, when Anganwadi workers and midwives are having childbirth
अस्पताल ने भर्ती नहीं किया, आंगनबाड़ी ने कराया प्रसव
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- सीएचसी सोंधी में चार माह के प्रसव के सत्यापन में उजागर हुई लापरवाही
- जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारी के निलंबन की संस्तुति
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। जिले में डाक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते जननी सुरक्षा योजना बदहाल है। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव की व्यवस्था ठीक न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बहकाकर निजी नर्सिंग होम लेकर चली जाती है। संस्थागत प्रसव की घटती संख्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने शाहगंज के सोंधी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में की जांच कराई तो पता चला कि डाक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को भर्ती ही नहीं किया। उसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या अप्रशिक्षित दाईयों ने प्रसव कराए। डीएम ने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के निलंबन की संस्तुति की है।
पिछले दिनों समीक्षा बैठक में सरकारी केंद्रों पर कम प्रसव होने की बात सामने आई थी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने आशाओं के स्तर पर लापरवाही बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए अगस्त से नवंबर तक हुए प्रसव कराने वाली सभी महिलाओं के घर-घर टीम भेजकर सत्यापन कराने का आदेस दिया। प्रसूता और उनके परिवार के लोगों से यह जानकारी ली गई कि किन कारणों से उन्होंने सरकारी केंद्रों पर प्रसव नहीं कराया। सोंधी सीएचसी में चार माह में 38 महिलाओं का पंजीकरण कराया गया था। इसमें ज्यादातर प्रसव शाहगंज, खेेतासराय और जौनपुर के निजी नर्सिंग होम या अपंजीकृत प्रसव केंद्रों पर कराए गए। कई मामले में जन्म लेते ही नवजात की मौत हो गई। कुछ महिलाओं ने बताया कि सीएचसी पर डॉक्टर और स्टाफ नर्स ने भर्ती ही नहीं किया। इसके चलते उन्हें निजी नर्सिंग होम की शरण लेनी पड़ी।
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जांच में खुली बात
लपरी के मो. सद्दाम की पत्नी रुकइया का नवंबर में कोइरीडीहा गांव में आंगनबाड़ी कार्यकत्री उर्मिला ने प्रसव कराया। सुरक्षित प्रसव न होने से नवजात की जन्म के समय ही मृत्यु हो गई। उर्मिला ने ही अक्तूबर में मुड़ेला की सविता का भी प्रसव कराया। मुड़ेला के सुरेंद्र की पत्नी अंगनी का प्रसव 24 अगस्त को जपटापुर में हुआ। प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे लपरी के स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन एएनएम ने डिलीवरी कराने से इंकार कर दिया। बाद में निजी केंद्र पर डिलीवरी हुई, जिसमें बच्चे की मौत हो गई। यूनिसपुर के अदनान की पत्नी नसरीन को छह अगस्त को खेतासराय के एक नर्सिंग होम में प्रसव हुआ। परिजन पहले सीएचसी सोंधी ले गए, लेकिन वहां तैनात डॉक्टर फिदौसिया ने भर्ती लेने से इंकार कर दिया। मजबूरन गर्भवती को निजी केंद्र पर ले जाना पड़ा।
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स्वास्थ्य केंद्रों पर कम प्रसव की शिकायत के बाद सत्यापन कराया गया। इसमें सोंधी सीएचसी पर काफी गड़बड़ी मिली है। अपंजीकृत केंद्रों पर प्रसव कराने वालों पर सीएमओ को एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया है जबकि प्रभारी चिकित्साधिकारी के निलंबन की संस्तुति की गई है।-दिनेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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