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गंगा दशहरा पर उमड़े श्रद्धालु
ब्यूरो/अमर उजाला, जौनपुर
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:57 AM IST
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बक्शा के मई गांव में राउर बाबा के मेले में दर्शन पूजन करने के लिए लगी भीड़।
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क्षेत्र के मई गांव स्थित ऐतिहासिक राउर बाबा के मेले में गंगा दशहरा पर मंगलवार को दर्शनाथियों की भारी भीड़ रही। हजारों श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान कर मंदिर में मत्था टेककर मन्न्त मांगी। उधर पूरे दिन मंदिर परिसर में भीड़ लगी रही। जगह-जगह बैठे ओझा सोखा अपने तन्त्र-मन्त्र भूत-प्रेत से मुक्ति दिलाने का दावा करते देखे गये। मेले में शांति व्यवस्था के लिए पुलिस व पीएसी के जवान तैनात रहे।
सोमवार की रात्रि से ही मंदिर में मत्था टेकने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु मेले में बड़े-बड़े पताके के साथ अन्न जौ के साथ जयकारे लगाते हुए सरोवर की परिक्रमा कर समाधि स्थल का दर्शन किया। ऐसी धारणा है कि सच्चे मन से मांगी गयी हर मुराद बाबा अवश्य पूरा करते है। हालांकि इस मेले में सबसे ज्यादा लोग भुत-प्रेत से मुक्ति पाने हेतु आते है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा की समाधि स्थल पर आते ही सभी कष्ट दूर हो जाते है। प्रेत बाधा के कष्ट से छुटकारा मिलता है। मेला परिसर में सरोवर स्थल तक ओझा-सोखा का जमावड़ा लगा रहा। मेला पूरे एक सप्ताह तक चलता रहता है। मेले में सर्कस, झूला,जादूगर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
ऐतिहासिक राउर बाबा समाधि के ऊपर पार्वती, सरस्वती की प्रतिमा है। समाधि के पीछे पत्नी सती भुनगा देवी की समाधि स्थल है। वही से सटे हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। बाबा के समाधि के बगल में पुत्र कृपाल दास व हरिश्चंद्र की समाधि बनी हुई है। इन्ही के वंशजो में प्रति वर्ष एक-एक प्रधान पुजारी नियुक्त किया जाता है। गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को हर वर्ष यह मेला लगता है।
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सोमवार की रात्रि से ही मंदिर में मत्था टेकने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु मेले में बड़े-बड़े पताके के साथ अन्न जौ के साथ जयकारे लगाते हुए सरोवर की परिक्रमा कर समाधि स्थल का दर्शन किया। ऐसी धारणा है कि सच्चे मन से मांगी गयी हर मुराद बाबा अवश्य पूरा करते है। हालांकि इस मेले में सबसे ज्यादा लोग भुत-प्रेत से मुक्ति पाने हेतु आते है। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा की समाधि स्थल पर आते ही सभी कष्ट दूर हो जाते है। प्रेत बाधा के कष्ट से छुटकारा मिलता है। मेला परिसर में सरोवर स्थल तक ओझा-सोखा का जमावड़ा लगा रहा। मेला पूरे एक सप्ताह तक चलता रहता है। मेले में सर्कस, झूला,जादूगर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
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ऐतिहासिक राउर बाबा समाधि के ऊपर पार्वती, सरस्वती की प्रतिमा है। समाधि के पीछे पत्नी सती भुनगा देवी की समाधि स्थल है। वही से सटे हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। बाबा के समाधि के बगल में पुत्र कृपाल दास व हरिश्चंद्र की समाधि बनी हुई है। इन्ही के वंशजो में प्रति वर्ष एक-एक प्रधान पुजारी नियुक्त किया जाता है। गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को हर वर्ष यह मेला लगता है।
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