{"_id":"571927234f1c1bd4518b4c55","slug":"gomati-water-polluted","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोमती के उत्तरी क्षेत्र के पानी में बढ़ा टीडीएस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोमती के उत्तरी क्षेत्र के पानी में बढ़ा टीडीएस
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Fri, 22 Apr 2016 12:47 AM IST
विज्ञापन
गोमती का जलस्तर नीचे जा रहा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में गोमती नदी के उत्तरी इलाके के लोग विषाक्त पानी पीने के लिए मजबूर हैं। दर्जन भर इलाकों में पानी का टोटल डिजाल्व सालिड (टीडीएस) ढाई हजार से अधिक तक पहुंच गया है। इससे करीब एक लाख की आबादी विषाक्त पानी पीने के लिए मजबूर है। इस इलाके के लोग हृदय और सुगर के मरीज हो रहे हैं।
गोमती नदी में जल सूख गया है। पूरी नदी गंदे नालों के पानी से भर गई है। जलस्तर काफी नीचे खिसक जाने से गोमती के उत्तरी इलाके भंडारी स्टेशन, रास मंडल, मधारेटोला, मुल्ला टोला, अटाला, उर्दू बाजार, चहारसू, हरदीपुर, सुक्खीपुर, शकरमंडी, पानदरीबा, मखदूमशाह अढ़न में पानी के टीडीएस की मात्रा 1200 से 2800 तक पहुंच गई है।
सबसे खराब स्थिति भंडारी इलाके की है। अमित मेहरोत्रा बताते हैं कि फेंट कंपनी यूरेका फोर्ब्स ने आरओ लगाने के लिए इस इलाके में कई जगह जांच की, जिसमें इसका खुलासा हुआ। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की जांच में गोमती नदी के हनुमान घाट पर 2180, दुमुहिया नाला के पास 2340 और बजरंग घाट पर 2300 से अधिक टीडीएस पाया गया। इससे गोमती के उत्तरी क्षेत्र में रहने वाले लोग वायरल, टायफाइड, कालरा, पीलिया समेत अन्य घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोमती नदी में जल सूख गया है। पूरी नदी गंदे नालों के पानी से भर गई है। जलस्तर काफी नीचे खिसक जाने से गोमती के उत्तरी इलाके भंडारी स्टेशन, रास मंडल, मधारेटोला, मुल्ला टोला, अटाला, उर्दू बाजार, चहारसू, हरदीपुर, सुक्खीपुर, शकरमंडी, पानदरीबा, मखदूमशाह अढ़न में पानी के टीडीएस की मात्रा 1200 से 2800 तक पहुंच गई है।
विज्ञापन
सबसे खराब स्थिति भंडारी इलाके की है। अमित मेहरोत्रा बताते हैं कि फेंट कंपनी यूरेका फोर्ब्स ने आरओ लगाने के लिए इस इलाके में कई जगह जांच की, जिसमें इसका खुलासा हुआ। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की जांच में गोमती नदी के हनुमान घाट पर 2180, दुमुहिया नाला के पास 2340 और बजरंग घाट पर 2300 से अधिक टीडीएस पाया गया। इससे गोमती के उत्तरी क्षेत्र में रहने वाले लोग वायरल, टायफाइड, कालरा, पीलिया समेत अन्य घातक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
विज्ञापन