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छठवीं बार महिला के हाथ में होगी जिला पंचायत अध्यक्ष की कमान
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जौनपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण तय होने के साथ ही जिले में सियासी उठापटक तेज हो गया है। अध्यक्ष का पद फिर से महिलाओं के लिए आरक्षित हुआ है। वर्ष 1995 में जिला परिषद से जिला पंचायत बनने के बाद से छठवीं बार महिला के हाथ में कमान होगी। अब तक सिर्फ एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर पुरुष आसीन हुए हैं। फिर से महिला आरक्षण ने कई दिग्गजों की गणित गड़बड़ा दी है तो कई नए दावेदार भी मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुके हैं।
वर्ष 1995 में जिला पंचायत का पहला चुनाव हुआ था। तब यह सीट अनारक्षित थी, लेकिन इस पर कमला सिंह निर्वाचित हुई थीं। उनके बाद वर्ष 2000 में प्रभावती पाल को जिले का प्रथम नागरिक बनने का मौका मिला। वर्ष 2005 में भी महिला के हाथों कमान रही। तब कलावती यादव अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2010 के चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई थी। इस सीट पर अनीता चौधरी को बैठने का मौका मिला। बाद में विवादों के कारण उन्हें सीट छोड़ना पड़ा तो शारदा चौधरी अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। इस बार राजबहादुर यादव निर्वाचित हुए। इस लिहाज से अब तक छह चुनावों में से पांच बार महिलाओं के पाले में ही जौनपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी रही है। इस बार अनुमान लगाया जा रहा था कि सीट अनारक्षित या पिछड़ा वर्ग महिला के खाते में जाएगी। दावेदार भी इसी आधार पर तैयारी में जुटे थे। शासन की ओर से जारी सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष का आरक्षण महिलाओं के लिए किया गया है। लिहाजा यहां मुकाबला रोचक होने की उम्मीद लगाई जाने लगी है। जिले के एक पूर्व जनप्रतिनिधि अपनी पत्नी को पहले ही यहां की कुर्सी पर बैठाने का मन बनाते हुए चुनावी गोटियां सेट करने में जुटे हुए हैं। अब तक शांत बैठा विरोधी खेमा भी समीकरण बनाने में लग गया है। उनकी निगाह अब वार्डों के आरक्षण पर टिक गई है।
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जिला पंचायत में हैं 83 वार्ड
जौनपुर जिला पंचायत में कुल 83 वार्ड हैं। आरक्षण के पैमाने पर देखें तो 21 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति और 27 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होनी हैं। शेष 26 सीटें अनारक्षित रहेंगी। इसमें महिलाओं के लिए आरक्षण होना है। इसी आधार पर अध्यक्ष के दावेदार अपनी जीत का खाका खींचने में जुटे हैं।
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वर्ष 1995 में जिला पंचायत का पहला चुनाव हुआ था। तब यह सीट अनारक्षित थी, लेकिन इस पर कमला सिंह निर्वाचित हुई थीं। उनके बाद वर्ष 2000 में प्रभावती पाल को जिले का प्रथम नागरिक बनने का मौका मिला। वर्ष 2005 में भी महिला के हाथों कमान रही। तब कलावती यादव अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। वर्ष 2010 के चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई थी। इस सीट पर अनीता चौधरी को बैठने का मौका मिला। बाद में विवादों के कारण उन्हें सीट छोड़ना पड़ा तो शारदा चौधरी अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। इस बार राजबहादुर यादव निर्वाचित हुए। इस लिहाज से अब तक छह चुनावों में से पांच बार महिलाओं के पाले में ही जौनपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी रही है। इस बार अनुमान लगाया जा रहा था कि सीट अनारक्षित या पिछड़ा वर्ग महिला के खाते में जाएगी। दावेदार भी इसी आधार पर तैयारी में जुटे थे। शासन की ओर से जारी सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष का आरक्षण महिलाओं के लिए किया गया है। लिहाजा यहां मुकाबला रोचक होने की उम्मीद लगाई जाने लगी है। जिले के एक पूर्व जनप्रतिनिधि अपनी पत्नी को पहले ही यहां की कुर्सी पर बैठाने का मन बनाते हुए चुनावी गोटियां सेट करने में जुटे हुए हैं। अब तक शांत बैठा विरोधी खेमा भी समीकरण बनाने में लग गया है। उनकी निगाह अब वार्डों के आरक्षण पर टिक गई है।
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जिला पंचायत में हैं 83 वार्ड
जौनपुर जिला पंचायत में कुल 83 वार्ड हैं। आरक्षण के पैमाने पर देखें तो 21 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति और 27 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होनी हैं। शेष 26 सीटें अनारक्षित रहेंगी। इसमें महिलाओं के लिए आरक्षण होना है। इसी आधार पर अध्यक्ष के दावेदार अपनी जीत का खाका खींचने में जुटे हैं।
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