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Jaunpur News: ग्रीन जोन केवल कागजों पर, धड़ल्ले से हो रहा नदी किनारे निर्माण

Sat, 29 Mar 2025 12:46 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:46 AM IST
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Green zone is only on paper, construction is going on indiscriminately along the river
जौनपुर। जिले में गोमती नदी के दोनों किनारे 100 मीटर तक ग्रीन जोन बनाया गया है। हालांकि यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। नदी के किनारे से 20 से 25 मीटर की दूरी पर ही धड़ल्ले से निर्माण हो रहे हैं और जिम्मेदार मौन हैं। कोई निगरानी नक्शा विभाग नहीं करता। नतीजन नदी के किनारे सैकड़ों निर्माण हो गए। सरकार हरियाली बढ़ाने और उसे बचाने के लिए जहां प्रयासरत है। वहीं जिला प्रशासन और मास्टर प्लाननिंग के जिम्मेदार इसे लेकर लापरवाह बने हैं। यही वजह है कि जिम्मेदारों की नाक के नीचे शहर के ग्रीन बेल्ट से हरियाली का नामोनिशान मिटाकर बड़ी-बड़ी इमारतें, अस्पताल, दुकान और रेस्टोरेंट खड़े कर रहे हैं। प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि ग्रीन जोन में बिना नक्शा पास कराये अवैध तरीके से ही निर्माण हो रहे हैं।
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कलीचाबाद क्षेत्र में हुए कई अवैध निर्माण- गोमती नदी के दाई ओर कलीचाबाद क्षेत्र का कुछ ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित है। इस क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं होना है। लेकिन यहां बिना नक्शा पास कराए कई बड़े भवनों का निर्माण कराया गया है। कहीं अस्पताल चल रहे हैं तो कहीं दुकान है।
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वाजिदपुर से जेसीज चौराहे के पहले झील में भी हुए निर्माण-नदी किनारे तो छोड़िए वाजिदपुर तिराहे से लेकर जेसीज चौराहे के बीच कभी झील हुआ करती थी। आज देखा जाए तो कहीं अस्पताल तो कहीं होटल तो कहीं कपड़ों के शोरूम दिखेंगे। झील की जमीन को लेकर भी प्रशासन उदासीन है।
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नक्शा विभाग देता है निर्माण की मंजूरी-जिले में जगदीशपुर क्राॅसिंग के पहले स्थित विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण का कार्यालय है। यहां से निर्माण कराने के पहले अनुमति लेनी पड़ती है। सिटी मजिस्ट्रेट इस विभाग के नोडल अधिकारी हैं। सवाल यह है कि बिना अनुमति के निर्माण कैसे होते हैं। इन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।

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दो वर्षों में नक्शे के लिए आए आवेदन - 1639
पास नक्शों की संख्या - 1050
लंबित नक्शों की संख्या - 589

नोटिस भेजा गया - 183
कलीचाबाद में नदी किनारे बने सभी निर्माण अवैध हैं। ग्रीन बेल्ट में बिना अनुमति निर्माण कराए गए हैं। मास्टर प्लान में कुछ बदलाव हो रहे हैं। ग्रीन बेल्ट की सीमा बढ़ या घट सकती है। यदि बदलाव के बाद भी ये निर्माण ग्रीन बेल्ट में रहते हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - इंद्र नंदन सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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