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Jaunpur News: सामूहिक विवाह योजना के टेंडर में फर्जीवाड़ा, उपहार आपूर्ति करने वाली फर्म होगी बाहर
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अंकुर शुक्ला जौनपुर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत उपहार सामग्री की आपूर्ति के लिए जारी टेंडर में फर्जी प्रमाण पत्र जमा करने का मामला सामने आया है। लखनऊ की फर्म मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन पर फर्जी आईएसओ प्रमाण पत्र और कूटरचित अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर करीब 4.03 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल करने का आरोप है। बांदा में अनुभव प्रमाण पत्र की जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद अब जौनपुर में भी संबंधित फर्म को टेंडर से बाहर करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जौनपुर में 1922 जोड़ों को उपहार सामग्री वितरित की जानी है। इसके लिए करीब 4.03 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। टेंडर हासिल करने वाली लखनऊ की फर्म मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन पर फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल करने की शिकायत शासन को मिली थी। समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह ने 28 अक्तूबर को जौनपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर बांदा के जिला समाज कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए थे।
डीएम के माध्यम से निदेशालय को आख्या उपलब्ध कराने को कहा। निदेशक ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का प्रस्ताव भी मांगा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी नवीन पटेल ने बताया कि फर्म को बांदा से जारी किया गया अनुभव प्रमाण पत्र त्रुटिपूर्ण है। ऐसे में संबंधित फर्म का टेंडर हटाकर दूसरी फर्म को दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय कार्रवाई चल रही है।
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जांच में नहीं मिला रिकॉर्ड
बांदा के जिला समाज कल्याण अधिकारी अभिषेक अवस्थी की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में वहां उपहार सामग्री की आपूर्ति मेसर्स मुकेश ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ने की थी। वही, अनुभव प्रमाणपत्र के संबंध में एक अनुभव प्रमाण पत्र अभिलेखों की जांच में संबंधित पत्र संख्या और दिनांक का कोई प्रमाण पत्र दर्ज नहीं मिला। इसे असत्य और निराधार बताया गया है। निदेशालय ने जौनपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से पहले भेजी गई आख्या पर भी आपत्ति जताई थी। निदेशक ने पत्र में कहा था कि बांदा के जिला समाज कल्याण अधिकारी की 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों का समुचित परीक्षण किए बिना आख्या भेजी गई। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से नए सिरे से जांच रिपोर्ट मांगी गई।
आईएसओ प्रमाणपत्र की वैधता पर भी सवाल
गोंडा के शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार ने शासन को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि फर्म ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के टेंडर में आईएसओ 45001:2018 का ऐसा प्रमाण पत्र लगाया है जिसकी मूल वैधता 12 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुकी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रमाण पत्र को कूटरचित कर निविदा में शामिल किया गया। अनिवार्य ऑडिट रिपोर्ट में भी गड़बड़ी और निविदा की शर्तों के अनुसार आवश्यक प्रपत्रों को स्वयं प्रमाणित नहीं किए जाने की शिकायत की गई थी। निदेशालय ने आरोपों की पुष्टि होने पर फर्म का टेंडर निरस्त करने, प्राथमिकी दर्ज कराने और उसे ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जौनपुर में 1922 जोड़ों को उपहार सामग्री वितरित की जानी है। इसके लिए करीब 4.03 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। टेंडर हासिल करने वाली लखनऊ की फर्म मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन पर फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल करने की शिकायत शासन को मिली थी। समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह ने 28 अक्तूबर को जौनपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर बांदा के जिला समाज कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए थे।
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डीएम के माध्यम से निदेशालय को आख्या उपलब्ध कराने को कहा। निदेशक ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का प्रस्ताव भी मांगा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी नवीन पटेल ने बताया कि फर्म को बांदा से जारी किया गया अनुभव प्रमाण पत्र त्रुटिपूर्ण है। ऐसे में संबंधित फर्म का टेंडर हटाकर दूसरी फर्म को दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय कार्रवाई चल रही है।
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जांच में नहीं मिला रिकॉर्ड
बांदा के जिला समाज कल्याण अधिकारी अभिषेक अवस्थी की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में वहां उपहार सामग्री की आपूर्ति मेसर्स मुकेश ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ने की थी। वही, अनुभव प्रमाणपत्र के संबंध में एक अनुभव प्रमाण पत्र अभिलेखों की जांच में संबंधित पत्र संख्या और दिनांक का कोई प्रमाण पत्र दर्ज नहीं मिला। इसे असत्य और निराधार बताया गया है। निदेशालय ने जौनपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी की ओर से पहले भेजी गई आख्या पर भी आपत्ति जताई थी। निदेशक ने पत्र में कहा था कि बांदा के जिला समाज कल्याण अधिकारी की 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों का समुचित परीक्षण किए बिना आख्या भेजी गई। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से नए सिरे से जांच रिपोर्ट मांगी गई।
आईएसओ प्रमाणपत्र की वैधता पर भी सवाल
गोंडा के शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार ने शासन को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि फर्म ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के टेंडर में आईएसओ 45001:2018 का ऐसा प्रमाण पत्र लगाया है जिसकी मूल वैधता 12 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुकी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रमाण पत्र को कूटरचित कर निविदा में शामिल किया गया। अनिवार्य ऑडिट रिपोर्ट में भी गड़बड़ी और निविदा की शर्तों के अनुसार आवश्यक प्रपत्रों को स्वयं प्रमाणित नहीं किए जाने की शिकायत की गई थी। निदेशालय ने आरोपों की पुष्टि होने पर फर्म का टेंडर निरस्त करने, प्राथमिकी दर्ज कराने और उसे ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।